आशा कर्मियों ने कराया यूपी में कोरोना काबू, 30 लाख प्रवासी मजदूर तलाशे

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Wed, 01 Jul 2020 03:39 AM IST
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : शुभम बंसल

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के गांव निबुही कलां का 20 वर्षीय युवक सुरेश मुंबई में एक जूस शॉप पर काम करता था। लॉकडाउन के बाद सुरेश अन्य प्रवासी मजदूरों के साथ मई की शुरुआत में एक ट्रक में पांच दिन का सफर कर गांव लौट आया। गांव की आशा कार्यकत्री चंद्रप्रभा ने सुरेश की जानकारी मिलते ही उससे मिलकर स्वास्थ्य का पूरा ब्योरा लिया और जिले की रैपिड रिस्पांस टीम को जानकारी दी, जिसने तत्काल पहुंचकर सुरेश को घर पर ही क्वारंटीन कर दिया।
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चंद्रप्रभा ने क्वारंटीन के दौरान सुरेश से दूरी रखने के लिए घर के अन्य सदस्यों की काउंसिलिंग की और समय-समय पर सुरेश के स्वास्थ्य का हाल लेती रही। नतीजा ये रहा कि सुरेश में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण दिखते ही चंद्रप्रभा ने उसे तत्काल चित्तौड़ा कोविड केयर फैसेलिटी में भिजवा दिया। साथ ही सुरेश के परिवार और उसके संपर्क में रहे अन्य प्रवासी मजदूरों की भी कोविड-19 जांच की जिम्मेदारी निभाई। इसके चलते सुरेश के कारण कोरोना संक्रमण दूसरों में नहीं फैल पाया।
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