Asaduddin Owaisi: 'करोड़ों भारतीयों की प्राइवेसी खतरे में...', संचार साथी एप को लेकर ओवैसी का बड़ा बयान
Owaisi on Sanchar Saathi App: असदुद्दीन ओवैसी ने संचार साथी एप को मोदी सरकार की निजता खत्म करने की नई कोशिश बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनिवार्य प्री-इंस्टॉल और सर्कुलर को सार्वजनिक न करना सरकार की नीयत पर सवाल उठाता है।
विस्तार
संचार साथी एप को अनिवार्य रूप से स्मार्टफोन में प्री-इंस्टॉल करने के फैसले पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस कदम को मोदी सरकार द्वारा नागरिकों की निजता कमजोर करने की नई कोशिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला करोड़ों भारतीयों की प्राइवेसी को खतरे में डाल सकता है।
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने मंगलवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि संचार साथी एप को अनिवार्य और हटाने योग्य न बनाना सरकार को हर डिवाइस तक सीधी पहुंच देने जैसा है। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा जारी किया गया सर्कुलर भी सार्वजनिक नहीं किया गया, जो इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। ओवैसी ने चेतावनी दी कि यह कदम सरकारी ‘स्नूपिंग’ यानी निगरानी को आसान बना देगा।
#SancharSaathiApp is another one of Modi govt’s efforts to destroy citizen privacy & put Indians at risk. The fact that the circular wasn’t even made public reflects poorly on the govt. Making the app mandatory and unremovable would make each one of our devices susceptible to… https://t.co/2qwt1C76Cf
विज्ञापन विज्ञापन— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) December 2, 2025
सरकार की सफाई
इस विवाद के बीच केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को कहा कि संचार साथी एप पूरी तरह वैकल्पिक है और इसे चाहें तो यूजर अपने फोन से हटा सकते हैं। संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एप लोगों को डिजिटल फ्रॉड और चोरी से बचाने के लिए बनाया गया है और यह तब तक सक्रिय नहीं होता जब तक यूजर खुद इसे रजिस्टर नहीं करते।
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एप को लेकर विवाद क्यों?
ओवैसी की आपत्ति इस बात को लेकर है कि सरकार ने फोन कंपनियों को इसे अनिवार्य रूप से सभी नए स्मार्टफोन में डालने का निर्देश दिया है। उनका कहना है कि जब किसी एप को हटाया न जा सके तो यह निजता पर गंभीर खतरा बन जाता है। ओवैसी का तर्क है कि सरकार जिस तरह डिजिटल हस्तक्षेप बढ़ा रही है, वह नागरिक अधिकारों के लिए चिंता पैदा करता है।
एप के उद्देश्यों पर दो अलग नजरिये
जहां सरकार का कहना है कि संचार साथी एप नागरिकों को धोखाधड़ी और मोबाइल चोरी से बचाने के लिए है, वहीं आलोचकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल निगरानी के लिए हो सकता है। ओवैसी के मुताबिक, एप को अनिवार्य बनाना गलत है, क्योंकि यह हर उपकरण को संभावित सरकारी नियंत्रण के दायरे में ले आता है। उन्होंने कहा कि यह कदम लोगों की स्वतंत्रता और डिजिटल स्पेस की सुरक्षा के खिलाफ है।
विवाद के बीच आगे क्या?
एप को लेकर बहस के बीच सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। सिंधिया दावा कर रहे हैं कि एप पूरी तरह सुरक्षित और वैकल्पिक है, जबकि ओवैसी इसे निजता के लिए बड़ा खतरा बता रहे हैं। दोनों पक्षों के विपरीत दावों के चलते अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस एप को लेकर आगे क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या इसके निर्देशों में कोई बदलाव किया जाता है।