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Arvind Kejriwal: एंटी इनकंबेंसी फैक्टर के घेरे में केजरीवाल, ये कोशिश कितनी होगी कामयाब; भाजपा ने किया हमला
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दिल्ली के सियासी चौसर पर दिलचस्प दांव-पेंच
- फोटो :
अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केवल चार महीने बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव होंगे। 2015 से दिल्ली की सियासत में अजेय बनकर उभरे अरविंद केजरीवाल के लिए यह चुनाव 'कठिन अग्नि परीक्षा' साबित होने वाला है। 2015 और 2020 में उनकी छवि एक ईमानदार नेता की थी और उन्हें इसका लाभ मिल रहा था, लेकिन इस बार उनकी सरकार के ऊपर शराब घोटाले सहित कई गंभीर आरोप हैं। उन्हें दस साल के शासन से उपजे एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से भी निपटना होगा। क्या अरविंद केजरीवाल एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से निबट पाएंगे?इस बार अरविंद केजरीवाल को जब से जमानत मिली है, वे विशेष रूप से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वे लगातार मुख्यमंत्री आतिशी मारलेना के साथ सड़कों का निरीक्षण कर रहे हैं और उसे ठीक कराने का वादा कर रहे हैं। रविवार को दिल्ली सरकार के सभी मंत्रियों ने विशेष बैठक कर यह निर्णय लिया है कि अब सभी मंत्री दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे। जहां भी सड़कें खराब होंगी, उसे ठीक कराने का काम करेंगे।
जल्दी ही सभी आम आदमी पार्टी विधायकों को भी यह आदेश दिया जा सकता है कि वे अपने-अपने इलाकों की सड़कों पर उतरें और टूटी-फूटी सड़कों के निर्माण का काम करवाएं। साथ ही ऐसी कई और कोशिशें की जा सकती हैं जिससे सरकार की छवि जनता के बीच सुधरे।
आतिशी को लाने के पीछे भी यही उद्देश्य
अरविंद केजरीवाल ने इस बार जेल से बाहर आने के बाद आतिशी मारलेना को मुख्यमंत्री बना दिया। इसके पीछे तमाम कारण गिनवाए गए थे, लेकिन उसमें एक अहम कारण यह भी था कि शराब घोटाले के कारण इससे अरविंद केजरीवाल के प्रति जो सीधा नकारात्मक असर था, उसे कम करने में आम आदमी पार्टी को सफलता मिली है। एंटी इनकंबेंसी फैक्टर को कमजोर करने का यह तरीका कितना कामयाब रहेगा, यह दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद ही पता चलेगा।
योजनाओं में बदलाव भी डालेगा असर
मुफ्त बिजली-पानी की योजना गरीबों के बीच बहुत लोकप्रिय बनकर उभरी थी। अरविंद केजरीवाल के लिए यह सबसे बड़ी ताकत बन गई थी। लेकिन दिल्ली में इस योजना का लाभ पाने वालों की संख्या में भारी कमी हुई है। 200 यूनिट फ्री के सरकार के दावे के बाद भी लोगों को 1500 रुपये से दो हजार रुपये तक बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। पीपीआरसी और बढ़े किराए के कारण लोगों को बिजली महंगी मिल रही है। व्यावसायिक बिजली की दरों में भी तेज वृद्धि हुई है। इससे पार्टी की उस लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है जो उसने मुफ्त बिजली-पानी देकर पाई थी।
भाजपा ने किया हमला
इसे दिल्ली सरकार की छवि बनाने की कोशिश करार दिया जा रहा है जिससे वह एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से निबट सके। भाजपा ने इस पर सरकार पर जोरदार हमला किया है। पार्टी ने कहा है कि अंतिम क्षणों में सरकार काम करने का दिखावा कर एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से निबटना चाहती है, लेकिन जनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आतिशी मारलेना की सरकार उस कमजोर छात्र की तरह व्यवहार कर रही है जो पूरे साल भर तो पढ़ाई नहीं करता है, लेकिन परीक्षा के समय ज्यादा पढ़ाई कर अच्छे नंबर लाना चाहता है। लेकिन इस तरह की कोशिश कभी सफल नहीं होती। यही हाल दिल्ली सरकार का भी होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता गंवा दिया है और जनता उसे सत्ता से हटाने के लिए तैयार है।