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आरुषि की फ्रेंड ने ब्लॉग लिखकर पूछे गंभीर सवाल, कहा- उस रात के सच को सबने तोड़ा-मरोड़ा

Thu, 12 Oct 2017 08:46 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा Updated Thu, 12 Oct 2017 08:46 PM IST
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arushi were convicted of killing their daughter high court of Allahabad said parents are not guilty
आरुषि और फिजा - फोटो : socal media

चर्चित आरुषि हत्याकांड में आरोपी तलवार दंपति को इलाहाबाद कोर्ट ने गुरुवार को बरी कर दिया। अब आरुषि हत्याकांड और उलझ चुका है सवाल यह है कि आखिर आरुषि को मारा किसने?

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आरुषि की हत्या को लेकर मीडिया, सीबीआई और पुलिस सहित समाज पर कई सवाल उठ रहे हैं और ये सवाल उठा रहीं हैं आरुषि की बचपन की दोस्त फिजा झा। वैसे तो फिजा ने ये पत्र इंग्लिश वेबसाइट 'द क्विंट' पर लिखा है। उसने इस हत्याकांड पर कई सवाल पूछे हैं। 

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फिजा और आरुषि डीपीएस नोएडा में साथ पढ़ती थीं वो डांस क्लास में भी साथ-साथ जाती थीं। फिजा ने ब्लॉग में लिखा है कि हत्या के एक दिन पहले आरुषि उसके घर आई थी, हंसती हुई, खिलखिलाती, कूदती फांदती लेकिन उसे कोल्ड था। हम दोनों स्कूल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। हमने उस डरावनी रात को भी फोन पर बात की थी और उस वक्त सबकुछ सामान्य लग रहा था। 
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लेकिन अगली सुबह 16 मई को आरुषि हमारे बीच नहीं थी...

पढ़ें: आरुषि हत्याकांडः 9 साल बाद सब खाली हाथ, सवाल फिर वही- आखिर कातिल कौन?

तब मैं 14 साल की थी और अब मैं 21 साल की हो चुकी हूं। अब मैं उस शहर से भी दूर दूसरे शहर में रह रही हूं। तब और आज में काफी कुछ बदल चुका है, लेकिन कुछ सवाल आज भी मुझे झकझोरते हैं। क्योंकि मैंने पूरे मामले को बहुत नजदीक से देखा है, चाहे पूरे मामले में मीडिया के द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग हो या फिर पुलिस, सीबीआई या फिर कानून।

उस रात की कहानी को पूरी तरह से तोड़ा मरोड़ा गया

arushi were convicted of killing their daughter high court of Allahabad said parents are not guilty

उस रात की कहानी को पूरी तरह से तोड़ा मरोड़ा गया। उस रात को बार-बार लिखा गया, पूरे मामले को ट्विस्ट किया गया और कन्फ्यूज भी किया गया जिसे पढ़, सुन और देखकर हर किसी ने इस पूरे मामले को अपने हिसाब से लिखा। लेकिन सारी कहानी बिना सबूत और किसी लॉजिक के लिखी गई।

मैं किसी भी तरह से मजबूर नहीं हूं कि मैं तलवार दंपति को दोषी मानू या बेगुनाह। क्योंकि तलवार न तो मेरे रिश्तेदार हैं और न ही मेरे फैमिली फ्रेंड हैं। लेकिन हां आरुषि मेरी बचपन की पहली बेस्ट फ्रेंड है जो मेरी क्लासमेट थी और डांस क्लास पार्टनर भी थी। मैं उसे पांच साल की उम्र से जानती थी। मैं जानती हूं कि उसके बारे में जितनी भी बातें कहीं गईं वो गलत है, क्योंकि वो एक मासूम लड़की थी। 

मैं जानती हूं हत्या के मामले किसी के विश्वास पर नहीं बल्कि मजबूत सबूतों, साक्ष्यों पर सॉल्व किए जाते हैं जो इस पूरे मामले में कहीं दिखाई नहीं देता है। आरुषि की हत्या की सुबह 100 से अधिक पड़ोसी, परिवार वाले, दोस्त, पुलिस अधिकारी, पत्रकार सभी घर पर थे। घर में सभी जगह लोग आ जा रहे थे। घर में कोई भी ऐसी जगह नहीं थी जहां लोग आ जा न रहे हों। रात की शराब की बोतलें बिखरी पड़ी थीं। बेडरूम में खून के छीटे दिवारों पर थे। 

आज जब कोर्ट ने तलवार दंपति को बरी कर दिया है तब मैं पूछना चाहती हूं कि मीडिया ने जिस तरह से तलवार दंपति पर, उनके रहन सहन पर सवाल उठाए। पिता को दोषी बताया क्या वो उनका वो समय वापस कर पाएंगे।

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