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Arunachal: अमित शाह के दौरे से चीन को क्यों लगी मिर्ची? जानें अरुणाचल का इतिहास और ड्रैगन से विवाद की कहानी

Tue, 11 Apr 2023 04:52 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 11 Apr 2023 04:52 PM IST
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सार
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे। केंद्रीय गृहमंत्री ने किबिथू में 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' और विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इससे पहले चीन ने शाह के दौरे पर एतराज जताया था।
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Arunachal: Why China objected Amit Shah visit, history of Arunachal and the timeline of dispute with dragon
भारत चीन - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान गृहमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश को कई सौगात दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि  देश की सुई की नोक जितनी जमीन भी कोई नहीं ले सकता। हमारे  सैनिकों के पराक्रम से हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। शाह चीन के एतराज के बीच अरुणाचल पहुंचे थे। 



 
शाह के अरुणाचल दौरे पर चीन ने क्यों एतराज जताया था? चीन के एतराज पर शाह ने क्या जवाब दिया? अरुणाचल को लेकर चीन से भारत का क्या विवाद है? अरुणाचल का इतिहास क्या कहता है? इसकी भौगोलिक स्थिति कैसी है? आइये जानते हैं…

अमित शाह का अरुणाचल दौरा
अमित शाह का अरुणाचल दौरा - फोटो : SOCIAL MEDIA
सबसे पहले जानिए, अमित शाह के अरुणाचल दौरे की अहमियत… 
केंद्र सरकार देश के सीमावर्ती गांवों के विकास पर जोर दे रही है। इसके लिए वाइब्रेंट विलेज योजना की घोषणा की गई है। इसी के तहत केंद्रीय गृहमंत्री ने किबिथू में 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' और विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। भारत के इस कदम से चीन तिलमिलाया हुआ है। दरअसल, चीन अरुणाचल के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है। इसी के चलते चीन ने अमित शाह के दौरे पर एतराज जताया था।

चीन का ध्वज
चीन का ध्वज - फोटो : पिक्साबे
भारत के गृहमंत्री के दौरे पर चीन क्यों एतराज जता रहा है?
विस्तारवादी चीन अरुणाचल सीमा पर अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है। हाल ही में उसने अरुचाल के कई गावों को चीन का क्षेत्र बताकर उनके चीनी नाम जारी किए थे। भारत ने इस पर एतराज जताया था। भारत की ओर कहा गया था कि नाम बदलने से वास्तविकता नहीं बदल जाएगी। इस तनातनी के बीच शाह का दौरा हुआ है। 

शाह की अरुणाचल यात्रा पर चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया, ‘जांगनान चीन का हिस्सा है।’ भारत के गृहमंत्री ने चीन के हिस्से जांगनान का दौरा करके चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन किया है। चीनी विदेश विभाग ने चेतावनी भरे सुर में कहा था कि यह दौरा सीमा पर शांति की पहल के लिए अनुकूल नहीं है। बता दें, चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है।

अमित शाह का अरुणाचल दौरा
अमित शाह का अरुणाचल दौरा - फोटो : SOCIAL MEDIA
चीन के एतराज पर शाह ने क्या जवाब दिया? 
अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूरा देश आज अपने घरों में चैन की नींद सो सकता है, क्योंकि हमारे ITBP के जवान और सेना हमारी सीमाओं पर दिन-रात काम कर रहे हैं। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि हम पर बुरी नजर डालने की ताकत किसी में नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमारी जमीन की तरफ कोई आंख उठाकर भी नहीं देख सकता। सैनिकों के पराक्रम से हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। ऐसे में हमारी सीमा में अतिक्रमण की तो कोई बात ही नहीं है। देश की सुई की नोंक जितनी जमीन भी कोई नहीं ले सकता।

भारत चीन
भारत चीन - फोटो : AMAR UJALA
अरुणाचल को लेकर भारत-चीन में क्या विवाद है?
पूरे अरुणाचल प्रदेश समेत करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर के इलाके पर चीन अपना दावा करता है। इस इलाके को वह जांगनान कहता है और इसे दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। अपने मैप में भी वह अरुणाचल प्रदेश को चीन के हिस्से के रूप में दिखाता है। कभी-कभी चीनी मैप में इसे तथाकथित अरुणाचल प्रदेश के रूप में भी दर्शाया जाता है। इस भारतीय इलाके पर अपना दावा जताने के लिए चीन समय-समय पर कई तरह की हरकतें करता रहा है। 2017 में अपने इन्हीं मंसूबो के तहत अरुणाचल के छह इलाकों के चीनी नाम प्रकाशित किए। 2021 में इसे और बढ़ाते हुए ऐसे 15 नाम और प्रकाशित किए गए। 

चीन के इन नामों को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। पिछले साल विदेश मंत्रालय ने इस पर कहा था कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश के इलाकों को इस तरह का नाम देने से सच्चाई नहीं बदलेगी।

आखिर कुल कितने वर्ग किलोमीटर भूक्षेत्र को लेकर भारत-चीन में विवाद है?

मार्च 2020 में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने संसद में बताया था कि पूर्वी क्षेत्र में चीन अरुणाचल प्रदेश राज्य में लगभग 90 हजार वर्ग किलोमीटर के भारतीय भूक्षेत्र पर अपना दावा करता है। इसी तरह पश्चिमी क्षेत्र के लद्दाख में लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर का भारतीय भूक्षेत्र चीन के कब्जे में है। इसके अलावा 2 मार्च 1963 को चीन और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान 'सीमा करार' के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के 5 हजार 180 वर्ग किलोमीटर के भारतीय भूक्षेत्र को अवैध रूप से चीन को सौंप दिया था। ये सभी इलाके भारत का अभिन्न अंग हैं। इस तथ्य को भारत की ओर से कई मौकों पर चीन को भी स्पष्ट रूप से बताया जा चुका है।

tawang arunachal pradesh
tawang arunachal pradesh - फोटो : istock
अरुणाचल का इतिहास क्या है?
अरुणाचल भारत का 24वां राज्य है और इसका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। पहले यह नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) के रूप में जाना जाता था बाद में इसक का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया और उसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिल गया।

 1912-1913 में, ब्रिटिश सरकार ने स्थानीय लोगों के लिए नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर ट्रैक्ट्स (एनईएफटी) का गठन किया था। इस क्षेत्र में तीन इलाके शामिल थे - बल्लीपारा फ्रंटियर, लखीमपुर फ्रंटियर और सादिया फ्रंटियर पथ। 1946 में भू क्षेत्रों को पुनर्गठित किया गया और इसके प्रशासन का जिम्मा असम के राज्यपाल को सौंपा गया। अब इसमें सादिया, लखीमपुर, तिरप, सेला सब एजेंसी और सुबनसिरी क्षेत्र शामिल किए जा चुके थे। 26 जनवरी, 1950 में सभी मैदानी क्षेत्रों बालीपारा, तिरप, अबोर हिल जिले और मिश्मी हिल्स जिले का प्रशासन असम सरकार को हस्तांतरित कर दिया गया। 1951 में क्षेत्र को फिर से पुनर्गठित किया गया और त्युएनसांग फ्रंटियर डिवीजन बनाया गया। बाद में इसका नगालैंड में विलय हो गया। नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर (एडमिनिस्ट्रेशन) रेगुलेशन, 1954 की शुरुआत के बाद क्षेत्र के शेष हिस्सों को नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) नाम दिया गया। पहले तो नेफा को विदेश मंत्रालय के अधीन लाया गया और अगस्त 1965 में प्रशासन का जिम्मा गृह मंत्रालय को सौंप दिया गया जिसके अधीन 1972 तक रहा। इसी साल इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला। अरुणाचल प्रदेश को 20 फरवरी, 1987 को भारत के 24 वें राज्य का दर्जा हासिल हुआ। 

अरुणाचल पर चीन की नजर आज से नहीं बल्कि दशकों से है। 1962 चीन-भारत युद्ध भी चीन की इन्हीं करतूतों का नतीजा था। दरअसल, 20 अक्टूबर 1962 को चीनी सेना ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश (नेफा) पर एक साथ हमला किया था। युद्ध 21 नवंबर तक चला, जब चीन एकतरफा रूप से भारतीय क्षेत्रों से हट गया। इस युद्ध में लगभग 3,250 भारतीय सैनिक शहीद हुए। इस दौरान भारत को अक्साई चिन में लगभग 43,000 वर्ग किलोमीटर भूमि खोनी पड़ी।

अरुणाचल प्रदेश का तवांग शहर
अरुणाचल प्रदेश का तवांग शहर - फोटो : Social media
इसका भूगोल कैसा है?
उगते सूरज को सबसे पहले नमस्कार करने वाला अरुणाचल भौगोलिक नजरिये से काफी अहम है। राज्य, भारत के उत्तर पूर्वी भाग में 83,743 वर्ग किमी क्षेत्र में स्थित है और इसकी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पश्चिम में भूटान (160 किमी), उत्तर और उत्तर-पूर्व में चीन (1,080 किमी) और पूर्व में म्यांमार (440 किमी) से लगती है। यह उत्तर में बर्फ से ढके पहाड़ों से लेकर दक्षिण में ब्रह्मपुत्र घाटी के मैदानी इलाकों तक फैला हुआ है। अरुणाचल पूर्वोत्तर में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है, यहां तक कि असम से भी बड़ा है जो सबसे अधिक आबादी वाला है।

अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति (फाइल फोटो)
अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
यहां की आबादी कितनी है?
2011 की जनसंख्या जनगणना के अनुसार, राज्य की आबादी 13,83,727 है, जिनमें से 7,13,902 पुरुष और 6,69,815 महिलाएं हैं। यहां की साक्षरता दर 65.38 फीसदी है। 20 से अधिक प्रमुख जनजातियां हैं और बड़ी संख्या में उप जनजातियां हैं। राज्य के दो-तिहाई से अधिक लोगों को आधिकारिक तौर पर अनुसूचित जनजातियों के रूप में नामित किया गया है। अनुसूचित जनजातियों के अलावा, अरुणाचल प्रदेश की शेष आबादी में बांग्लादेश के साथ-साथ असम, नागालैंड और भारत के अन्य राज्यों के अप्रवासी शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश के कुछ निवासी हिंदू धर्म का पालन करते हैं, विशेष रूप से वे जो तराई के पास असम सीमा पर रहते हैं। तिब्बती बौद्ध धर्म तिब्बती सीमा के पास के समूहों में पाया जाता है, और म्यांमार सीमा से सटी कुछ जनजातियां थेरवाद बौद्ध धर्म को मानती हैं।
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