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अरुणाचल प्रदेश : सियांग प्रोजेक्ट पर उठे सवाल तो सोशल मीडिया पर लगा ब्रेक? मीडिया संगठनों ने मांगा जवाब

Mon, 05 Oct 2026 03:13 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 05 Oct 2026 03:13 PM IST
सार

अरुणाचल प्रदेश के पत्रकार संगठनों ने अपर सियांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की रिपोर्टिंग से जुड़ी सोशल मीडिया सामग्री और पत्रकारों के अकाउंट पर कथित प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रतिबंधों का कानूनी आधार सार्वजनिक करने और वैध पत्रकारिता सामग्री बहाल करने की मांग की है, जबकि प्रोजेक्ट को लेकर सियांग क्षेत्र में विरोध जारी है।

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Arunachal Pradesh Questions raised Siang project did social media throttled Media organizations seek answers
सियांग प्रोजेक्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश के दो प्रमुख मीडिया संगठनों ने सोमवार को कहा कि राज्य के कई पत्रकारों ने शिकायत की है कि अपर सियांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ी सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई वीडियो और दूसरी सामग्री भारत में या तो दिखाई नहीं दे रही है या फिर कुछ पत्रकारों के अकाउंट तक पहुंच सीमित कर दी गई है।

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मीडिया संगठनों ने जताई ‘गंभीर चिंता’
अरुणाचल प्रेस क्लब (APC) और अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (APUWJ) ने संयुक्त बयान जारी कर इस मामले पर गंभीर चिंता जताई। दोनों संगठनों ने मांग की कि केवल किसी परियोजना की रिपोर्टिंग करने की वजह से प्रतिबंधित की गई वैध पत्रकारिता सामग्री को तुरंत बहाल किया जाए। साथ ही उन्होंने पत्रकारों या समाचार संगठनों पर लगाए गए हर प्रतिबंध की स्पष्ट वजह बताने की मांग की।
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‘खबर असहज हो तो भी पत्रकारिता नहीं रुक सकती’
मीडिया संगठनों ने कहा कि प्रेस का काम हर पक्ष को निष्पक्ष और निडर होकर सामने रखना है। संयुक्त बयान में कहा गया, “सिर्फ इसलिए पत्रकारिता को परेशानी नहीं माना जा सकता क्योंकि जमीन से आने वाली खबरें असहज, आलोचनात्मक या आधिकारिक रुख से अलग हैं।”
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अपर सियांग प्रोजेक्ट क्यों है इतना अहम?
APC और APUWJ ने कहा कि यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा है। इसका सीधा संबंध विकास, पर्यावरण, विस्थापन, आदिवासी अधिकारों, राष्ट्रीय हित और सियांग नदी के किनारे रहने वाले समुदायों के भविष्य से है। ऐसे में परियोजना को लेकर चल रही बहस के बीच पत्रकारिता सामग्री पर रोक नागरिकों को जरूरी जानकारी से दूर कर सकती है।

‘रोक लगाई है तो कानूनी आधार बताएं’
दोनों संगठनों ने कहा कि अगर किसी सरकारी अथॉरिटी ने अपर सियांग प्रोजेक्ट से जुड़ी खबरों या रिपोर्टों को ब्लॉक या प्रतिबंधित करने के लिए कदम उठाया है, तो उसकी कानूनी वजह, संबंधित प्राधिकरण और कार्रवाई के स्पष्ट आधार का तुरंत खुलासा किया जाना चाहिए।

क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को दिए गए निर्देश?
APC और APUWJ ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपर सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) से जुड़ी खबरों, वीडियो, पत्रकारों के अकाउंट या दूसरी पत्रकारिता सामग्री को प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए हैं। संगठनों ने दोहराया कि प्रोजेक्ट की रिपोर्टिंग के कारण प्रतिबंधित की गई वैध पत्रकारिता सामग्री को तत्काल बहाल किया जाना चाहिए।

प्रोजेक्ट के खिलाफ सियांग क्षेत्र में जारी है विरोध
अपर सियांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी सियांग क्षेत्र में प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) तैयार करने के लिए चल रहे काम और सर्वे को तुरंत रोकने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित होने वाले इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों को भी वापस बुलाने की मांग की है।


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'विकास और रोजगार को मिलेगी रफ्तार'
वहीं, सरकार का कहना है कि 11,000 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना राज्य में आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगी। सरकार के मुताबिक इससे युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य के साथ-साथ देश की जल और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
 

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