अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम 2019: इस बार भाजपा की बन रही सरकार, बाकी पार्टियां पीछे
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- लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए हैं।
- ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए हैं।
- अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 60 सीट हैं।
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विस्तार
अरुणाचल प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। हालांकि 2014 के विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस सबसे अधिक सीट हासिल कर पार्टी बनाने में कामयाब हुई थी लेकिन 2016 में राजनीतिक उठापटक और नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाने के कारण यहां भाजपा की सरकार बन गई। ये सरकार एनपीपी के समर्थन से बनी थी।
इस बार भाजपा 9 सीट से आगे चल रही है। जबकि अन्य पार्टियां महज एक सीट पर आगे हैं।
2014 के आंकड़े-
| पार्टी का नाम | सीटों की संख्या-60 |
| कांग्रेस | 42 |
| भारतीय जनता पार्टी | 11 |
| पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल | 5 |
| अन्य | 2 |
अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 60 सीट हैं। यहां 2014 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 42 सीटें मिली थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 11 सीट, पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) को 5 और निर्दलीय उम्मीदवार को 2 सीट मिली थीं।
जिसके बाद यहां नबाम तुकी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। हालंकि काफी राजनीतिक उथल-पुथल, नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाने के कारण साल 2016 में यहां पीपीए ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई। राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू हैं।
पेमा खांडू राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के बेटे हैं। जो कांग्रेस पार्टी से थे। दोराजी का 30 अप्रैल, 2011 को एक हवाई हादसे में निधन हो गया था। पेमा खांडू ने इसके बाद निर्विरोध अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र मुक्तो से चुनाव जीता। उस वक्त वो भी कांग्रेस के उम्मीदवार थे। हालांकि 2016 में वह भाजपा में शामिल हो गए।
इस बार चुनाव 60 पर नहीं बल्कि 57 सीटों पर हो रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा के तीन प्रत्याक्षी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं।
कौन सी हैं मुख्य पार्टियां?
मुख्य पार्टियों में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), कांग्रेस, भाजपा और पीपीए हैं। फिलहाल राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है। जिसे मुख्य विपक्षी पार्टी एनपीपी का भरपूर समर्थन प्राप्त है।