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बैंक-एटीएम की भीड़ पर बोले जेटली, आबादी बड़ी है तो लाइनें तो बड़ी ही होंगी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 02 Dec 2016 01:30 PM IST
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arun jaitley
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी पर बैंकों और एटीएम के बाहर लगी लंबी कतारों पर कहा है कि आबादी बड़ी है तो लाइनें तो लगेंगी ही। वित्त मंत्री ने कहा कि तमाम परेशानियों के बावजूद देशवासियों ने सरकार को सहयोग दिया है।
जेटली ने एचटी लीडरशिप समिट के दौरान बातचीत में विमुद्रीकरण या नोटबंदी के मुद्दे पर मोदी सरकार का पक्ष रखा।
जेटली ने कहा, "अगर आप इस देश के स्वभाव को देखें तो एक हिस्सा है जो आसानी से बदलाव को स्वीकार नहीं करता है। मुझे याद है कि हम एक वक्त इस बहस में काफी समय गंवाते थे कि भारत को रंगीन टीवी चाहिए या नहीं। 1996 में पार्टी की बैठक के लिए हमारी पार्टी ने सात मोबाईल फोन खरीदे तो मीडिया ने हमारे प्रस्तावों को रिपोर्ट नहीं किया। हां हमारा मजाक अवश्य उड़ाया गया। 15 साल पहले कोई भरोसा नहीं करता कि एक गरीब या दलित के हाथों में मोबाइल हो सकता है लेकिन आज यह एक सच्चाई है।"
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जेटली ने एचटी लीडरशिप समिट के दौरान बातचीत में विमुद्रीकरण या नोटबंदी के मुद्दे पर मोदी सरकार का पक्ष रखा।
जेटली ने कहा, "अगर आप इस देश के स्वभाव को देखें तो एक हिस्सा है जो आसानी से बदलाव को स्वीकार नहीं करता है। मुझे याद है कि हम एक वक्त इस बहस में काफी समय गंवाते थे कि भारत को रंगीन टीवी चाहिए या नहीं। 1996 में पार्टी की बैठक के लिए हमारी पार्टी ने सात मोबाईल फोन खरीदे तो मीडिया ने हमारे प्रस्तावों को रिपोर्ट नहीं किया। हां हमारा मजाक अवश्य उड़ाया गया। 15 साल पहले कोई भरोसा नहीं करता कि एक गरीब या दलित के हाथों में मोबाइल हो सकता है लेकिन आज यह एक सच्चाई है।"
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जेटली ने नोटबंदी और क्या-क्या कहा:
वित्त मंत्री अरुण जेटली
- फोटो : Getty
पिछले सात दशक में काफी काला धन इकट्ठा हुआ है। 30 दिसंबर के बाद नोटबंदी से जुड़ी परिस्थितियों का आंकलन किया जाएगा। नोटबंदी बड़ी प्रक्रिया है। इसमें गोपनीयता बनाए रखने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना था कि जरूरी जानकारी समय पर सभी को मिलती रहे।
हम देश को डिजिटल करेंसी की दिशा में ले जा रहे हैं। इससे औपचारिक कारोबार, व्यापार का दायरा बढ़ेगा, लेकिन कागजी मुद्रा कम हो जाएगी। देश में राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता आएगी। तकनीक को रोका नहीं जा सकता, अर्थव्यवस्था का डिजिटाइजेशन होकर रहेगा।
हम देश को डिजिटल करेंसी की दिशा में ले जा रहे हैं। इससे औपचारिक कारोबार, व्यापार का दायरा बढ़ेगा, लेकिन कागजी मुद्रा कम हो जाएगी। देश में राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता आएगी। तकनीक को रोका नहीं जा सकता, अर्थव्यवस्था का डिजिटाइजेशन होकर रहेगा।