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राहुल गांधी को पूछना चाहिये कि सोहराबुद्दीन मामले में जांच का किसने सत्यानाश किया : जेटली

Mon, 31 Dec 2018 01:23 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अजय सिंह Updated Mon, 31 Dec 2018 01:23 PM IST
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Arun Jaitley slams Rahul Gandhi over Sohrabuddin case related question
अरुण जेटली

सोहराबुद्दीन मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उनपर निशाना साधा है। जेटली ने मामले में विशेष सीबीआई अदालत की टिप्पणी का सहारा लेते हुए फेसबुक पर एक ब्लॉग लिखा। उन्होंने कहा कि मुंबई के विशेष सीबीआई जज ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। 


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जज ने कहा कि बरी करने से ज्यादा प्रासंगिक जज की टिप्पणी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि शुरु से ही जांच एजेंसी ने सच सामने लाने के लिए पेशेवर तरीके से जांच नहीं की बल्कि कुछ राजनीतिक लोगों की तरफ इसे मोड़ दिया।

बता दें सोहराबुद्दीन मामले में फैसला आने के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था, "सोहराबुद्दीन को किसी ने नहीं मारा।" जेटली ने इसपर कहा कि अधिक अच्छा  तब होता जब वह सही सवाल उठाते कि किसने सोहराबुद्दीन केस की जांच को प्रभावित किया। उन्हें सही जवाब मिल गया होता। 
 

जेटली ने ब्लॉग में लिखा है कि 27 सितंबर, 2013 को राज्यसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को एक खत लिखा था, जिसमें उन्होंने सोहराबुद्दीन, तुलसी प्रजापति, इशरत जहां, राजेंद्र राठौड़ और हरेन पांड्या मामलों में जांच के राजनीतिकरण का जिक्र किया था।



इसके साथ ही उन्होंने एक कॉपी भी शेयर की है। उन्होंने ब्लॉग में लिखा है कि 'हर वो शब्द जो मैंने खत में लिखा था पांच साल बाद सच साबित हुआ। यह इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस ने हमारी जांच एजेंसियों के साथ क्या किया।' उन्होंने कहा कि जो लोग आज संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं उन्हें आत्म निरीक्षण की आवश्यकता है कि जब वह सत्ता में थे, तब उन्होंने सीबीआई के साथ क्या किया।

बता दें सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी को मारने के बाद गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि उनके संबंध आतंकवादियों से थे। इस फर्जी मुठभेड़ की जांच कर रही सीबीआई पर विशेष सीबीआई अदालत ने टिप्पणी की थी। जिसमें उसने कहा कि मुठभेड़ की जांच पहले से सोचे समझे गए सिद्धांत के साथ कई राजनीतिक नेताओं को फंसाने के इरादे से की गई थी। इस मामले में 21 दिसंबर को सभी 22 आरोपियों को बरी करते हुए विशेष सीबीआई न्यायाधीश एसजे शर्मा ने 21 दिसंबर को 350 पन्नों वाले फैसले में यह टिप्पणी दी थी।

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