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वित्त मंत्री जेटली ने ब्लॉग के जरिए बताया- मोदी सरकार ने पांच साल में लिए कई गेम चेंजिंग फैसले
Tue, 19 Mar 2019 06:03 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 19 Mar 2019 06:03 AM IST
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अरुण जेटली
- फोटो : Facebook
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कई अहम फैसले (गेम चेंजिंग) किए। सरकार ने बेहद जरूरी दूसरी पीढ़ी के सुधारों को व्यवस्थित और सतत ढंग से लागू किया।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने टैक्स सुधार, काले धन पर अंकुश लगाने के उपाय, नोटबंदी, मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने, संघवाद को बढ़ावा देने, आयुष्मान भारत योजना बनाने, सामाजिक क्षेत्र में निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास संबंधी निर्णयों को देश की सूरत बदलने के लिए जिम्मेदार बताया। जेटली ने कहा, ‘पांच साल की अवधि एक राष्ट्र में जीवन की लंबी अवधि नहीं है।
हालांकि, यह प्रगति के लिए अपनी दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। भारतीय इतिहास में 1991 एक महत्वपूर्ण अवसर था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समय वित्तीय संकट था। आर्थिक स्थिति ने उन्हें सुधारों के लिए मजबूर किया। राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने आंशिक रूप से प्रत्यक्ष करों को तर्कसंगत बनाया और पहली एनडीए सरकार ने बुनियादी ढांचे के निर्माण और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लिए।’
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नारों में फंसकर रह गई यूपीए सरकार
जेटली ने कहा, ‘यूपीए सरकार 2004-2014 के बीच आर्थिक विस्तार के बजाय नारों में फंस के रह गई। मोदी सरकार तब चुनी गई जब भारत पहले से ही पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों का हिस्सा था और दुनिया भविष्यवाणी कर रही थी कि ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) से भारत का ‘आई’ हट जाएगा।
सरकार के पास कोई विकल्प नहीं था और इसे सुधारना ही पड़ा। उस समय ‘सुधारों या मिट जाओ’ की चुनौती भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने थी। इसलिए, सरकार ने पांच साल की अवधि में व्यवस्थित रूप से और लगातार कई सुधार किए हैं, जो कि भारत के आर्थिक इतिहास में सुधारों की दूसरी पीढ़ी के रूप में जाने जाएंगे जिनकी अधिक जरूरत है।’
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वरिष्ठ भाजपा नेता ने टैक्स सुधार, काले धन पर अंकुश लगाने के उपाय, नोटबंदी, मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने, संघवाद को बढ़ावा देने, आयुष्मान भारत योजना बनाने, सामाजिक क्षेत्र में निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास संबंधी निर्णयों को देश की सूरत बदलने के लिए जिम्मेदार बताया। जेटली ने कहा, ‘पांच साल की अवधि एक राष्ट्र में जीवन की लंबी अवधि नहीं है।
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हालांकि, यह प्रगति के लिए अपनी दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। भारतीय इतिहास में 1991 एक महत्वपूर्ण अवसर था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समय वित्तीय संकट था। आर्थिक स्थिति ने उन्हें सुधारों के लिए मजबूर किया। राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने आंशिक रूप से प्रत्यक्ष करों को तर्कसंगत बनाया और पहली एनडीए सरकार ने बुनियादी ढांचे के निर्माण और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लिए।’
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नारों में फंसकर रह गई यूपीए सरकार
जेटली ने कहा, ‘यूपीए सरकार 2004-2014 के बीच आर्थिक विस्तार के बजाय नारों में फंस के रह गई। मोदी सरकार तब चुनी गई जब भारत पहले से ही पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों का हिस्सा था और दुनिया भविष्यवाणी कर रही थी कि ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) से भारत का ‘आई’ हट जाएगा।
सरकार के पास कोई विकल्प नहीं था और इसे सुधारना ही पड़ा। उस समय ‘सुधारों या मिट जाओ’ की चुनौती भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने थी। इसलिए, सरकार ने पांच साल की अवधि में व्यवस्थित रूप से और लगातार कई सुधार किए हैं, जो कि भारत के आर्थिक इतिहास में सुधारों की दूसरी पीढ़ी के रूप में जाने जाएंगे जिनकी अधिक जरूरत है।’