{"_id":"572a809e4f1c1b02395cd0c2","slug":"arrest-of-the-accused-vyapam-railways-banks-were-target","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यापम आरोपी की गिरफ्तारी से खुलासा, रेलवे-बैंक एग्जाम थे निशाने पर","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
व्यापम आरोपी की गिरफ्तारी से खुलासा, रेलवे-बैंक एग्जाम थे निशाने पर
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 05 May 2016 04:37 AM IST
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व्यापम घोटाले में मंगलवार को पकड़े गए रमेश शिवहरे ने रेलवे भर्ती बोर्ड एग्जाम, बैंक और बीडीओ एग्जाम में भी सेटिंग करनी शुरू कर दी थी। उसने कई अभ्यर्थियों से दस-दस लाख रुपये वसूल भी लिए थे।
इसका खुलासा सीबीआई और एसटीएफ की पूछताछ में हुआ है। टीम को रमेश के पास से 94 हजार रुपये नगद, चार मोबाइल फोन, कई बैंकों की पास बुक व चेक बुक और कई एग्जाम से संबंधित अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले हैं।
एसटीएफ का कहना है कि 2005 में एचबीटीआई से लेदर टेक्नोलॉजी में बीटेक करने के बाद रमेश ने काकादेव में पैराडाइज कोचिंग के नाम से सेंटर शुरू किया था। उसी समय उसकी मुलाकात जबलपुर के संतोष गुप्ता से हुई और उसने व्यापम में सेंध लगा दी।
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रमेश ने स्वीकार किया कि उसने सॉल्वर और अभ्यर्थी की जगह दूसरे को बैठाकर एग्जाम पास कराए हैं। एसटीएफ के एडिशनल एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि पत्नी अंशू शिवहरे के जिला पंचायत अध्यक्ष होने के कारण सभी रमेश को अध्यक्ष जी नाम से बुलाते थे।
रमेश के आगरा, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई जिलों के गैंगों से संपर्क हैं। उसने कानपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा आदि जगहों पर अपने नेटवर्क बना लिए थे।
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इसका खुलासा सीबीआई और एसटीएफ की पूछताछ में हुआ है। टीम को रमेश के पास से 94 हजार रुपये नगद, चार मोबाइल फोन, कई बैंकों की पास बुक व चेक बुक और कई एग्जाम से संबंधित अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले हैं।
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एसटीएफ का कहना है कि 2005 में एचबीटीआई से लेदर टेक्नोलॉजी में बीटेक करने के बाद रमेश ने काकादेव में पैराडाइज कोचिंग के नाम से सेंटर शुरू किया था। उसी समय उसकी मुलाकात जबलपुर के संतोष गुप्ता से हुई और उसने व्यापम में सेंध लगा दी।
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रमेश ने स्वीकार किया कि उसने सॉल्वर और अभ्यर्थी की जगह दूसरे को बैठाकर एग्जाम पास कराए हैं। एसटीएफ के एडिशनल एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि पत्नी अंशू शिवहरे के जिला पंचायत अध्यक्ष होने के कारण सभी रमेश को अध्यक्ष जी नाम से बुलाते थे।
रमेश के आगरा, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई जिलों के गैंगों से संपर्क हैं। उसने कानपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा आदि जगहों पर अपने नेटवर्क बना लिए थे।