#UriAttacks: पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित कराने के लिए 'कूटनीतिक युद्ध' छेड़ेगा भारत
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जम्मू-कश्मीर के उड़ी स्थित सैन्य मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले से नाराज मोदी सरकार ने जवाबी कार्रवाई का खाका तैयार कर लिया है। आतंकी हमले के बाद सेना ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। टीवी रिपोर्टस के मुताबिक उड़ी हमले को लेकर पीएम मोदी के आवास पर सोमवार को एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। जिसमें सरकार ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने और आतंकी घटनाओं को लेकर कड़ी कार्रवाई करने की रणनीति बनाई है। सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित कराने के लिए वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज करेगी। वहीं हमले को लेकर सेना और इंटेलीजेंस के इनपुट के आधार पर सेना को कई अहम सूबत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से हो रही घुसपैठ रोकने के लिए सेना एक बड़ा ऑपरेशन प्लान कर रही है।
इस बैठक में पीएम मोदी समेत गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, वित्त मंत्री अरूण जेटली और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल व सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग मौजूद रहे।
इस पूरे मामले पर उच्च स्तरीय बैठकों का दौर भी जारी है। इससे पहले करीब 10 बजे से गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी संबंधित शीर्ष अधिकारियों के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस बैठक की रिपोर्ट भी पीएम मोदी को दी गई है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में जवाबी कार्रवाई में गंभीर मंथन हुआ। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और रॉ के मुखिया ने पाक अधिकृत कश्मीर में एलओसी के समीप बने आतंकियों के प्रशिक्षण शिविर, आतंकियों के घुसपैठ कराने के मुख्य ठिकानों और हथियारों के जमावड़े की विस्तार से जानकारी दी।फिलहाल जम्मू-कश्मीर के अंदर और बाहर दो स्तरीय जवाबी कार्रवाई की रणनीति बनी है।
पाकिस्तान को सबक सिखाने की तैयारी?
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पर बड़ी संख्या में सेना की तैनाती से पाकिस्तानी सेना को नुकसान पहुंचाने की रणनीति है। पाकिस्तानी सेना लगातार जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराती रही है और उन्हें मदद करती है। आज होने वाले कई बैठकों में इस बात पर भी विचार किया जा सकता है कि क्या सेना को पाकिस्तान की सीमा के भीतर आतंकियों के ट्रेनिंग कैंपों पर हमले करने चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि सरकार की रणनीति है है कि एलओसी पर तैनात आर्मी बटालियनों और पश्चिमी फ्रंट पर एयर फोर्स के बेस को अलर्ट पर रखा जाएगा। अगर कोई आपात स्थिति पैदा होती है तो कड़ा जवाब दिया जा सके।