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सेना का प्रस्तावित ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ भर्ती मॉडल नौसेना और वायुसेना में भी अपनाया जा सकता है

Thu, 24 Dec 2020 05:43 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 24 Dec 2020 05:43 AM IST
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Army proposed Tour of Duty recruitment model o include the Indian Air Force and the Navy
सेना भर्ती (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

भारतीय सेना की तरफ से पहली बार ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ मॉडल प्रस्तावित किए जाने के कुछ महीने बाद ही भारत के रक्षा प्रतिष्ठान वायु सेना और नौसेना में भी भर्ती के लिए यही मॉडल अपनाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

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एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि ‘हम इस मॉडल का विस्तार कर तीनों सेवाओं को इसके दायरे में लाने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को इसी योजना या किसी समान योजना के ही तहत लाने पर भी विचार हो रहा है।’ साथ ही कहा कि विस्तृत ब्यौरा तैयार करने और आकलन का काम चल रहा है, इसे अगले साल के मध्य तक लागू किया जा सकता है।

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सूत्रों ने कहा कि आने वाले समय में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की क्षमता को देखते हुए भारत का राजनीतिक नेतृत्व इस योजना को लेकर खासा उत्सुक है, इसलिए इसकी रूपरेखा तैयार करने पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में योजना का इस तरह विस्तार करने का विचार है कि कुल सैन्य बल की 40 प्रतिशत भर्ती इसके माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सके।

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हालांकि, सैन्य सूत्रों ने बताया कि योजना लागू करने पर अभी कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है और विचार-विमर्श की प्रक्रिया ही चल रही है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने इस साल के शुरुआत में कहा था कि ये अवधारणा अभी आरंभिक चरण में है और इस पर अध्ययन की जरूरत है कि यह कितनी व्यावहारिक होगी। पहले बैच में 100 अधिकारियों और 1,000 अन्य रैंक के कर्मियों को शामिल किए जाने की संभावना है। इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर ही मॉडल का मूल्यांकन और परीक्षण किया जाएगा।

सेना ने मई में भर्ती के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ मॉडल का प्रस्ताव रखा था, जो युवाओं को तीन वर्ष के लिए स्वेच्छा से अस्थायी तौर पर सेना में शामिल होने का मौका देगा। इसका उद्देश्य सेना में भर्ती के लिए ज्यादा से ज्यादा युवाओं को आकर्षित करना, अधिकारियों की रिक्तियां भरना और अंतत: रक्षा पेंशन का बोझ घटाना है, जो ‘वन रैंक, वन पेंशन’ (ओआरओपी) योजना लागू होने के बाद बढ़कर रक्षा बजट का लगभग 30 प्रतिशत हो गया है।

अभी सशस्त्र बलों का हिस्सा बनने के लिए नियमित स्थायी कमीशन के अलावा एकमात्र विकल्प शॉर्ट सर्विस कमीशन है, जिसमें 14 साल की अवधि के लिए अधिकारियों की भर्ती होती है। बड़ी संख्या में एसएससी अधिकारी अंततः पात्रता के आधार पर स्थायी कमीशन का विकल्प चुनते हैं।

‘सेना में इसके जरिये करीब 40 फीसदी भर्ती की जा सकती है’
रक्षा पेंशन बिल घटाने के लिए सीडीएस रावत की अध्यक्षता वाले सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) ने प्रस्ताव दिया था कि 20-25 वर्षों की सेवा के साथ पीएमआर (समयपूर्व सेवानिवृत्ति) लेने वाले अब मौजूदा पेंशन के केवल 50 प्रतिशत के हकदार होंगे। अब तक, नियमानुसार अधिकारियों को आखिरी में उठाए गए अपने वेतन के 50 फीसदी के बराबर पेंशन मिलेगी जिसके लिए उन्हें 20 साल की सेवा पूरी करनी होगी।

टूर ऑफ ड्यूटी के मूल प्रस्ताव में कहा गया है कि योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले हर एक अधिकारी पर कुल 80-85 लाख रुपये की राशि खर्च होगी, जिसमें कमीशन पूर्व प्रशिक्षण, वेतन, भत्ते, ग्रेच्युटी, प्रस्तावित सेवेरेंस पैकेज, छुट्टियों के बदले भुगतान, और अन्य व्यय शामिल हैं। अभी एसएससी अधिकारी पर 5.12 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाती है, जो 10 साल बाद सेवानिवृत्त होता है, और 14 साल बाद सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी पर 6.83 करोड़ रुपये खर्च आता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इससे केवल 1,000 जवानों को तैयार करने पर ही 11,000 करोड़ की बचत हो सकती है और इस राशि को सेना के आधुनिकीकरण पर लगाया जा सकता है।

अधिकारी ने कहा, ‘सेना के लगभग 65,000 कर्मचारी हर साल सेवानिवृत्त होते हैं। इस पर विचार किया जा रहा है कि इस योजना के तहत कुछ निश्चित संख्या में कर्मियों की भर्ती की जाए और यह संख्या सशस्त्र बलों में एक तय प्रतिशत पर पहुंचने तक हर साल लगातार बढ़ाई जाती रहे। अधिकारी ने कहा कि इस तरह से बड़े पैमाने पर भर्ती में लगभग 15 वर्षों का समय लग सकता है।

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