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आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं सेना के आयुध भंडार

Wed, 01 Jun 2016 04:07 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र / अमर उजाला, नई दिल्ली
राघवेंद्र नारायण मिश्र / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 01 Jun 2016 04:07 AM IST
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Army Ordnance stores are prime targets for terrorist groups
महाराष्ट्र के पुलगांव में सेना के आयुध डिपो का अग्निकांड किसी साजिश का भी नतीजा हो सकता है। देश भर में सेना के आयुध भंडार आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं। पठानकोट में एयरबेस पर फिदायीन हमला सेना से साजो सामान को नष्ट करने का प्रयास था। इससे पहले जम्मू कश्मीर में सेना के हथियार डिपो पर फिदायीन हमले हो चुके हैं।
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अब रक्षा मंत्रालय की जांच रिपोर्ट ही पुलगांव डिपो में लगी आग के रहस्य से परदा उठा सकेगी लेकिन सेना से जुड़े सूत्र और रक्षा विशेषज्ञ इसे आतंकी साजिश से भी जोड़कर देख रहे हैं। पुलगांव का आयुध भंडार देश का सबसे बड़ा और एशिया का दूसरा बड़ा हथियार डिपो है।
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सेना के हथियारों का यहां भंडारण और बाद में कमांड में वितरण होता रहा है। यह भंडार सेना की बड़ी शक्ति रही है। यही कारण है इस डिपो में आग लगने की घटना को सैन्य शक्ति को नुकसान पहुंचाने की बड़ी साजिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में आतंकी संगठनों की पहली कोशिश सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने की होती है। पठानकोट हमले में जवानों ने शहादत देकर भी सैन्य साजो सामान को बचाने में सफलता पाई थी। गृह मंत्रालय को पहले से ही इस आशय के इनपुट हैं कि देश के सभी आयुध भंडार आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं।

जम्मू कश्मीर में पिछले दो साल में सेना के आयुध डिपो फिदायीन हमले झेलते रहे हैं। सांबा के सैन्य ठिकाने पर हुए फिदायीन हमले में भी निशाने पर हथियार डिपो ही था। उसके बाद कठुआ के पास फिदायीन हमले में हीरानगर पुलिस थाने के बाद आतंकियों ने आयुध डिपो वाले सैन्य ठिकाने पर ही हमला किया था।

उन दोनों हमले में सेना के जवानों और अफसरों ने शहादत देकर डिपो को नुकसान से बचा लिया था। जम्मू के पास नगरौटा के आयुध भंडार में विस्फोट में एक नागरिक की जान गई थी और सेना का एक जवान घायल हुआ था।

सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि आतंकी संगठन आयुध डिपो पर ऐसे और हमले कर सकते हैं। दरअसल आतंकी संगठनों को पाकिस्तान सेना से मदद मिलती हैष पाकिस्तानी सेना बार्डर के इलाकों और अन्य आयुध भंडारों को नुकसान पहुंचाकर भारतीय सैन्य शक्ति को जटका देना चाहती है।

इस साजिश में आतंकी संगठनों का इस्तेमाल होता है। आतंकी संगठन इसके लिए लंबे समय तक होमवर्क करते हैं। अबतक आयुध डिपो पर जितने भी फिदायीन हमले हुए हैं उनमें आतंकियों के पास आयुध डिपो का पूरा नक्शा मौजूद था।


सांबा और कठुआ के हमलों में देखा गया कि पाकिस्तान से जुडने वाले नालों के रास्ते आतंकी जम्मू कश्मीर की सीमा में घुसे और किसी वाहन को कब्जे में लेकर सीधे आयुध डिपो तक पहुंचने में कामयाब रहे। सेना सूत्रों का कहना है कि अब आयुध डिपो की सुरक्षा बढ़ाई गई है।
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