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व्यभिचार कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी सेना, बना रहेगा अपराध
Mon, 09 Sep 2019 01:08 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Mon, 09 Sep 2019 01:08 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Twitter
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2018 में उच्चतम न्यायालय ने व्यभिचार कानून को रद्द कर दिया था जिससे कि सेना खुश नहीं है। वह इस फैसले के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर सकती है। जिसमें मांग की जाएगी की सेना को इस फैसले से बाहर रखा जाए। यह जानकारी दो अधिकारियों ने दी। भारतीय सेना ने खासतौर से इस मामले को रक्षा मंत्रालय के सामने उठाया है। अधिकारी ने कहा, 'हम जल्द ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।'
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उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को खत्म कर दिया था। 27 सितंबर को उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने व्यभिचार के लिए दंड का प्रावधान करने वाली धारा को सर्वसम्मति से असंवैधानिक घोषित किया था। पीठ ने कहा था कि यह प्रावधान शादीशुदा महिला को पति की जागीर मानता है क्योंकि पत्नी का गैर मर्द के साथ संबंध उसके पति की इच्छा पर निर्भर है।
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धारा खत्म होने के बाद सेना अपनी रैंकों के बीच अनुशासन को लेकर चिंतित है। सेना में अपने साथी अधिकारी की पत्नी के साथ किसी तरह का संबंध बनाने को गंभीर अपराध माना जाता है। जिसे कायरता से भी नीचे समझा गया है। इस अपराध में मौत तक की सजा दी जा सकती है। अदालत के आदेश के बाद धारा 497 को खत्म कर दिया गया है और इसे अब अपराध नहीं माना जाता।
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तीनों सेनाओं में व्यभिचार को अपराध माना गया है और अभियोजन आमतौर पर आरोपी अधिकारी को सेना से बाहर निकलवा देता है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'धारा 497 को खत्म होने से कुछ मुश्किल परिस्थितियां पैदा हो गई हैं।' अधिकारी ने कहा, 'अधिकारी और जवान महीनों अपने परिवार से दूर रहते हैं और एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं। इस तरह के व्यवहार से बचने के लिए कुछ निवारक होने चाहिए।'
27 सितंबर को उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए उसे मनमाना और महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए निरस्त कर दिया था।
खत्म की गई धारा 497 के अनुसार यदि कोई पुरुष यह जानते हुए भी कि महिला किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी है और उस व्यक्ति की सहमति या मिलीभगत के बगैर ही महिला के साथ यौनाचार करता है तो वह पर स्त्रीगमन के अपराध का दोषी होगा। यह बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। इस अपराध के लिए पुरुष को पांच साल की कैद या जुर्माना अथवा दोनों की सजा का प्रावधान था।