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सेना को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए हो रहा शोध, किए जाएंगे बड़े बदलाव

Mon, 20 Aug 2018 12:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 Aug 2018 12:02 PM IST
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Army is gearing to make itself lean, mean, rapidly-deployable and operationally versatile force

12 लाख जवानों वाली भारतीय सेना साल 2019 की शुरुआत में एक बिलकुल नई शक्तिशाली सेना के रूप में सामने आ सकती है। सेना को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए सेना के अंदर एक शोध चल रहा है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर कई ऐसे फैसले लागू हो सकते हैं जिससे कि सेना के ढांचे को बदलकर फैट फ्री बनाया जाएगा।  यानी जिन कारणों की वजह से फैसले लेने में देरी होती है और श्रमशक्ति की बर्बादी होती है उनकी पहचान करके उन्हें बदला जाएगा। इलके बाद सेना के भविष्य की जरूरतों के हिसाब से प्लान तैयार किया जाएगा।  

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इस शोध पर अक्टूबर में चर्चा होगी। नवंबर के आखिर में इसे सेनाध्यक्ष बिपिन रावत के सामने और फिर रक्षा मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। सेना के इस प्लान में उठाए जानेवाले महत्वपूर्ण कदमों में पाकिस्तान और चीन से होकर गुजरती पश्चिमी और उत्तरी सीमा के लिए स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स ब्रिगेड तैयार करने को भी शामिल किया गया है। शोध में इस पहलू पर विचार किया जा रहा है कि कैसे मुख्यालय (हेडक्वार्टर) से मैनपावर को कम किया जाए।
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सेना के विस्तार के साथ ही मुख्यालय में तैनात अधिकारियों की संख्या बढ़ती रही है जिससे फ्रंटलाइन पर ट्रेंड और अनुभवी मैनपावर की उपलब्धता कम हुई है। उसी तरह ऑफिसर कैडर की कमी और फ्रंटलाइन पर इनकी ज्यादा जरूरत महसूस की जाती रही है। ताकि ज्यादा से ज्यादा अधिकारियों को फ्रंटलाइन यूनिट पर मौजूद कराया जा सके। सेना में अपनी सेवा देने के नियमों और शर्तों का भी रिव्यू किया जा रहा है।
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वर्तमान में आर्मी रेग्युलेशन-1987 के नियमों को माना जाता है। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय के 1998 के पत्र के हिसाब से पेंशन के लिए न्यूनतम सेवा सीमा तय होती है। शोध में इस पहलू पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि क्या सेवा के मापदण्डों को बदलने की जरुरत है। माना जा रहा है कि न्यूनतम सेवा सीमा बढ़ाई जा सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अभी तक के नियम और शर्त व्यवहारिक जरूरतों के हिसाब से हैं लेकिन इन्हें भविष्य की जरूरत के हिसाब से कैसे बदला जा सकता है, इसपर शोध हो रहा है।

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