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एलओसी: जनरल नरवणे ने कहा- पांच-छह सालों में पहली बार एलओसी पर रही शांति, मार्च में नहीं चली एक भी गोली

Fri, 26 Mar 2021 03:35 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 26 Mar 2021 03:35 AM IST
सार

  • सेनाध्यक्ष ने कहा, पाकिस्तान में अभी भी आतंकी ढांचा बरकरार।
  • उन्होंने कहा, जब तक पड़ोसी मुल्क आतंकवाद का पोषण और समर्थन करना बंद नहीं करता दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

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Army chief Naravane says LoC silent for the first time in 5-6 years
सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे - फोटो : ANI

विस्तार

थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने बृहस्पतिवार को कहा कि करीब पांच-छह सालों में पहली बार जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर शांति रही और मार्च में एक भी गोली नहीं चली। उन्होंने यह बात भारत और पाकिस्तान की सेनाओं द्वारा संघर्ष विराम का पूर्णत: पालन किए जाने संबंधी हालिया प्रतिबद्धता के संदर्भ में कही।

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हालांकि सेनाध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान में अभी भी आतंकियों के लॉन्च पैड समेत आतंकी ढांचा बरकरार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पड़ोसी मुल्क आतंकवाद का पोषण और समर्थन करना बंद नहीं करता तब तक दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं हो सकते हैं।
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एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वह आशावादी थे कि संघर्ष विराम का पालन होगा क्योंकि इसमें पाकिस्तानी सेना भी एक पक्ष थी। उन्हें यह जानकारी देते हुए काफी खुशी हो रही है कि मार्च के पूरे महीने में हमने एलओसी पर एक भी गोली नहीं चलाई, यह अजीब बात है। पिछले करीब पांच या छह सालों में यह पहली बार है जब एलओसी पर शांति रही। यह भविष्य के लिए अच्छा संकेत है।
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पिछले महीने भारत और पाकिस्तान की सेनाओं ने जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर 2003 के संघर्ष विराम करार का पालन करने को लेकर फिर से अपनी प्रतिबद्धता जताई थी। यह सहमति दोनों देशों के सैन्य ऑपरेशंस के महानिदेशकों के बीच बनी थी। जनरल नरवणे ने कहा कि हमारा मुख्य मुद्दा यह है कि वे आतंकवाद का समर्थन करना बंद करे। यह बंद किए बिना सामान्य संबंध संभव नहीं है। पाकिस्तान के अचानक संघर्ष विराम पर सहमत होने की वजह पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों द्वारा आपसी तनाव को आगे न बढ़ाना और इस्लामाबाद की खुद की आंतरिक समस्याएं इसका कारण हो सकती हैं।


एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि वह संघर्ष विराम का पालन होने को लेकर आशावादी थे। इस संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा की हालिया बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस करार के पालन के रजामंदी में इस बार पाकिस्तानी सेना भी शामिल थी और यदि पाकिस्तानी सेना शामिल नहीं होती तो इसके सकारात्मक परिणाम नहीं आते।

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