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'हर साल 1100 से ज्यादा बार बातचीत': भारत-चीन सीमा पर कैसे सुलझता है विवाद, सेनाध्यक्ष जनरल द्विवेदी ने बताया?

Mon, 29 Jun 2026 09:46 PM IST
Devesh Tripathi एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 29 Jun 2026 09:46 PM IST
सार

थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल स्थिर है, हालांकि संवेदनशीलता बनी हुई है और लगातार सतर्क रहना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य और कूटनीतिक संवाद से सीमा प्रबंधन बेहतर हुआ है तथा सैनिकों की वापसी संबंधी समझौतों से तनाव कम करने में मदद मिली है।

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Army chief Gen Upendra Dwivedi Over 1100 interactions annually to resolves issues along India-China border
सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि चीन के साथ लगी सीमा पर स्थिति फिलहाल स्थिर है, हालांकि यह अब भी संवेदनशील बनी हुई है और लगातार सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच हर साल जमीनी स्तर पर 1,100 से अधिक बातचीत होती है, जिससे गलतफहमियों को रोकने और सीमा से जुड़े नियमित मुद्दों का समाधान करने में मदद मिलती है।
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जनरल द्विवेदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए सैनिकों की वापसी (डिसएंगेजमेंट) संबंधी समझौतों से जमीनी स्थिति में काफी स्थिरता आई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति पहले की तुलना में अधिक संवेदनशीलता दिखा रहे हैं।
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भारत-चीन संबंधों पर क्या बोले सेना प्रमुख?
सेना प्रमुख ने कहा, "वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों में भी सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। इसका संकेत सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बढ़े संवाद और उनकी गुणवत्ता से मिलता है।" उन्होंने कहा कि संबंधों के सामान्य होने की दिशा में कई सकारात्मक संकेत मिले हैं। इनमें सीमा निर्धारण के लिए विशेषज्ञ समूह का गठन, सीमा प्रबंधन पर कार्य समूह की स्थापना, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानों की बहाली, तय दर्रों के जरिए सीमा व्यापार फिर शुरू करने पर सहमति तथा वीजा प्रक्रिया में कुछ सहूलियतें शामिल हैं।
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उन्होंने कहा, "सैन्य स्तर पर लगातार संवाद ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों के बीच हर साल जमीनी स्तर पर 1,100 से अधिक बातचीत होती है, ताकि सीमा प्रबंधन से जुड़े नियमित मुद्दों का समाधान किया जा सके और किसी भी तरह की गलतफहमी को रोका जा सके।"

सीमा पर कैसे सुलझाए जा रहे मुद्दे?
जनरल द्विवेदी ने कहा कि सीमा की मौजूदा स्थिति तय तंत्रों के जरिए संभाली जा रही है। उन्होंने कहा, "जब भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण स्थानीय स्तर पर कोई मुद्दा सामने आता है, तो उसका समाधान सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत, हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की बैठकों के जरिए किया जाता है। इन व्यवस्थाओं से सीमा पर स्थिरता बनाए रखने और गश्त समेत अन्य नियमित गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिली है।"

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की प्राथमिकताएं पूरी तरह स्पष्ट हैं। "पहली, एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना। दूसरी, स्थानीय स्तर के मुद्दों का समाधान बातचीत और स्थापित तंत्रों के माध्यम से करना। तीसरी, किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए मजबूत और भरोसेमंद सैन्य तैनाती बनाए रखना। इसके साथ ही हम उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे, रसद व्यवस्था, निगरानी क्षमता और समग्र परिचालन तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहे हैं।"


जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना जहां भी जरूरत होगी, वहां संवाद और बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हालांकि हमारा दृष्टिकोण 'शक्ति के जरिए शांति' का है। एलएसी पर भारतीय सेना की तैनाती आगे भी मजबूत, विश्वसनीय, सतर्क और भारत की क्षेत्रीय अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम बनी रहेगी।"
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