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Indian Army: CDS बोले- भू-राजनीतिक घटनाओं-प्रौद्योगिकियों से तेजी से बदल रहा माहौल, संगठनात्मक ढांचे की जरूरत

Sat, 18 Nov 2023 04:42 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 18 Nov 2023 04:42 PM IST
सार

Indian Army: सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को ऐसे माहौल में काम करना होगा जो भू-राजनीतिक घटनाओं और प्रौद्योगिकियों में प्रगति के कारण तेजी से बदल रहा है। 

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Armed forces must operate in environment rapidly reshaped by geopolitical events, tech advancements: CDS
सीडीएस ले.जनरल अनिल चौहान - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

भारतीय सशस्त्र बलों को ऐसे माहौल में काम करना होगा जो भू-राजनीतिक घटनाओं और प्रौद्योगिकियों में प्रगति के कारण तेजी से बदल रहा है। इसके लिए संगठनात्मक ढांचे के साथ-साथ मानसिकता में लचीलेपन की आवश्यकता होगी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को यह बात कही। 

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सिनर्जिया कॉनक्लेव 2023 में 'ग्लोबल फ्यूचर सिक्योरिटी चैलेंजेज' पर मुख्य भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि आज जो रास्ता अपनाया गया है, वह तय करेगा कि भारत 2047 में कहां होगा। जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को ऐसे माहौल में काम करना होगा जो भू-राजनीतिक घटनाओं और प्रौद्योगिकियों में प्रगति के कारण तेजी से बदल रहा है। 
 

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उन्होंने कहा, इसके लिए हमारे संगठनात्मक ढांचे के साथ-साथ हमारी मानसिकता में लचीलेपन की आवश्यकता होगी। एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए चौहान ने कहा, हमें इस बदलाव के साथ आगे या बराबर रहने के लिए अन्य देशों के साथ सैन्य मामलों में एक संपूर्ण क्रांति शुरू करने में सक्षम होना चाहिए। 
 

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उन्होंने कहा, हमारा संगठनात्मक ढांचा मल्टी-डोमेन संचालन में सक्षम होना चाहिए... उन्हें संपर्क, गैर-संपर्क, गतिज, साथ ही गैर-गतिज विकल्पों के बीच सही संतुलिए के जरिए एकीकृत तीव्र प्रतिक्रिया के लिए संचरित किया जाना चाहिए। उन्हें उभरती और विनाशकारी तकनीक को पकड़ने और उसे इस्तेमाल करने के लिए अनुकूल होना चाहिए। 
 

जनरल चौहान ने कथित राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए युद्ध में प्रवेश करने के लिए राष्ट्रों के बीच बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर भी बात की। उन्होंने अफगानिस्तान, इराक और यूक्रेन जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए प्रमुख शक्तियों द्वारा शुरू किए गए संघर्षों से जुड़ी चुनौतियों की ओर इशारा किया। 
 

उन्होंने आगे कहा,  मेरी समझ में अमेरिका एक साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र, यूरोप और एशिया की प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर सकता है। इसलिए इसने अपना फोकस दूसरी जगह किया है, जिसे वे मध्य पूर्व और अफगानिस्तान में चल रहे आतंक के वैश्विक युद्ध के नाम से जानते हैं, उसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ओर ले जाया जा रहा है, जहां वे इसे ग्रे जोन संघर्ष कह रहे हैं। 

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