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Gujarat: राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- अपराधियों में सजा का खौफ और लोगों का न्याय में भरोसा अच्छे शासन की पहचान

Fri, 28 Feb 2025 05:15 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 28 Feb 2025 05:15 PM IST
सार

Gujarat: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि अपराधियों में पकड़े जाने और सजा मिलने का डर और आम लोगों में न्याय पाने का भरोसा, अच्छी शासन व्यवस्था की पहचान है। उन्होंने कहा कि 2024 में तीन नए आपराधिक कानूनों की शुरुआत भारतीय न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण क्षण था।

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Any justice system would be considered robust only if it is truly inclusive: President Murmu
राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : पीटीआई

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि अपराधियों में पकड़े जाने और सजा मिलने का डर और आम लोगों में न्याय पाने का भरोसा अच्छी शासन व्यवस्था की पहचान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी न्यायिक प्रणाली तभी मजबूत मानी जाएगी, जब वह वास्तव में समावेशी हो। उन्होंने कहा कि 2024 में तीन नए आपराधिक कानूनों की शुरुआत में भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था। 

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मुर्मू गांधीनगर में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के तीसरे दीक्षांत समारोह में बोल रही थीं। इस मौक पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे। राष्ट्रपति ने कहा, अपराध पर नियंत्रण, अपराधियों में पकड़े जाने और दंडित होने का डर व आम लोगों में न्याय पालने का भरोसा अच्छी शासन व्यवस्था की पहचान है। हमारे देश में न्याय आधारित सामाजिक व्यवस्था को सर्वोत्तम माना जाता है। 
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'आर्थिक कारणों से न्याय से वंचित न हो कोई भी व्यक्ति'
एनएफएसयू से स्नातक करने वाले छात्रों से आग्रह करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से न्याय से वंचित न हो। उन्होंने कहा, परंपरा और विकास के तालमेल से हम एक विकसित देश बनने की प्रक्रिया में हैं, जो न्याय पर आधारित है। कोई भी न्यायिक प्रणाली तभी मजबूत मानी जाएगी, जब वह समावेशी हो। समाज के सभी वर्गों, खासतौर पर कमजोर वंचितों को न्याय दिलाना विश्वविद्यालय के स्नातकों का लक्ष्य होना चाहिए। 

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Any justice system would be considered robust only if it is truly inclusive: President Murmu
राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  - फोटो : पीटीआई

'तीन नए आपराधिक कानून न्यायिक प्रणाली में अहम क्षण'
उन्होंने कहा, आपको (स्नातक करने वाले छात्र) इस तरह से काम करना चाहिए कि देश का अंतिम व्यक्ति भी न्याय तक पहुंच सके। यह सुनश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से न्याय से वंचित न हो। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहित, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ब्रिटिश युग के कानूनों की जगह ली है। यह देश की न्यायिक प्रणाली में एक अहम क्षण था, जब पुराने आपराधिक कानूनों को तीन नए कानूनों से बदल दिया गया, जो एक जुलाई 2024 से लागू हुए। राष्ट्रपति ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में अपराध और साक्ष्य से जुड़े बदलाव किए गए हैं। 

फोरेंसिक विशेषज्ञों की बढ़ेगी मांग
राष्ट्रपति ने आगे कहा, जिन मामलों में सजा की अवधि सात साल या उससे अधिक है, उनमें अब एक फोरेंसिक विशेषज्ञ के लिए अपराध स्थल का दौरा करने और जांच करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने सभी राज्यों में समयबद्ध तरीके से फोरेंसिक सुविधाओं के विकास का प्रावधान किया है। कई कानूनों में समयबद्ध फोरेंसिक जांच को अनिवार्य किया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इन बदलावों से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी।


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