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भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए कोई भी समझौता मंजूर: दिग्विजय सिंह
ब्यूरो / नई दिल्ली
Updated Mon, 20 Feb 2017 12:55 PM IST
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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता से बाहर रखने के लिए हर संभव कोशिश में लगी हुई है। यह बात कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अपने इटंरव्यू में कही है। यही वजह कि बिहार के बाद बीजेपी को अब उत्तर प्रदेश की सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस कुछ भी करने को तैयार है। कांग्रेस ने सपा से हाथ मिला चुकी है साथ ही मायावती पर कोई सीधा हमला करने से बच रही है।
कांग्रेस महासचिव और सांसद दिग्विजय सिंह ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस इन प्रांतों में 1990 के बाद से सपा, जदयू, राजद और बसपा से समझौता करती रही है। अमर उजाला के राजीव जायसवाल और धीरज कनौजिया से एक खास बातचीत में सिंह ने कई अहम मुद्दों पर खुल कर चर्चा की।
कन्नौज की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले कांग्रेस ने सपा का विरोध किया और फिर उसके साथ हो गई। क्या इससे जनता में गलत संदेश नहीं जाएगा?
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यह बात सही है कि कांग्रेस ने यात्रा निकाली थी। राहुल गांधी ने किसानों का कर्जा माफ करने, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने और उन्हें आधी दर पर बिजली देने की बात की थी। इसके बाद सपा में अखिलेश यादव का नेतृत्व उभर कर आया तो उन्हें लगा कि सपा में एक नया परिवर्तन हो रहा है। इन परिस्थितियों में राहुल गांधी ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत सपा से गठबंधन किया।
कांग्रेस मायावती के खिलाफ क्यों नहीं बोल रही है?
हमारी लड़ाई विचारधारा की है। भाजपा की विचारधारा धर्म को आधार बनाकर बांटने की राजनीति करती है। मायावती को कोई सांप्रदायिक नहीं कह सकता। वह दलितों की आइकॉन हैं।
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कांग्रेस महासचिव और सांसद दिग्विजय सिंह ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस इन प्रांतों में 1990 के बाद से सपा, जदयू, राजद और बसपा से समझौता करती रही है। अमर उजाला के राजीव जायसवाल और धीरज कनौजिया से एक खास बातचीत में सिंह ने कई अहम मुद्दों पर खुल कर चर्चा की।
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कन्नौज की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले कांग्रेस ने सपा का विरोध किया और फिर उसके साथ हो गई। क्या इससे जनता में गलत संदेश नहीं जाएगा?
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यह बात सही है कि कांग्रेस ने यात्रा निकाली थी। राहुल गांधी ने किसानों का कर्जा माफ करने, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने और उन्हें आधी दर पर बिजली देने की बात की थी। इसके बाद सपा में अखिलेश यादव का नेतृत्व उभर कर आया तो उन्हें लगा कि सपा में एक नया परिवर्तन हो रहा है। इन परिस्थितियों में राहुल गांधी ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत सपा से गठबंधन किया।
कांग्रेस मायावती के खिलाफ क्यों नहीं बोल रही है?
हमारी लड़ाई विचारधारा की है। भाजपा की विचारधारा धर्म को आधार बनाकर बांटने की राजनीति करती है। मायावती को कोई सांप्रदायिक नहीं कह सकता। वह दलितों की आइकॉन हैं।
चुनाव के बाद मायावती से कोई गठबंधन हो सकता है?
इस विषय पर तो यूपी के कांग्रेस प्रभारी गुलाब नबी आजाद ही बताएंगे। कांग्रेस ने 1990 से लेकर आज तक भाजपा को यूपी और बिहार की सत्ता से बाहर रखने के लिए ही समझौते किए हैं। आज संघ का प्रचारक देश का पीएम बन चुका है जो पूरे देश के लिए खतरा है।
कांग्रेस पर भी तो तुष्टिकरण का आरोप लगता रहा है?
आप तुष्टिकरण को किस तरह परिभाषित करते है? कांग्रेस ने आजादी से पहले भी कट्टरपंथी मुस्लिम और कट्टरपंथी हिंदू विचारधारा का विरोध किया। मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा और संघ से इसी बात को लेकर कांग्रेस की लड़ाई थी।
महात्मा गांधी नहीं चाहते थे कि कांग्रेस पार्टी के तौर पर आगे भी चलती रहे। मगर नेहरू और बाकी नेताओं ने इसे जारी रखा। क्या अब भी कांग्रेस गांधी की विचारधारा पर चलती है?
कांग्रेस एक आंदोलन है। उस समय ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाले कांग्रेस के साथ जुड़े और वे सांप्रदायिक नहीं थे। भाजपा नेहरू और पटेल के बीच एक विवादास्पद रिश्तों को प्रचारित करती रही है। मगर पटेल और नेहरू के बीच की चिट्ठियां ही सबूत हैं कि दोनों के बीच में कोई टकराव नहीं था।
आरोप है कि कांग्रेस के समय में पीएमओ की जगह 10 जनपथ का राज चलता था?
एक भी उदाहरण बता दें कि कोई फाइल मनमोहन सिंह से सोनिया गांधी के पास गई हों। यहां तो प्रधानमंत्री मोदी सीधे सीधे हस्तक्षेप करते हैं। पीएम ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। अब पीएमओ की मंजूरी के बाद ही राजनाथ सिंह तक फाइल आती है। भले राजनाथ नंबर दो हों, मगर उनके पर कतर दिए गए हैं। भाजपा ही सत्ता का केंद्रीकरण करती है।
राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष कब बनाया जाएगा?
यह निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष को लेना है। लेकिन कांग्रेस में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो ऐसा नहीं चाहता हो।
इस विषय पर तो यूपी के कांग्रेस प्रभारी गुलाब नबी आजाद ही बताएंगे। कांग्रेस ने 1990 से लेकर आज तक भाजपा को यूपी और बिहार की सत्ता से बाहर रखने के लिए ही समझौते किए हैं। आज संघ का प्रचारक देश का पीएम बन चुका है जो पूरे देश के लिए खतरा है।
कांग्रेस पर भी तो तुष्टिकरण का आरोप लगता रहा है?
आप तुष्टिकरण को किस तरह परिभाषित करते है? कांग्रेस ने आजादी से पहले भी कट्टरपंथी मुस्लिम और कट्टरपंथी हिंदू विचारधारा का विरोध किया। मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा और संघ से इसी बात को लेकर कांग्रेस की लड़ाई थी।
महात्मा गांधी नहीं चाहते थे कि कांग्रेस पार्टी के तौर पर आगे भी चलती रहे। मगर नेहरू और बाकी नेताओं ने इसे जारी रखा। क्या अब भी कांग्रेस गांधी की विचारधारा पर चलती है?
कांग्रेस एक आंदोलन है। उस समय ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाले कांग्रेस के साथ जुड़े और वे सांप्रदायिक नहीं थे। भाजपा नेहरू और पटेल के बीच एक विवादास्पद रिश्तों को प्रचारित करती रही है। मगर पटेल और नेहरू के बीच की चिट्ठियां ही सबूत हैं कि दोनों के बीच में कोई टकराव नहीं था।
आरोप है कि कांग्रेस के समय में पीएमओ की जगह 10 जनपथ का राज चलता था?
एक भी उदाहरण बता दें कि कोई फाइल मनमोहन सिंह से सोनिया गांधी के पास गई हों। यहां तो प्रधानमंत्री मोदी सीधे सीधे हस्तक्षेप करते हैं। पीएम ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। अब पीएमओ की मंजूरी के बाद ही राजनाथ सिंह तक फाइल आती है। भले राजनाथ नंबर दो हों, मगर उनके पर कतर दिए गए हैं। भाजपा ही सत्ता का केंद्रीकरण करती है।
राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष कब बनाया जाएगा?
यह निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष को लेना है। लेकिन कांग्रेस में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो ऐसा नहीं चाहता हो।