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आतंकियों के हमदर्दों पर बिजली बनकर गिरेगा नया 'एंटी टेरर बिल', बचने का नो चांस
Fri, 02 Aug 2019 05:53 PM IST
आसिम खान
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Fri, 02 Aug 2019 05:53 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Shutterstock
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राज्यसभा द्वारा पारित किया गया एंटी टेरर बिल यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 अब आतंकियों के हमदर्द बने लोगों पर बिजली बनकर टूटेगा। आतंकियों को किसी भी तरह की मदद पहुंचाने वाले लोग जांच एजेंसियों के फंदे से बच नहीं सकेंगे। पूर्व आईपीएस अफसरों और सुरक्षा बलों के विभिन्न आतंकवादी ऑपरेशनों के एक्सपर्ट अधिकारियों ने नए 'एंटी टेरर बिल' को सही बताया है।
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इनका कहना है कि यह कानून अब उन लोगों को कानून के शिकंजे में ला देगा, जो आतंकियों की मदद करते हुए भी मौजूदा कानून के हल्के प्रावधानों का फायदा उठाकर बचते आ रहे थे। यह कानून लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों में अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल लोगों को सबक सिखाने के लिए पर्याप्त होगा। दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त आमोद कंठ का कहना है, बदलते वक्त और परिस्थितियों के मद्देनजर ऐसे बिल ठीक ही होते हैं।
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आतंकवादियों को कई जगह से तरह-तरह की मदद मिलती है, लेकिन ऐसे लोगों तक पुलिस या दूसरी जांच एजेंसियों नहीं पहुंच पाती हैं। कई बार देखने में आता है कि किसी जांच एजेंसी के पास यह पुख्ता सूचना होती है कि फलां व्यक्ति गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल है। इसके बावजूद उन पर हाथ डालना सम्भव नहीं होता। कानून के कमजोर प्रावधानों का फायदा उठाकर वे लोग बच निकलते हैं। जम्मू-कश्मीर या देश के दूसरे ऐसे हिस्से जहां आतंकियों या तोड़फोड़ की गतिविधियां होती हैं, वहां पुलिस की सामान्य पावर काम नहीं आती।
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पूर्व पुलिस आयुक्त बताते हैं, ऐसे कानून फोर्स की गंभीरता को बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। उन्हें इस बात का भरोसा होता है कि वे जो कुछ कर रहे हैं, उसकी अथॉरिटी उनके पास है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की समस्या बहुत जटिल होती जा रही है। वहां आतंकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एंटी टेरर बिल जैसे प्रावधानों के अलावा स्थानीय लोगों से भी बात करनी चाहिए।
आतंकवादियों की मदद करने वाले अब जाएंगे सलाखों के पीछे
जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व में सीआरपीएफ के कई ऑपरेशनों की कमान संभाल चुके पूर्व आईजी वीपीएस पंवार का कहना है, नए एंटी टेरर बिल से आतंकियों की कमर टूट जाएगी। एनआईए और ईडी की जांच में यह बात साबित हो चुकी है कि वहां पर अलगाववादी और दूसरे कई संगठन आतंकियों को धन व अन्य तरह की मदद पहुंचाते हैं। यहां तक कि पाकिस्तानी उच्चायोग भी इस मदद की प्रक्रिया में शामिल है। जांच एजेंसी ने पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा की पोल खोल कर रख दी है।
जम्मू-कश्मीर में इस संगठन को स्थानीय स्तर पर मदद मिल रही है, सभी जानते हैं। पाकिस्तान और दुबई से पैसा आ रहा है, अब यह किसी से छिपा नहीं है। किसी लालचवश कई विभागों के कर्मी भी आतंकियों के मददगारों की फेहरिस्त में शामिल हो जाते हैं। जांच एजेंसियों को इन मददगारों पर कार्रवाई करने में कई तरह की कानूनी पेचीदगियों का सामना करना पड़ रहा था। अब नए एंटी टेरर बिल की मदद से जांच एजेंसियां ऐसे लोगों को आतंकी घोषित कर उनके खिलाफ पूर्ण अधिकारों के साथ कार्रवाई कर सकेंगी।