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राज्यसभा में अटका भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक, विपक्षी दलों के साथ आई टीडीपी और एआईएडीएमके

Thu, 05 Apr 2018 06:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Thu, 05 Apr 2018 06:40 AM IST
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anti Corruption prevention amendment bill stuck in rajya sabha
Rajya Sabha and Lok Sabha

लोकसभा से पारित भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक-2013 विपक्षी दलों की रणनीति और एकजुटता के चलते फिलहाल राज्यसभा में अटक गया है। शोर-शराबे और वेल में हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश तो कर दिया लेकिन चर्चा और उसे पारित कराने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच करीब सवा तीन घंटों तक जद्दोजहद, घमासान मचा रहा जिस पर सदन बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा। 

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सदन में हंगामे और गतिरोध दूर करने के लिए उपसभापति को दस बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान उपसभापति पीजे. कुरियन ने अपने कक्ष में छह बार सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं को समझाने और गतिरोध दूर करने का प्रयास किया। समाधान खोजने लिए भी पांच बार सदन का समय बढ़ाना पड़ा। ध्वनिमत से विधेयक पारित न हो इसके लिए विपक्षी दलों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। विपक्ष की ओर से नए सदस्यों को अलग रखकर विधेयक पर मतविभाजन की भी मांग उठी।
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दोपहर बाद राज्यसभा में विधेयक पेश किया जाना था। इससे पहले विपक्ष की सभी 13 पार्टियों और अपनी-अपनी मांगों को लेकर लगातार वेल में उतरी रही टीडीपी और एआईएडीएमके भी सरकार के खिलाफ आ गई। विपक्ष ने तय किया सरकारी विधेयक तभी पारित होने देंगे जब सरकार एससी-एसटी, बैंकिंग घोटाले जैसे राष्ट्रीय मुद्दों के साथ टीडीपी और एआईडीएमके, आप आदि के मुद्दों पर चर्चा कराए। विपक्ष का कहना था कि सरकार चाहे तो सदन का दो दिन आगे बढ़ाएं और बिल पास कराए। 
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सरकार रुचि एससी-एसटी पर चर्चा की नहीं: आजाद 
विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार की रुचि विधेयक पारित कराने में हैं एससी-एसटी में रुचि नहीं है। विपक्ष का काम है देश के लिए बनने वाले कानूनों को पारित कराना लेकिन हम देश लोगों के प्रतिनिधि हैं उनकी आवाज और मुद्दे उठाएंगे। विपक्ष अपने परिवार या अपने लिए कोई विरोध नहीं कर रहा है। आज कोई बिल पास नहीं होगा एससी-एसटी को लेकर देश की चौथाई आबादी प्रभावित है सरकार को पहले उस पर चर्चा करनी चाहिए। सत्तापक्ष की टोकाटोकी के बीच समूचा विपक्ष वेल में आ गया और सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाने लगा। जिसके चलते सदन स्थगित करना पड़ा। 

मैं बहुत नाराज हूं, राष्ट्रहित की बात है: कुरियन 
उपसभापति कुरियन ने कहा मैं बहुत नाराज हूं किसी को दोषी नहीं ठहरा रहा हूं। विधेयक में लोकसभा की सव््थाई समिति की सिफारिश भी शमिल है भ्रष्टाचार विरोधी विधेयक है। राष्ट्रहित की बात है सरकार विधेयक पर चर्चा का तैयार है। मेरा फैसला है कि विधेयक पर चर्चा करानी चाहिए। उपसभापति कई बार असहाय दिखे और हाथ जोड़कर खड़े होना पड़ा। लंबी जद्दोजहद और समझाने के बाद भी विधेयक पर चर्चा न होने और विपक्ष के वेल में हंगामे पर उन्होंने कहा कि बहुत दुख महसूस कर रहा हूं। सारे प्रयास असफल होने पर उन्होंने शाम 5.25 बजे सदन स्थगित कर दिया। 

सरकार के मंत्री जुटे विधेयक पारित कराने में 
राज्यसभा में जिस समय विधेयक पेश होना था उस समय तीन मंत्री ही सदन में मौजूद थे लेकिन हंगामा देखते ही एक दर्जन मंत्री पहुंच गए और उपसभापति के कक्ष से लेकर विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत कर गतिरोध दूर करने की कोशिश भी हुई। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार भी विधेयक को लेकर सदन में मौजूद रहे। मतविभाजन पर उन्होंने कहा कि शपथ ले चके नए सदस्यों को वोटिंग में शामिल होने की आजादी है। भ्रष्टाचार को लेकर राष्ट्र की एक भावना है इस पर चार वर्षों तक चर्चा होती रही है लिहाजा इसे पारित किया जाए। 

सरकार कतई भ्रष्टाचार बर्दास्त नहीं करेगी: जितेंद्र सिंह 
मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा मोदी सरकार भ्रष्टाचार खात्मे के संकल्प के साथ आई है। सरकार को भ्रष्टाचार कतई बर्दास्त नहीं है। सरकार की मुहिम पर रोक लगाने के लिए इस तरह की बात की जा रही है। ध्वनिमत से विधेयक को पारित कराने की अनुमति दी जानी चाहिए। कांग्रेस की हाल ही शपथ लेने वाले नए सदस्यों को मतविभाजन के लिए डिवीजन नंबर आंवटित न होने पर उन्हें मतदान से अलग रखने की सवाल पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोई भी नया सदस्य पुराने की तरह ही हस्ताक्षर कर सकता है। सरकार चर्चा के लिए तैयार है। 


सदन को बंधक बनाया जा रहा है: विजय गोयल 
संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने कहा विपक्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ इस विधेयक को पास नहीं होने देना चाहता है। सदन को बंधक बनाया जा रहा है। सदन में बहुमत चाहता है कि विधेयक पास होना चाहिए। विधेयक रिश्वत लेने और देने वालों के खिलाफ है। ये लोग 19 दिनों से सदन नहीं चलने दे रहे और खामोश थे। 
 

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