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एएनटीएफ: बेहतर इंटेलिजेंस-शेयरिंग और सहयोग से तोड़ेंगे ड्रग नेटवर्क, आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर की लेंगे मदद

Thu, 24 Sep 2026 09:44 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 24 Sep 2026 09:44 PM IST
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ANTF: Drug networks to be dismantled through improved intelligence-sharing and cooperation
एनसीबी - फोटो : ANI
देश में ड्रग नेटवर्क को तोड़ने के लिए बेहतर इंटेलिजेंस-शेयरिंग और अंतर-एजेंसी सहयोग पर गंभीरता से काम होगा। इसके लिए आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर की मदद ली जाएगी। नई दिल्ली में बुधवार को संपन्न हुई तीसरी राष्ट्रीय एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के प्रमुखों की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में यह बात सामने आई है। इसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने नशीले पदार्थों पर नियंत्रण के लिए 'विजन डॉक्यूमेंट (2026–29)' को लागू करने और 'नशा-मुक्त भारत' के विजन को आगे बढ़ाने के लिए ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई को और तेज करने का सामूहिक संकल्प दोहराया।
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 "संयुक्त संकल्प, साझा ज़िम्मेदारी" की थीम पर आयोजित इस दो-दिवसीय कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन 22 सितंबर को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया था। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एएनटीएफ प्रमुखों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों के हितधारक भी शामिल हुए।
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उद्घाटन भाषण में शाह ने ज़ोर दिया कि अब नशीले पदार्थों के ख़िलाफ़ निर्णायक कार्रवाई करने का समय आ गया है, क्योंकि ये देश और दुनिया के लिए सबसे गंभीर ख़तरा बन गए हैं। उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक भारत से ड्रग्स के कारोबार को जड़ से खत्म करने में सामूहिक रूप से सफल होने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने, आने वाली पीढ़ियों को बचाने और युवाओं को भारत के विकास से जोड़ने के लिए 'नशा-मुक्त भारत' ज़रूरी है। हालांकि दिसंबर 2029 तक नशीले पदार्थों पर नियंत्रण का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के सभी संबंधित पक्षों के पूरे समर्पण और ईमानदारी से किए गए प्रयासों और योगदान से इसे हासिल किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ऐसे नेक कामों में ईश्वर का भी साथ मिलता है।
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सम्मेलन में तीन तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इन सत्रों में अगले तीन वर्षों में 'विज़न डॉक्यूमेंट' में बताए गए लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संस्थागत तंत्र, मांग में कमी, रोकथाम और पुनर्वास, साथ ही ड्रग तस्करी के नेटवर्क और कार्टेल को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। चर्चा के दौरान, 'विज़न डॉक्यूमेंट' के चार रणनीतिक स्तंभों के तहत तय किए गए लक्ष्यों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें ज़िम्मेदारियां, समय-सीमा और निगरानी तंत्र भी शामिल थे। राज्य एएनटीएफ को मज़बूत करने, एनकॉर्ड और जेसीसी की बैठकों को परिणाम-उन्मुख बनाने, ज़ब्ती-केंद्रित कार्रवाई से हटकर नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन की ओर बढ़ने, वित्तीय प्रोफ़ाइलिंग, पीआईटीएनडीपीएस  एक्ट के प्रभावी इस्तेमाल और मुख्य सरगनाओं व संगठित तस्करी नेटवर्क के ख़िलाफ़ केंद्रित अभियोजन पर भी ज़ोर दिया गया।

एक सेशन नशीले पदार्थों की मांग कम करने, रोकथाम और पुनर्वास पर चर्चा के लिए रखा गया था। ये सभी नशीले पदार्थों पर नियंत्रण के लिए ज़रूरी हैं और इन्हें कानून लागू करने की कार्रवाई के साथ मिलकर काम करना चाहिए। इस सिलसिले में, संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने ड्रग-फ्री हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के लिए यूजीसी के “नशा मुक्त कैंपस फ्रेमवर्क”, शिक्षण संस्थानों के आस-पास 500 मीटर के ड्रग-फ्री ज़ोन बनाने, नशा मुक्त भारत अभियान के विस्तार और नशा-मुक्ति केंद्रों को मज़बूत करने व उनकी पहुंच बढ़ाने वाली केंद्रीय योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों के साथ तालमेल बेहतर करने और भगोड़ों को सफलतापूर्वक वापस लाने की रणनीति पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई में एनएआर-K9 की भूमिका, सिंथेटिक ड्रग्स के एडवांस्ड एनालिसिस और मैक प्लेटफॉर्म के असरदार इस्तेमाल जैसे विषयों को शामिल किया गया। एक खास सेशन में प्रीकर्सर, सिंथेटिक ड्रग्स और गुप्त प्रयोगशालाओं से जुड़ी नई चुनौतियों और उनसे व्यवस्थित तरीके से निपटने के उपायों पर भी चर्चा की गई। 

इस चर्चा में राज्यों का ध्यान केमिकल इंडस्ट्री के लिए 'वॉलंटरी कोड ऑफ़ कंडक्ट' की ओर भी खींचा गया, ताकि सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके और गुप्त लैब्स का पता लगाने के लिए 'रेड-फ्लैग इंडिकेटर्स' का इस्तेमाल किया जा सके। एक दिलचस्प सेशन में गैर-कानूनी खेती को नष्ट करने और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के अच्छे तरीकों पर बात हुई। कॉन्फ्रेंस में डार्कनेट और क्रिप्टो से जुड़े नारको-अपराधों के नए ट्रेंड्स और इस क्षेत्र में जांच के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

दो दिन की इस कॉन्फ्रेंस के दौरान, ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग राज्यों द्वारा अपनाए गए बेहतरीन तरीकों पर चर्चा हुई। इसमें टेक्नोलॉजी, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल और कम्युनिटी की भागीदारी का इस्तेमाल करते हुए नए और कई तरह के तरीकों को दिखाया गया।

डीजी एनसीबी  ने सभी एएनटीएफ प्रमुखों और दूसरे प्रतिभागियों से कहा कि वे अगले 3 वर्षों में ड्रग्स को कंट्रोल करने की चुनौती का सामना करने के लिए पूरी लगन और ईमानदारी से काम करें। उन्होंने राज्यों से यह भी कहा कि वे 'नारकोटिक्स कंट्रोल पर नेशनल विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)' के मुताबिक, अपनी खास चुनौतियों और ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ड्रग्स को कंट्रोल करने के लिए अपना 3 साल का रोडमैप तैयार करें। 


ड्रग तस्करी की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए अब सिर्फ़ ज़ब्ती पर ध्यान देने के बजाय नेटवर्क पर ध्यान देने वाले तरीके को अपनाने का समय आ गया है। उन्होंने अलग-अलग एनफोर्समेंट और इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच बेहतर इंटेलिजेंस-शेयरिंग, तालमेल और सहयोग के लिए नेटवर्क बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि ट्रांसनेशनल, अंतर-राज्यीय और राज्य के अंदर के नेटवर्क्स का पता लगाकर उन्हें तोड़ा और खत्म किया जा सके। रेलवे के ज़रिए ड्रग्स की तस्करी से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए, एनसीबी के डीजी ने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने पहले ही एक नारकोटिक्स सेल बना लिया है। साथ ही, उन्होंने एनसीबी और आरपीएफ के बीच एक प्रस्तावित समझौते के बारे में भी जानकारी दी, जिसका मकसद दोनों एजेंसियों के बीच क्षमता निर्माण, जानकारी के आदान-प्रदान और संयुक्त ऑपरेशन को संस्थागत रूप देना है। 

 
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