अनपरा डी को आठ साल बाद मिली पूर्ण उत्पादन की मंजिल
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हजार मेगावाट वाली अनपरा डी को आठ साल बाद जाकर पूर्ण क्षमता से बिजली उत्पादन की मंजिल मिली। इसी के साथ राख बांध पर पूर्ण रूप से निर्मित देश की पहली परियोजना ने सफलतापूर्वक पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन का कीर्तिमान भी रच दिया। अनपरा से लखनऊ तक जिम्मेदार खुश हैं।
2008 में निर्मित होनी शुरू हुई परियोजना से 2011 के अंत तक पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन शुरू हो जाना था। इस बात का राज्य उत्पादन निगम और भेल के बीच करार भी हुआ था लेकिन 2011 कौन कहे, परियोजना का स्ट्रक्चर खड़ा होने में ही 2015 आ गया।
हालांकि 31 मार्च 2015 को सीएम अखिलेश यादव ने परियोजना की पांच सौ मेगावाट वाली पहली इकाई का लोकार्पण कर छह माह के भीतर परियोजना की दोनों इकाइयों से एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का भरोसा दिया।
दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया
भेल के सीएमडी अतुल सोप्ती ने भी इसे दोहराया लेकिन कभी ब्वायलर तो कभी टरबाइन में आती दिक्कत ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया। जहां एमडी एपी मिश्रा ने अनपरा आकर कई बैठकें ली।
वहीं ऊर्जा सचिव संजय अग्रवाल और भेल के सीएमडी के बीच लखनऊ और दिल्ली में भी कई बैठकों का दौर चला। पूर्ण उत्पादन की कई तिथियां भी तय हुई लेकिन कोई भी तिथि परिणाम नहीं दे पाई और परियोजना कब पूर्ण क्षमता से उत्पादन पर आएगी, यह अभियंताओं पर छोड़ दिया गया।
सीजीएम त्रिभुवन तिवारी टीम ने सोशर की रात परियोजना का उत्पादन हजार मेगावाट से भी अधिक ले जाकर नई इबारत रच ही दी। इसी का परिणाम था कि जो अफसर अनपरा डी के मसले पर बात करने से भी कतराते थे, वह मंगलवार को इस उपलब्धि पर इतराते नजर आए।