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नया बेनामी संपत्ति कानून बनने के 1.5 साल बाद भी केंद्र नहीं बना पाया न्यायिक प्राधिकरण
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Mon, 04 Jun 2018 12:19 AM IST
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केंद्र सरकार नया बेनामी संपत्ति कानून बनाने के डेढ़ साल बाद भी इससे जुड़े मामलों को निपटाने के लिए न्यायिक प्राधिकरण का गठन नहीं कर पाई है। इससे करोड़ों रुपये मूल्य की 780 से अधिक संपत्तियों की कुर्की कार्रवाई की वैधता खतरे में पड़ सकती है। नोटबंदी के बाद बेनामी संपत्ति के खिलाफ सख्त कानून को काले धन के खिलाफ सरकार के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा था।
मोदी सरकार ने बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून, 1988 को संशोधित कर 1 नवंबर, 2016 से नया कानून लागू किया। संशोधित कानून की धारा-7 के तहत सात साल तक कठोर कारावास और संपत्ति के बाजार मूल्य का 25 फीसदी तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन से निपटने के लिए नोटबंदी की घोषणा की।
कुर्की की वैधता पर फैसला करेगा प्राधिकरण
नये बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून के तहत सकार को तीन सदस्यों के एक प्राधिकरण का गठन करना है। यह प्राधिकरण आयकर विभाग द्वारा इस कानून के तहत की जाने वाली कुर्की की वैधता का फैसला करेगा। हालांकि, डेढ़ साल में प्राधिकरण का गठन नहीं हो पाया है। अभी यह जिम्मेदारी मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के न्यायिक प्राधिकरण (पीएमएलए) के पास है।
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860 में 80 मामलों में ही हुआ फैसला
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक कर विभाग ने ऐसे 860 से ज्यादा मामले पीएमएलए को भेजे हैं। इनमें सिर्फ 80 पर ही फैसला हो पाया है। लंबित मामले कई बड़े लोगों, नेताओं और अफसरों से जुड़े हैं। वहीं, पीएमएलए ने केंद्र को दिए नोटिस में कहा है कि नए प्राधिकरण के गठन नहीं होने पर बेनामी संपत्ति मामलों को तय समय में नहीं निपटाया जा सकता।
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मोदी सरकार ने बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून, 1988 को संशोधित कर 1 नवंबर, 2016 से नया कानून लागू किया। संशोधित कानून की धारा-7 के तहत सात साल तक कठोर कारावास और संपत्ति के बाजार मूल्य का 25 फीसदी तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन से निपटने के लिए नोटबंदी की घोषणा की।
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कुर्की की वैधता पर फैसला करेगा प्राधिकरण
नये बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून के तहत सकार को तीन सदस्यों के एक प्राधिकरण का गठन करना है। यह प्राधिकरण आयकर विभाग द्वारा इस कानून के तहत की जाने वाली कुर्की की वैधता का फैसला करेगा। हालांकि, डेढ़ साल में प्राधिकरण का गठन नहीं हो पाया है। अभी यह जिम्मेदारी मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के न्यायिक प्राधिकरण (पीएमएलए) के पास है।
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860 में 80 मामलों में ही हुआ फैसला
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक कर विभाग ने ऐसे 860 से ज्यादा मामले पीएमएलए को भेजे हैं। इनमें सिर्फ 80 पर ही फैसला हो पाया है। लंबित मामले कई बड़े लोगों, नेताओं और अफसरों से जुड़े हैं। वहीं, पीएमएलए ने केंद्र को दिए नोटिस में कहा है कि नए प्राधिकरण के गठन नहीं होने पर बेनामी संपत्ति मामलों को तय समय में नहीं निपटाया जा सकता।