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आंध्र प्रदेश व तेलंगाना जल विवाद : कानूनी मुद्दे पर मध्यस्थता की वकालत करते हुए चीफ जस्टिस ने सुनवाई से किया इनकार
Tue, 03 Aug 2021 05:26 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 03 Aug 2021 05:26 AM IST
सार
- चीफ जस्टिस रमण ने दोनों राज्यों के वकीलों को अपनी सरकारों से निर्देश लेने के लिए कहा है और मामले पर बुधवार को विचार करने का निर्णय लिया।
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चीफ जस्टिस एनवी रमण
- फोटो : PTI
विस्तार
चीफ जस्टिस एनवी रमण ने सोमवार को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा नदी जल विवाद की मध्यस्थता की वकालत करते हुए कहा कि वह कानूनी मुद्दों पर मामले की सुनवाई नहीं कर सकते हैं लेकिन वह दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता कराने की व्यवस्था कर सकते हैं।
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कहा, वह दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता कराने की व्यवस्था कर सकते हैं
चीफ जस्टिस रमण ने दोनों राज्यों के वकीलों को अपनी सरकारों से निर्देश लेने के लिए कहा है और मामले पर बुधवार को विचार करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि वह दोनों राज्यों से हैं। उन्हें कानूनी मुद्दों को सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है लेकिन अगर दोनों राज्य मध्यस्थता के लिए सहमत होते हैं तो वह मदद कर सकते हैं।
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चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा तेलंगाना के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि तेलंगाना उन्हें पीने और सिंचाई के उद्देश्यों के लिए कृष्णा नदी के पानी के उनके वैध हिस्से से वंचित कर रहा है।
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याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि तेलंगाना सरकार को 2014 के अधिनियम के अनुसार अधिकार क्षेत्र को अधिसूचित करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही 28 जून, 2021 को तेलंगाना सरकार द्वारा पारित आदेश को निरस्त किया जाए। इसके अलावा आंध्र प्रदेश सरकार ने कई अन्य मांगें भी है।