Caste Census: आंध्र में पिछड़े वर्ग की जनगणना शुरू करेगी सरकार; मंत्री का दावा- 15 नवंबर से होगी शुरुआत
Caste Census: आंध्र प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री कृष्णा ने कहा कि सरकार जातिगत जनगणना के लिए स्वयंसेवी प्रणाली के साथ-साथ ग्राम सचिवालय प्रणाली को बड़े पैमाने पर लागू करेगी।
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आंध्र प्रदेश सरकार 15 नवंबर के आसपास पिछड़ा वर्ग की जाति जनगणना शुरू करेगी, जिसका उद्देश्य इस श्रेणी में आने वाले 139 समुदायों की बेहतर सेवा करना है। राज्य के मंत्री सी श्रीनिवास वेणुगोपाल कृष्णा ने बुधवार को यह बात कही।
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री कृष्णा ने कहा कि सरकार जातिगत जनगणना के लिए स्वयंसेवी प्रणाली के साथ-साथ ग्राम सचिवालय प्रणाली को बड़े पैमाने पर लागू करेगी।
कृष्णा ने सचिवाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, पंद्रह नवंबर से जातिगत जनगणना शुरू होगी। पिछड़ी जाति की जनगणना के लिए स्वयंसेवी प्रणाली के साथ-साथ ग्राम सचिवालय प्रणाली का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।
मंत्री के मुताबिक, राज्य में लगभग 139 पिछड़े वर्ग की जातियां हैं और इन समुदायों के लोग अपनी संख्या बल से अनजान हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछड़े वर्ग के समुदायों को भी विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रतिनिधित्व के स्तर का पता नहीं है और कहा कि जनगणना इन पहेलियों को हल करेगी।
कृष्णा ने कहा कि पिछड़े वर्ग के समुदायों के कई प्रतिनिधियों ने जाति जनगणना के लिए अभियान चलाया था और उन्होंने उनकी संख्या नहीं जानने पर निराशा भी जताई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने 11 अप्रैल को विधानसभा का एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसमें जनसंख्या जनगणना के साथ-साथ जाति जनगणना को लागू करने के लिए कहा गया था, लेकिन पता चला कि यह जल्द ही नहीं होगा।
राज्य सरकार ने पिछड़े वर्ग की जाति जनगणना के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है, जो राज्य में सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे अन्य मापदंडों के तहत पिछड़े वर्गों की क्षेत्र-वार, पेशे-वार और अन्य मापदंडों के तहत व्यापक रूप से गणना करेगा।
इसके अलावा, राज्य सरकार पिछड़े वर्ग समुदायों से सुझाव प्राप्त करने के लिए पता और ईमेल करने के लिए एक ऐप भी बनाएगी, जिसमें विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, राजमहेंद्रवरम, कुरनूल और तिरुपति में राउंड टेबल मीटिंग की व्यवस्था करना शामिल है, ताकि इनपुट के लिए पिछड़े वर्ग समुदायों के बुद्धिजीवियों के साथ विचार-विमर्श किया जा सके।