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मीडिया की आजादी के पक्षधर थे अनंत कुमार, निभाई थी ये बड़ी भूमिका
अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो,नई दिल्ली
Updated Tue, 13 Nov 2018 02:46 PM IST
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अनंत कुमार
- फोटो : SELF
जिस समय देश ही नहीं, पूरी दुनिया में मीडिया की स्वतंत्रता पर तेज बहस चल रही है, उसका एक बड़ा पैरोकार इस दुनिया से चला गया। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार उन गिने-चुने नेताओं में थे जो न सिर्फ मीडिया की स्वतंत्रता के पूर्ण पक्षधर थे, बल्कि उसकी मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहते थे। देश के शीर्ष पत्रकारों के लिए राजधानी के प्रमुख क्षेत्र लुटियन जोन में जब जमीन दिलवाने की बात सामने आई थी, तब उन्होंने आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभाई थी।
भाजपा प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने अमर उजाला से कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में अनंत कुमार शहरी विकास मंत्री हुआ करते थे। उस समय वे एक पत्रकार के रुप में काम कर रहे थे। तब मुख्य दिल्ली क्षेत्र में पत्रकारों के लिए कोई अच्छी जगह नहीं थी। संसद की कार्रवाई कवर करने के दौरान बैठने या बार-बार आने-जाने में असुविधा होती थी। जब इसके लिए पत्रकारों ने अनंत कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने इस मामले को तुरंत प्राथमिकता के साथ लिया और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के लिए लुटियन जोन में जमीन एलाट कर दिया।
उन्होंने कहा कि सिर्फ जमीन आवंटित करने के मामले में ही नहीं, किसी मामले पर भी जब हमें असमंजस होता था तो वे मामले को स्पष्ट करने के लिए सदैव उपलब्ध रहते थे। सुदेश वर्मा के मुताबिक दक्षिण भारतीय होने के बाद भी हिंदी बोलने में स्पष्ट होना हमारे लिए अतिरिक्त लाभ देता था। वे मामले को पूरी तरह स्पष्ट किया करते थे।
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भाजपा प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने अमर उजाला से कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में अनंत कुमार शहरी विकास मंत्री हुआ करते थे। उस समय वे एक पत्रकार के रुप में काम कर रहे थे। तब मुख्य दिल्ली क्षेत्र में पत्रकारों के लिए कोई अच्छी जगह नहीं थी। संसद की कार्रवाई कवर करने के दौरान बैठने या बार-बार आने-जाने में असुविधा होती थी। जब इसके लिए पत्रकारों ने अनंत कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने इस मामले को तुरंत प्राथमिकता के साथ लिया और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के लिए लुटियन जोन में जमीन एलाट कर दिया।
उन्होंने कहा कि सिर्फ जमीन आवंटित करने के मामले में ही नहीं, किसी मामले पर भी जब हमें असमंजस होता था तो वे मामले को स्पष्ट करने के लिए सदैव उपलब्ध रहते थे। सुदेश वर्मा के मुताबिक दक्षिण भारतीय होने के बाद भी हिंदी बोलने में स्पष्ट होना हमारे लिए अतिरिक्त लाभ देता था। वे मामले को पूरी तरह स्पष्ट किया करते थे।