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अनंत कुमार: 22 सालों में कभी नहीं हारे एक चुनाव, यह पांच बातें बनाती हैं खास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 12 Nov 2018 02:03 PM IST
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अनंत कुमार
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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार का सोमवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ महीनों से फेफड़े के कैंसर से जूझ रहे थे। उनकी मौत से भाजपा में शोक की लहर है। उनके सम्मान में देशभर में सोमवार को राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। गृह मंत्रालय ने इसकी घोषणा की। अमेरिका और ब्रिटेन में इलाज कराने के बाद वह हाल में ही बेंगलुरु लौटे थे। उनका बाद में यहां शंकरा अस्पताल में उपचार चल रहा था।
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संसदीय कार्य मंत्री के अलावा अनंत के पास रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय भी था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के एक दक्ष राजनेता बनने के बाद वह 1987 में भाजपा में शामिल हुए थे। उनका जन्म बंगलूरू के मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह 6 बार सांसद चुने गए थे। उन्होंने पहली बार 1996 में चुनाव लड़ा था और दक्षिण बंगलूरू की लोकसभा सीट से कांग्रेस के वीजी राव को हराया था। इसके बाद वह कभी एक चुनाव तक नहीं हारे।
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1998 में मध्यावधि चुनाव के बाद अनंत कुमार को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बनाया गया। उस समय वह केंद्र में मंत्री पद संभालने वाले युवा नेता थे। उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय सौंपा गया था। उनके बाद 1999 के चुनाव के बाद जेडीयू के नेता शरद यादव को इस मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। कर्नाटक में भाजपा की जीत के वह मुख्य सूत्रधार थे।
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इन चीजों के लिए किया जाएगा याद
पहले डिजिटल राजनेता: चुनाव प्रचार के लिए आज सोशल मीडिया को काफी अहम माना जाता है। मगर डिजिटल दुनिया की क्षमता को सबसे पहले अनंत कुमार ने 1998 में पहचाना था। उस समय वह पहले ऐसे भारतीय राजनेता थे जिसने अपनी निजी वेबसाइट लांच की थी।
जीएसटी: गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) बिल भाजपा और विपक्ष के बीच विवाद का मामला बन गया था। इस विधेयक को पास करवाने के लिए भाजपा के पास राज्यसभा में पूर्ण बहुमत नहीं था। संसदीय मंत्री होने के नाते अनंत कुमार ने पार्टी को विधेयक पास करवाने के लिए पर्याप्त संख्या का इंतजाम किया।
स्वास्थ्य क्षेत्र: रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा लिए गए दो फैसले दिल और घुटने से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को लाभान्वित करेंगे। कार्डिएक स्टेंट की कीमत को 85 प्रतिशत और घुटना प्रत्यारोपण की कीमत को लगभग 70 प्रतिशत तक घटा दिया गया है।
नीम कोटिड यूरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सार्वजनिक सभाओं में कई बार इसका जिक्र करते हुए सुने जा सकते हैं। अनंत कुमार के मंत्रालय ने यूरिया को 100 प्रतिशत नीम कोटिड करने का फैसला लिया था। सरकार ने दावा किया कि इस यूरिया से उसने धांधली को रोका और 10,000 करोड़ रुपये बचाए।
सुविधा कैंपेन: अनंत कुनार ने अपनी देखरेख में सुविधा कैंपेन लांच की थी। इसका लक्ष्य ढाई रुपये की कीमत में महिलाओं को बायो डिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन मुहैया करवाना था। यह कार्यक्रम इसी साल जून में लांच किया गया था।