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केंद्र ने कहा- ISI से हैं रोहिंग्याओं के रिश्ते, तस्लीमा बोलीं- इंसानियत के लिए यहां जगह नहीं

Mon, 18 Sep 2017 03:13 PM IST
टीम डिजिटल अमर उजाला
टीम डिजिटल अमर उजाला Updated Mon, 18 Sep 2017 03:13 PM IST
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an affidavit files by center in supreme court on rohingya muslim matter
- फोटो : SOCIAL MEDIA

रोहिंग्या मुसलमानों पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के जरिए अपना पक्ष रखा है। केंद्र ने कहा कि करीब 40 हजार रोहिंग्याओं ने भारत में घुसपैठ की है, जिन्हें संवैधानिक दर्जा नहीं दिया जा सकता। केंद्र ने ये भी कहा कि रोहिंग्या शर्रार्थियों का भारत में रहना गैर कानूनी है। केंद्र सरकार को आंशका है कि इनमें से कुछ लोग आतंकवादी संगठनों के संपर्क में भी हैं।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र ने सर्वोच्च अदालत में बताया कि कई रोहिंग्या मुसलमान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और आतंकवादियों के लिंक में हैं और ये देश के लिए एक बड़ा खतरा हो सकते हैं। केंद्र ने करीब 16 पन्नों का हलफनामा कोर्ट के सामने पेश किया है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 3 अक्तूबर की तारीख तय की है।
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वहीं केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ही निर्णय लेगा और फिलहाल कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।
 
वरिष्‍ठ लेखिका तसलीमा नसरीन ने रोहिंग्या मुसलमानों के बिगड़े हालातों पर नाराजगी जाहिर की है। तसलीमा ने वोट बैंक की राजनीति पर हमला बोलते हुए कहा कि इंसानियत के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन वोटों के लिए है।
 
केंद्र सरकार का यह बयान सुरक्षा एजेंसियों की उस चेतावनी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-म्यांमार बॉर्डर पर पेशेवर तस्करों की मदद से रोहिंग्या मुसलमान समुद्र के रास्ते देश में घुसपैठ कर सकते हैं।

पढ़ें: रोहिंग्याओं को देश में फैलने से रोकने के लिए बांग्लादेश बना रहा 14,000 नए शिविर


सुरक्षा एजेंसियों ने दी थी केंद्र को चेतावनी

an affidavit files by center in supreme court on rohingya muslim matter
rohingyan - फोटो : rohingyan
रोहिंग्या मुसलमान स्थानीय एजेंसियों द्वारा उत्पीड़न और स्थानीय बौद्ध आबादी के साथ उनके विवाद के बाद 2012 से म्यांमार भाग रहे हैं। भारत भी भारी मात्रा में हुए पलायन से प्रभावित हुआ है। 40 हजार रोहिंग्या असम, वेस्ट बंगाल, जम्मू, यूपी और दिल्ली के कैंप में रह रहे हैं। रोहिंग्या बंगाल जैसे क्षेत्रों में घुसपैठ करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। सीनियर इंटेलीजेंस अधिकारियों ने मीडिया को बताया पेशेवर तस्कर ज्यादातर समुद्र के रास्ते म्यांमार से बंग्लादेश आते हैं।

उन्होंने बताया कि संबंधित सभी सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के किसी भी प्रयास से बचाव के लिए तैयार हैं। अधिकारियों के मुताबिक पेशेवर तस्कर अपने पुराने अनुभव के आधार पर रोहिंग्या परिवारों को बड़ी नाव और हाई स्पीड राफ्ट्स की मदद से भगाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि इन रास्तों का प्रयोग इस्लामिक स्टेट के सपोटर्स के द्वारा भी किया जायेगा। 

पढ़ें: त्रिपुरा में रोहिंग्या शरणार्थियों की गिरफ्तारी, सीमा पर अलर्ट

एजेंसी म्यांमार के साउथर्न पार्ट पर भी नजर बनाए हुए हैं जहां रोहिंग्या अंडमान निकोबार द्वीप में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। बीएसएफ और असम राइफल्स ने भी रोहिंग्या की आबादी को बढ़ने से रोकने के लिए म्यांमार बॉर्डर पर गश्त बढ़ा दी है।

खूफिया सूत्रों के मुताबिक तस्कर और रोहिंग्या बंगाल जाने के लिए उत्सुक हैं क्योंकि बंगाल सरकार ने उनके प्रति सहानुभूति जताई है और पहले ही घोषणा कर चुकी है कि म्यांमार के शरणार्थियों को आश्रय मिलेगा। 
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