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खतरा: 440 जिलों के भूजल में बढ़ा नाइट्रेट; कैंसर-किडनी की खराबी, हड्डी और त्वचा से जुड़ीं बीमारियां बढ़ा रहा

Fri, 03 Jan 2025 04:53 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 03 Jan 2025 04:53 AM IST
सार

रिपोर्ट ने यह भी खुलासा किया कि पानी के  9.04 फीसदी नमूनों में फ्लोराइड का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक था, जबकि 3.55 फीसदी में आर्सेनिक प्रदूषण पाया गया। सीजीडब्ल्यूबी ने मई 2023 में भारत भर के 15,259 जगहों पर भूजल की गुणवत्ता की निगरानी की।

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amount of nitrate has increased in groundwater of 440 districts of country, big threat to health
भूजल में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत के 440 जिलों के भूजल में नाइट्रेट का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक पाया गया है। नाइट्रेट का उच्च स्तर गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट-2024 में इसका खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पानी में नाइट्रेट प्रदूषण मुख्य रूप से नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों और पशु अपशिष्ट के अनुचित निपटान के कारण होता है। यह प्रदूषण पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है।

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रिपोर्ट ने यह भी खुलासा किया कि पानी के  9.04 फीसदी नमूनों में फ्लोराइड का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक था, जबकि 3.55 फीसदी में आर्सेनिक प्रदूषण पाया गया। सीजीडब्ल्यूबी ने मई 2023 में भारत भर के 15,259 जगहों पर भूजल की गुणवत्ता की निगरानी की। इनमें पानी के सबसे अधिक दूषित होने के खतरे वाले 25 फीसदी कुओं का विस्तार से अध्ययन किया गया। यह कुएं भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की तय सीमा 10,500 के अनुसार सबसे अधिक खतरे वाले स्थानों के तौर पर देखे गए। मानसून से पहले और बाद में 4,982 जगहों पर पानी की गुणवत्ता की जांच की गई ताकि यह देखा जा सके कि बारिश पानी की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करती है।

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राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु सर्वाधिक प्रभावित
राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु में 40 फीसदी से अधिक पानी के नमूने सुरक्षित सीमा से अधिक पाए गए। महाराष्ट्र में पानी में नाइट्रेट के प्रदूषण की यह दर 35.74 फीसदी, तेलंगाना में 27.48 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 23.5 फीसदी और मध्य प्रदेश में 22.58 में भी उच्च स्तर तक दर्ज की गई।  इसके उलट उत्तर प्रदेश, केरल, झारखंड और बिहार में पानी में नाइट्रेट प्रदूषण के कम मामले पाए गए।

पूर्वोत्तर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड में सभी पानी के नमूने सुरक्षित सीमा के भीतर पाए गए। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में नाइट्रेट का स्तर 2015 से स्थिर बना हुआ है। हालांकि, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 2017 से 2023 नाइट्रेट स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है।

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शिशु के खून में घट जाती है हीमोग्लोबिन की मात्रा
पीने के पानी में उच्च नाइट्रेट स्तर नवजात शिशुओं में ब्लू बेबी सिंड्रोम की वजह बनता है। इससे शिशु के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है नाइट्रेट युक्त यह पानी पीने के लिए भी असुरक्षित होता है। भारत के 15 जिले, जैसे राजस्थान के बाड़मेर और जोधपुर, महाराष्ट्र के वर्धा, जलगांव, बुलढाणा, अमरावती, नांदेड़, बीड, जलगांव और यवतमाल, तेलंगाना में रंगारेड्डी, आदिलाबाद और सिद्दीपेट, तमिलनाडु में विल्लुपुरम, आंध्र प्रदेश में पालनाडु और पंजाब में बठिंडा सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। रिपोर्ट बताती हैं कि इन जिलों में  भूजल में उच्च नाइट्रेट स्तर अत्यधिक सिंचाई का नतीजा हो सकता है जो उर्वरकों से नाइट्रेट को मिट्टी में गहराई तक धकेल सकता है।

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