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Padma Shri Award: IVF से भैंस का बछड़ा पैदा कराने वाले डॉक्टर से लेकर कश्मीर के कराटे किड तक, जानें पद्मश्री से सम्मानित अनजान नामों को

Wed, 26 Jan 2022 09:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 26 Jan 2022 09:08 PM IST
सार

सरकार ने इस साल जिन लोगों को पद्मश्री देने का फैसला किया है, उनमें दिवंगत स्वतंत्र सेनानी से लेकर सांप-बिच्छू के काटने का इलाज करने वाले डॉक्टर भी शामिल हैं। 

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Among Padma Shri awardees are Kashmirs Karate Kid and doctor behind world's 1st IVF buffalo calf news and updates
पद्मश्री पुरस्कार। - फोटो : Social Media

विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से पद्म पुरस्कारों का एलान मंगलवार को ही कर दिया गया था। जहां पद्म विभूषण के लिए सरकार ने चार बड़े और लोकप्रिय नामों को चुना है, तो वहीं पद्म भूषण सम्मान के लिए भी सरकार ने अधिकतर चिर-परिचित नामों को जगह दी है। हालांकि, पद्मश्री सम्मान के लिए कई ऐसे नामों का चयन हुआ है, जिन्हें गुमनाम नायक की तरह समाज में अपना योगदान दिया है। 
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सरकार ने इस साल जिन लोगों को पद्मश्री देने का फैसला किया है, उनमें दिवंगत स्वतंत्र सेनानी से लेकर सांप-बिच्छू के काटने का इलाज करने वाले डॉक्टर भी शामिल हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में कराटे किड के नाम से लोकप्रिय एक स्पोर्ट्स कोच और दुनिया में आईवीएफ के जरिए भैंस का बछड़ा पैदा कराने वाले डॉक्टर का नाम भी इस साल सरकार की पद्मश्री सूची में शामिल है। 
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1. मोदी सरकार ने आंध्र प्रदेश के गोसावीडू शेख हसन को मरणोपरांत पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया है। वे एक स्वतंत्रता सेनानी के साथ जाने-माने नादस्वरम वादक भी रह चुके थे। सात दशकों तक हसन ने भगवान श्रीराम की प्रार्थना में यह वाद्य यंत्र बजाया। हसन ने अपना जीवन ऐतिहासिक भद्रचालम के श्री सीतारामचंद्र स्वामी मंदिर को समर्पित कर दिया।
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2. उत्तर प्रदेश के सेठ पाल सिंह को भी पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है। सेठ पाल को कृषि के क्षेत्र में योगदान के लिए पहचाना जाता है। उन्होंने सिंघाड़े की फसल को उगाने के लिए नियमित आवर्तन प्रक्रिया में महारत हासिल किया था। राज्य के एक बड़े क्षेत्र में उन्होंने किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ फल और सब्जियां उगाने के लिए भी प्रेरित किया है। 

3. महाराष्ट्र के महाड के रहने वाले हिम्मतराव बावस्कर क्षेत्र के लिए लोकप्रिय नाम हैं, जिन्हें बिच्छू और सांप के काटने का इलाज करने के लिए जाना जाता है। हिम्मतराव ने संसाधनों की कमी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बिच्छू-सांप के काटने से पीड़ित गरीबों का इलाज शुरू किया। अपने इसी सफर में उन्होंने पाया कि प्रैजोसिन (Prazosin) नाम की दवा इलाज में इस्तेमाल करने से बिच्छू-सांप के काटने का शिकार होने वालों की मौतों की दर 40 फीसदी से घटकर एक फीसदी तक आ जाती है। 

4. करनाल के 82 वर्षीय विशेषज्ञ मदान ने इनविट्रो फर्टिलिटी (आईवीएफ) तकनीक से दुनिया का पहला भैंस का बछड़ा तैयार करने वाली टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने करनाल में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक के तौर पर लंबे समय तक काम किया। उन्होंने प्रजनन एंडोक्राइनोलॉजी, भ्रूण जैव प्रौद्योगिकी, आईवीएफ और क्लोनिंग में अनुसंधान को बढ़ावा दिया।

5. मरणोपरांत सम्मानित किए गए उत्तर प्रदेश के राधेश्याम खेमका पेशे से प्रकाशक थे। उन्होंने धार्मिक पत्रिका कल्याण का वर्षों तक संपादन किया। वह गीता प्रेस से जुड़े थे, जिसने गीता, महाभारत और रामायण जैसी प्राचीन साहित्यिक कृतियों को लोगों तक पहुंचाया। 

6. जम्मू-कश्मीर के फैसल अली डार को कश्मीर के कराटे किड के तौर पर जाना जाता है। बांदिपोरा निवासी डार एक मार्शल आर्ट कोच हैं। उन्होंने एक खेल एकेडमी की स्थापना करके 4,000 छात्रों को कोचिंग दी है। उनका मकसद संवेदनशील, उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को अवसरों और सपनों के साथ सशक्त बनाना है। डार की उपलब्धियां किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उनके ट्रेन्ड किए छात्रों के पदकों से ही झलकती है।

7. कर्नाटक में शिवमोग्गा के एक प्रसिद्ध गामाका गायक एचआर केशवमूर्ति हैं, जिन्होंने 100 से अधिक शास्त्रीय रागों को गामाका गायन की अपनी शैली में पेश किया है।

8. गुजरात की गामित रमीलाबेन रायसिंहभाई तापी की आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने प्रयासों से नौ गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराया और 300 से अधिक सेनेटरी इकाइयां बनाईं।

9. मरणोपरांत सम्मानित झारखंड के गिरधारी राम घोंजू के नागपुरी साहित्यकार और शिक्षाविद हैं। रांची के घोंजू ने झारखंड की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के उत्थान के लिए काम किया और 25 से अधिक पुस्तकें तथा नाटक लिखे। विशेष रूप से स्थानीय विरासत और नागपुरी संस्कृति की पहचान को पांच दशकों से अधिक समय तक सहेज कर रखा।

10. ओडिशा के नरसिंह प्रसाद गुरु बलांगीर के एक कोशाली लेखक, गीतकार और कोशकार हैं, जिन्होंने दशकों तक कोशाली भाषा का समर्थन किया। उन्होंने कोशाली में 10 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं और आकाशवाणी द्वारा प्रसारित लगभग 500 गीतात्मक गायनों की रचना की है।

11. तमिलनाडु की आर मुथुकन्नमल विरालीमलाई की एक सदिर नर्तकी हैं। उन्होंने 70 से अधिक वर्षों में 1,000 से अधिक नृत्य और गायन शो में प्रदर्शन किया। 


12. मोहाली के एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह ने अपने जीवन के तीन दशक से अधिक समय पंजाब में 1,000 से अधिक कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित किया।

13. मध्य प्रदेश में बुंदेलखंड निवासी राम सहाय पांडे एक अनुभवी राई लोक कलाकार है। वह 60 वर्षों से मृदंगम की धुनों के साथ मेल करके इस नृत्य को लोकप्रिय बना दिया।
 
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