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Amnesty International ने भारत में काम रोका, सरकार पर दुर्भावना का लगाया आरोप
Tue, 29 Sep 2020 03:07 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 29 Sep 2020 03:07 PM IST
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Amnesty International office in Bangalore
- फोटो : PTI
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एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने भारत में अपना काम रोक दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा इस महीने की शुरुआत में उसके खातों को फ्रीज किए जाने के बाद उसे अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने पर मजबूर होना पड़ा है। संस्था का कहना है कि उसकी प्रतिकूल रिपोर्टों को लेकर सरकार उसके पीछे पड़ी हुई है।
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हालांकि, सरकार का कहना है कि अधिकारों के लेकर काम करने वाली इस वैश्विक संस्था को अवैध रूप से विदेशी धन मिलता रहा है और इसने कभी विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराया।
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एक प्रेस बयान में, एमनेस्टी ने कहा, "भारत सरकार द्वारा एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बैंक खातों की पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया, जिसकी जानकारी 10 सितंबर को मिली, संगठन द्वारा किए जा रहे सभी काम बिल्कुल बंद हो गए हैं।" संगठन ने कहा कि वे भारत में कर्मचारियों को निकालने और अपने सभी अभियान और अनुसंधान कार्यों को रोकने के लिए मजबूर हो गए हैं।
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एमनेस्टी ने दावा किया कि वह सभी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है। इसके साथ ही संगठन का कहना है कि भारत सरकार द्वारा निराधार और प्रेरित आरोपों पर मानवाधिकार संगठनों के पीछे पड़ने का यह बिल्कुल नया मामला है।
संस्था के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अविनाश कुमार ने कहा कि 'पिछले दो सालों में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया पर सरकार की लगातार हो रही कार्रवाई अचानक नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय सहित दूसरी सरकारी एजेंसियों की ओर से शोषण हमारी सरकार में पारदर्शिता की मांग, दिल्ली दंगों में दिल्ली पुलिस और भारत सरकार की भूमिका की जवाबदेही तय करने की मांग और दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से हो रहा है। ऐसा अभियान जिसने हमेशा अन्याय के लिए आवाज उठाई है, उसपर यह नया हमला उसकी प्रतिरोध में उठ रही आवाज को बंद करने के लिए किया गया है।'
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया पर आरोप
संस्था के 'पीछे पड़ने' के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) संस्था के खिलाफ विदेशी फंडिंग हासिल करने में अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रहा है। गृह मंत्रालय के मुताबिक संस्था ने 'भारत में एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) के जरिए पैसे मंगाए', जिसकी गैर-लाभकारी संस्थाओं को अनुमति नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि एमनेस्टी इंडिया को 2011-12 में एमनेस्टी यूके से लगभग 1.69 करोड़ रुपये प्राप्त करने की सरकार की अनुमति मिली थी। लेकिन 2013 के बाद से उसे इसकी इजाजत देने से मना कर दिया गया।
ईडी ने 2017 में संस्था के अकाउंट फ्रीज कर दिए थे, जिसके बाद एमनेस्टी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और उसे कुछ राहत मिली। लेकिन उसका अकाउंट सील था। पिछले साल सीबीआई ने भी उनके खिलाफ केस दर्ज किया। शिकायत में कहा गया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल यूके ने कथित तौर पर मंत्रालय की मंजूरी के बिना एफडीआई के रूप में एमनेस्टी इंडिया की संस्थाओं को 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इसमें कहा गया कि, 'इसके अलावा 26 करोड़ रुपये की रकम यूके की संस्थाओं की ओर से मंत्रालय की मंजूरी के बिना एमनेस्टी इंडिया को दी गईं, जिसे भारत में एनजीओ की गतिविधियों पर खर्च किया गया। यह एफसीआरए कानूनों का उल्लंघन है।'