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Amit Shah: 'बिल को गिराकर जश्न मनाना निंदनीय, यह कल्पना से परे'; संविधान संशोधन बिल गिरने पर बोले अमित शाह
Fri, 17 Apr 2026 10:22 PM IST
Shivam Garg
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Shivam Garg
Updated Fri, 17 Apr 2026 10:22 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न होने के बाद कांग्रेस और उसके साथियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे नारी शक्ति का अपमान कहा और महिला सशक्तिकरण के प्रति उनकी सोच पर सवाल उठाया।
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अमित शाह, गृह मंत्री
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने वाले संविधान संशोधन विधेयक के विफल होने पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन दलों की मानसिकता न तो महिलाओं के हित में है और न ही देश के।
शाह का विपक्ष पर बड़ा आरोप
लोकसभा में शुक्रवार रात को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर मतदान के दौरान दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहने के बाद अमित शाह ने 'एक्स' पर एक संदेश में कहा 'उनका (कांग्रेस और सहयोगियों का) महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले विधेयक को अस्वीकार करना, उसका जश्न मनाना और जीत के नारे लगाना वास्तव में निंदनीय और अकल्पवनिक था।' गृह मंत्री ने कहा 'आज लोकसभा में एक बहुत ही अजीब दृश्य देखा गया, जब कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पारित नहीं होने दिया।'
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महिलाओं के अधिकारों पर सवाल
उन्होंने आगे कहा 'अब देश की महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा, जो उनका अधिकार था। यह कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने किया है, पहली बार नहीं बल्कि बार-बार किया है। उनकी मानसिकता न तो महिलाओं के हित में है, न ही देश के।'
नारी शक्ति का अपमान
अमित शाह ने विधेयक का विरोध करने वाले कांग्रेस और अन्य दलों को चेतावनी दी कि नारी शक्ति के इस अपमान का असर दूर-दूर तक जाएगा। उन्होंने कहा विपक्ष को न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि हर स्तर पर, हर चुनाव में और हर जगह महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
पास करवाने के चाहिए थे 352 वोट, मिले 298
लोकसभा में इस विधेयक पर कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध में वोट डाला। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट न मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को संचालित करने के लिए लोकसभा की सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाना था। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों में वृद्धि की जानी थी।
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शाह का विपक्ष पर बड़ा आरोप
लोकसभा में शुक्रवार रात को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर मतदान के दौरान दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहने के बाद अमित शाह ने 'एक्स' पर एक संदेश में कहा 'उनका (कांग्रेस और सहयोगियों का) महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले विधेयक को अस्वीकार करना, उसका जश्न मनाना और जीत के नारे लगाना वास्तव में निंदनीय और अकल्पवनिक था।' गृह मंत्री ने कहा 'आज लोकसभा में एक बहुत ही अजीब दृश्य देखा गया, जब कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पारित नहीं होने दिया।'
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महिलाओं के अधिकारों पर सवाल
उन्होंने आगे कहा 'अब देश की महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा, जो उनका अधिकार था। यह कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने किया है, पहली बार नहीं बल्कि बार-बार किया है। उनकी मानसिकता न तो महिलाओं के हित में है, न ही देश के।'
नारी शक्ति का अपमान
अमित शाह ने विधेयक का विरोध करने वाले कांग्रेस और अन्य दलों को चेतावनी दी कि नारी शक्ति के इस अपमान का असर दूर-दूर तक जाएगा। उन्होंने कहा विपक्ष को न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि हर स्तर पर, हर चुनाव में और हर जगह महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
पास करवाने के चाहिए थे 352 वोट, मिले 298
लोकसभा में इस विधेयक पर कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध में वोट डाला। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट न मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को संचालित करने के लिए लोकसभा की सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाना था। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों में वृद्धि की जानी थी।