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अमित शाह की एनआरसी पर स्क्रिप्ट तैयार, लोकसभा चुनाव तक भुनाएगी भाजपा
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Thu, 02 Aug 2018 04:24 AM IST
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Amit Shah
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राजनीति के रंग को बखूबी भांप लेते हैं। मंगलवार को जब वह राज्यसभा में बोलने के लिए खड़े हुए और महज चंद मिनटों में सदन हंगामे में तब्दील हो गया, तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को कुछ-कुछ समझ में आना शुरू हो गया था। कुछ ही देर में कांग्रेस के नेताओं को इसकी पूरी स्क्रिप्ट समझ में आने लगी। इसके बाद कांग्रेस जहां इस मुद्दे पर संभलने की तैयारी करने लगी, वहीं भाजपा अध्यक्ष ने आगे की पटकथा लिखना शुरू कर दी। अब वह इसे लोकसभा चुनाव तक भुनाने की तैयारी कर रहे हैं। फिलवक्त पहली कड़ी में वह इस मुद्दे पर ममता बनर्जी की परेशानी बढ़ाने के लिए 11 अगस्त को पश्चिम बंगाल जा रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष की पश्चिम बंगाल यात्रा का मकसद एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण) रजिस्टर पर अपनी बात कहना है। पश्चिम बंगाल के प्रभारी और पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजय वर्गीय भी इसके लिए रणनीतिक तानाबाना बुन रहे हैं। पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष पहले से ही एनआरसी को लेकर आक्रामक रुख अपनाकर चल रहे हैं।
पटकथा
मंगलवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर प्रश्नकाल को स्थगित करके असम में एनआरसी को लेकर एक घंटे की चर्चा हो जाए। यह प्रस्ताव राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने रखा। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद चर्चा शुरू हुई। राजनीतिक दलों के लोगों ने अपनी बात रखनी शुरू की। गुलाम नबी आजाद, प्रो. राम गोपाल यादव, सुकेन्दु शेखर राय समेत अन्य दलों के नेताओं ने बारी-बारी से अपनी राय रखी। भाजपा अध्यक्ष अमित अनिल चंद्र शाह की भी बारी आई। वह बोलना शुरू ही किए थे कि विपक्ष के सदन में उपनेता आनंद शर्मा ने प्वाइंट अर्डर उठाते हुए कहा कि सदन की डिजिटल घड़ी नहीं चल रही है। इससे यह पता नहीं लग पाएगा किसको सदन में कितने समय तक बोलने दिया गया। हालांकि सभापति ने कहा कि उनके पास पर्याप्त समय है। अमित शाह ने भी कहा कि वह अपनी बात समय पर खत्म कर लेंगे।
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अमित शाह ने बोलना शुरू किया। अमित शाह ने कहा कि 14 अगस्त 1985 को राजीव गांधी ने एक असम अकार्ड पर दस्तखत किया था। 15 अगस्त को लाल किले से भाषण में उन्होंने इसकी घोषणा की थी। इस असम अकार्ड की आत्मा एनआरसी है। एनआरसी का मतलब क्या है? असम अकार्ड में कहा गया है कि घुसपैठियों की पहचान करके उनको हमारे नागरिकता के दस्तावेज से अलग करके एक भारतीय नागरिकों को शुद्ध रजिस्टर बनाया जाएगा। (सदन में हंगामा शुरू हो गया)
अमित शाह ने कहा हम यह शुरूआत कर रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री कांग्रेस के प्रधानमंत्री द्वारा की गई शुरूआत को पूरा कर रहे हैं। इनमें (कांग्रेस) हिम्मत नहीं थी, हममें (एनडीए सरकार) में है। हम आगे बढ़ रहे हैं। अमित शाह के इतना बोलते ही सदन में हंगामा तेज हो गया। शाह ने बोलना जारी रखा। उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि 40 लाख में कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं... सदन नारे, शोर शराबे में बदल गया और सभापति ने 10 मिनट के लिए कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
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भाजपा अध्यक्ष की पश्चिम बंगाल यात्रा का मकसद एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण) रजिस्टर पर अपनी बात कहना है। पश्चिम बंगाल के प्रभारी और पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजय वर्गीय भी इसके लिए रणनीतिक तानाबाना बुन रहे हैं। पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष पहले से ही एनआरसी को लेकर आक्रामक रुख अपनाकर चल रहे हैं।
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पटकथा
मंगलवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर प्रश्नकाल को स्थगित करके असम में एनआरसी को लेकर एक घंटे की चर्चा हो जाए। यह प्रस्ताव राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने रखा। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद चर्चा शुरू हुई। राजनीतिक दलों के लोगों ने अपनी बात रखनी शुरू की। गुलाम नबी आजाद, प्रो. राम गोपाल यादव, सुकेन्दु शेखर राय समेत अन्य दलों के नेताओं ने बारी-बारी से अपनी राय रखी। भाजपा अध्यक्ष अमित अनिल चंद्र शाह की भी बारी आई। वह बोलना शुरू ही किए थे कि विपक्ष के सदन में उपनेता आनंद शर्मा ने प्वाइंट अर्डर उठाते हुए कहा कि सदन की डिजिटल घड़ी नहीं चल रही है। इससे यह पता नहीं लग पाएगा किसको सदन में कितने समय तक बोलने दिया गया। हालांकि सभापति ने कहा कि उनके पास पर्याप्त समय है। अमित शाह ने भी कहा कि वह अपनी बात समय पर खत्म कर लेंगे।
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अमित शाह ने बोलना शुरू किया। अमित शाह ने कहा कि 14 अगस्त 1985 को राजीव गांधी ने एक असम अकार्ड पर दस्तखत किया था। 15 अगस्त को लाल किले से भाषण में उन्होंने इसकी घोषणा की थी। इस असम अकार्ड की आत्मा एनआरसी है। एनआरसी का मतलब क्या है? असम अकार्ड में कहा गया है कि घुसपैठियों की पहचान करके उनको हमारे नागरिकता के दस्तावेज से अलग करके एक भारतीय नागरिकों को शुद्ध रजिस्टर बनाया जाएगा। (सदन में हंगामा शुरू हो गया)
अमित शाह ने कहा हम यह शुरूआत कर रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री कांग्रेस के प्रधानमंत्री द्वारा की गई शुरूआत को पूरा कर रहे हैं। इनमें (कांग्रेस) हिम्मत नहीं थी, हममें (एनडीए सरकार) में है। हम आगे बढ़ रहे हैं। अमित शाह के इतना बोलते ही सदन में हंगामा तेज हो गया। शाह ने बोलना जारी रखा। उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि 40 लाख में कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं... सदन नारे, शोर शराबे में बदल गया और सभापति ने 10 मिनट के लिए कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
मुझे बोलने नहीं दिया गया: अमित शाह
क्या हुआ इसके बाद
सभापति चैंबर में गए। उनके पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह गए। इधर सदन में कुछ मिनट तक गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने मंत्रणा की। इसके बाद गुलाम नबी आजाद सभापति के चैंबर में गए। आजाद भीतर जा रहे थे और उनके भीतर दाखिल होते ही गृहमंत्री, अमित शाह दोनों लौट आए। थोड़ी देर में फिर सदन की कार्यवाही शुरू हुई और हंगामे के कारण पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई।
मुझे बोलने नहीं दिया गया
यह मंगलवार की स्क्रिप्ट का पार्ट-2 था। राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद अमित शाह की पार्टी नेताओं से मंत्रणा हुई। सूत्र बताते हैं कि वह प्रधानमंत्री से भी मिले और चार बजे पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन हुआ। भाजपा अध्यक्ष ने अपनी बात इसी वाक्य से शुरू की उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया। इसलिए वह अपनी बात संवाददाताओं के बीच में रखेंगे। प्रेसवार्ता में अमित शाह ने कहा कि एनआरसी का जो विरोध कर रहे हैं, बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचा रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से अपनी राय स्पष्ट रखने की मांग की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और विपक्ष पर वोटों की राजनीति करने का आरोप लगाया। भरोसा दिया कि जो भारतीय नागरिक हैं उन पर एनआरसी में नाम न होने का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विपक्ष के मानवता और मानव अधिकार पर भी सवाल उठाए और कहा कि हमारे देश के नागरिकों के संसाधन पर विदेशियों का अधिकार क्या भारतीय नागरिकों के मानव अधिकार पर हमला नहीं है। इसके साथ अमित शाह ने कहा कि जिन लोगों के एनआरसी में नाम नहीं हैं, वो घुसपैठिए हैं। शाह ने एनआरसी रजिस्टर को उच्चतम न्यायालय की मॉनिटरिंग में पूरी सतर्कता के साथ पूरा होने की दृढ़ इच्छाशक्ति भी दिखाई।
सभापति चैंबर में गए। उनके पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह गए। इधर सदन में कुछ मिनट तक गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने मंत्रणा की। इसके बाद गुलाम नबी आजाद सभापति के चैंबर में गए। आजाद भीतर जा रहे थे और उनके भीतर दाखिल होते ही गृहमंत्री, अमित शाह दोनों लौट आए। थोड़ी देर में फिर सदन की कार्यवाही शुरू हुई और हंगामे के कारण पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई।
मुझे बोलने नहीं दिया गया
यह मंगलवार की स्क्रिप्ट का पार्ट-2 था। राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद अमित शाह की पार्टी नेताओं से मंत्रणा हुई। सूत्र बताते हैं कि वह प्रधानमंत्री से भी मिले और चार बजे पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन हुआ। भाजपा अध्यक्ष ने अपनी बात इसी वाक्य से शुरू की उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया। इसलिए वह अपनी बात संवाददाताओं के बीच में रखेंगे। प्रेसवार्ता में अमित शाह ने कहा कि एनआरसी का जो विरोध कर रहे हैं, बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचा रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से अपनी राय स्पष्ट रखने की मांग की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और विपक्ष पर वोटों की राजनीति करने का आरोप लगाया। भरोसा दिया कि जो भारतीय नागरिक हैं उन पर एनआरसी में नाम न होने का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विपक्ष के मानवता और मानव अधिकार पर भी सवाल उठाए और कहा कि हमारे देश के नागरिकों के संसाधन पर विदेशियों का अधिकार क्या भारतीय नागरिकों के मानव अधिकार पर हमला नहीं है। इसके साथ अमित शाह ने कहा कि जिन लोगों के एनआरसी में नाम नहीं हैं, वो घुसपैठिए हैं। शाह ने एनआरसी रजिस्टर को उच्चतम न्यायालय की मॉनिटरिंग में पूरी सतर्कता के साथ पूरा होने की दृढ़ इच्छाशक्ति भी दिखाई।
क्या है भाजपा की स्क्रिप्ट
ममता बनर्जी भी दिल्ली में
संसद में एनआरसी का मुद्दा और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली में। जी हां ममता बनर्जी मंगलवार से दिल्ली में हैं। बुधवार को वह सायं पांच बजे यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से भी मिली। दोनों नेताओं के बीच में हुई बातचीत का ब्यौरा अभी सामने नहीं आ सका है। लेकिन ममता बनर्जी ने एनआरसी के मुद्दे पर इसका विरोध करने का आक्रामक रुख अपना रखा है। इसके बरक्स अमित शाह बुधवार एक अगस्त को भी राज्यसभा में नहीं बोल पाए। विपक्ष के हंगामे के बीच केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह अपना जवाब नहीं दे पाए। सभापति ने सदन की कार्यवाही को दो अगस्त बृहस्पतिवार के लिए स्थगित कर दिया।
क्या है भाजपा की स्क्रिप्ट
असम और पूर्वोत्तर में बाग्लादेशी घुसपैठ और उनका प्रभाव एक ज्वलंत मुद्दा है। इसका असर पश्चिम बंगाल में काफी हद तक पड़ता है। भाजपा के लिए इस क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आवाज बुलंद रखना राजनीतिक रूप से फायदे का सौदा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कहते हैं कि उनकी पार्टी के लिए यह मुद्दा नया नहीं है। जब भाजपा विपक्ष में थी तब भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के पहचान की बात करती थी और अब सत्ता में है तो उसे पूरा कर रही है।
इस बीच राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी एनआरसी पर अमल करने की बात कही है। बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आवाज दिल्ली एनसीआर में भी माने रखती है। वहीं इसमें पूरे देश के बहुसंख्यक वर्ग के लिए भाजपा को एक संवेदना दिखाई पड़ रही है।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में न केवल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपनी जनसभाओं में इसको लेकर विपक्ष पर तंज कसते रहेंगे। संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद 11 अगस्त को अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे में इसकी बानगी देखने को मिल सकती है।
संसद में एनआरसी का मुद्दा और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली में। जी हां ममता बनर्जी मंगलवार से दिल्ली में हैं। बुधवार को वह सायं पांच बजे यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से भी मिली। दोनों नेताओं के बीच में हुई बातचीत का ब्यौरा अभी सामने नहीं आ सका है। लेकिन ममता बनर्जी ने एनआरसी के मुद्दे पर इसका विरोध करने का आक्रामक रुख अपना रखा है। इसके बरक्स अमित शाह बुधवार एक अगस्त को भी राज्यसभा में नहीं बोल पाए। विपक्ष के हंगामे के बीच केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह अपना जवाब नहीं दे पाए। सभापति ने सदन की कार्यवाही को दो अगस्त बृहस्पतिवार के लिए स्थगित कर दिया।
क्या है भाजपा की स्क्रिप्ट
असम और पूर्वोत्तर में बाग्लादेशी घुसपैठ और उनका प्रभाव एक ज्वलंत मुद्दा है। इसका असर पश्चिम बंगाल में काफी हद तक पड़ता है। भाजपा के लिए इस क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आवाज बुलंद रखना राजनीतिक रूप से फायदे का सौदा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कहते हैं कि उनकी पार्टी के लिए यह मुद्दा नया नहीं है। जब भाजपा विपक्ष में थी तब भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के पहचान की बात करती थी और अब सत्ता में है तो उसे पूरा कर रही है।
इस बीच राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी एनआरसी पर अमल करने की बात कही है। बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आवाज दिल्ली एनसीआर में भी माने रखती है। वहीं इसमें पूरे देश के बहुसंख्यक वर्ग के लिए भाजपा को एक संवेदना दिखाई पड़ रही है।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में न केवल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपनी जनसभाओं में इसको लेकर विपक्ष पर तंज कसते रहेंगे। संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद 11 अगस्त को अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे में इसकी बानगी देखने को मिल सकती है।