आधी रात को शाह का येदियुरप्पा को फोन और कर्नाटक को मिल गई नई सरकार
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कर्नाटक में लगभग तीन हफ्तों तक सियासी उठापठक का दौर चला। इसके बाद विश्वास मत पर जब वोटिंग हुई तो कांग्रेस-जेडीएस के गठबंधन वाली सरकार मात्र छह वोटों के अंतर से गिर गई। इसके बाद गुरुवार को राज्य के भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा घबराते हुए दिल्ली मे मौजूद शीर्ष नेतृत्व से सरकार गठन के लिए हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे थे। रात के करीब 11.45 पर उन्हें एक फोन आया और पूरी तस्वीर बदल गई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने येदियुरप्पा को कहा कि वह सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं लेकिन जल्दबाजी में कोई घोषणा करने से बचें।
शाह ने कहा कि हाईकमान लगभग राज्य में सरकार बनाने के पक्ष में है। उन्होंने येदियुरप्पा से कहा कि वह कोई भी घोषणा करने से पहले शुक्रवार सुबह तक का इंतजार करें। यह बात येदियुरप्पा के एक करीबी सूत्र ने बताई। उनसे यह भी कहा गया कि वह अपने जोखिम पर सरकार बनाने वाले हैं। शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने येदियुरप्पा को फोन करके पूछा कि उन्हें परेशानी मुक्त सरकार के गठन पर कितना विश्वास है क्योंकि कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे का ड्रामा अभी तक खत्म नहीं हुआ है।
भाजपा के एक सूत्र ने बताया, 'येदियुरप्पा ने नड्डा को आश्वासन दिया कि वह इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। इसके बाद अमित शाह ने फोन किया और उन्हें हरी झंडी देते हुए जल्द से जल्द औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा।' शाह की मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ थोड़ी सी बातचीत हुई। शपथ ग्रहण समारोह पहले 12.30 से एक बजे के बीच होने वाला था लेकिन यह कार्यक्रम शाम के छह बजे हुआ। जिसमें येदियुरप्पा ने अकेले शपथ ली।
माना जा रहा है कि 29 जुलाई को जब येदियुरप्पा सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे तो उसी दिन वह अपने कैबिनेट मंत्रियों का चुनाव करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने कहा, 'हाईकमान इस बात को सुनिश्चित करना चाहता था कि कोई समस्या या कानूनी बाधा नहीं आएगी। उसने येदियुरप्पा के नेतृत्व में नई सरकार को मंजूरी दी है।'
भाजपा नेता जेसी मधुस्वामी ने कहा, 'नेतृत्व इस मामले को संसदीय बोर्ड के सामने रखना चाहता था लेकिन कुछ कारणों पर विचार करने के बाद आगे चीजों में देरी न करने का फैसला किया गया।' राजभवन से मिले सिग्नल ने भाजपा को इस मुद्दे पर धीमी गति से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कहा जा रहा है कि राज्यपाल वजुभाई वाला ने भाजपा के एक खेमे से पूछा था कि संख्या कहां है?
पार्टी के एक सूत्र ने कहा, 'पिछले साल येदियुरप्पा को सदन में बहुमत साबित करने का एक मौका दिया गया था लेकिन वह असफल रहे। उनके पास जरूरी 113 के मुकाबले 104 विधायक हैं। तब से भाजपा की संख्या में केवल एक विधायक की बढ़ोतरी हुई है जोकि पर्याप्त नहीं है।' वाला ने अपने विचार पार्टी नेतृत्व के साथ साझा किए हैं। शाह ने अपना फैसला तब बदला जब एक प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें आश्वासन दिया कि बागी विधायक उन्हें धोखा नहीं देंगे।
टीम ने शाह को बताया कि 17 बागी विधायक विश्वास मत के दौरान अनुपस्थित रहे थे। भाजपा सदन में अपना बहुमत साबित कर सकती है और उसके पास सरकार को स्थिर करने के लिए छह महीने हैं। शुक्रवार को शाह ने कर्नाटक के नेताओं, नड्डा और भाजपा के महासचिव मुरलीधर राव के साथ दो घंटे बातचीत की। स्पीकर केआर रमेश कुमार के तीन विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने से उनके 2023 तक चुनाव लड़ने से रोक लग गई है। इसी साल राज्य की विधानसभा का कार्यकाल भी खत्म हो जाएगा।
शेट्टार ने कहा, 'ऐसा लगता है कि कांग्रेस-जेडीएस कैंप ने स्पीकर के फैसले का इस्तेमाल बागी विधायकों को डराने के लिए किया। हम कोई चांस नहीं लेना चाहते हैं।' शाह ने गुरुवार को कथित तौर पर कानूनी विशेषज्ञों के साथ इस मामले पर चर्चा की। ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आईं हैं कि कुमारस्वामी सरकार गिरने के बावजूद कांग्रेस रामलिंगा रेड्डी के जरिए मुंबई में ठहरे हुए बागी विधायकों के साथ बातचीत करने और उन्हें मनाने की कोशिश कर रही थी।