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एकनाथ शिंदे शिवसेना विधायक दल के नेता चुने गए, राज्यपाल से मिलेंगे आदित्य ठाकरे

Thu, 31 Oct 2019 02:18 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 31 Oct 2019 02:18 PM IST
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Amit Shah and Uddhav thackeray will sort out Maharashtra issue
उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई

एकनाथ शिंदे को गुरुवार को सदन में शिवसेना का नेता चुना गया। उनके नाम का प्रस्ताव पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने रखा। खुद ठाकरे का नाम भी इस पद के लिये चर्चा में था। पार्टी दफ्तर सेना भवन में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में शिंदे के नाम की घोषणा की गई। पार्टी सूत्रों ने बताया कि पार्टी प्रमुख और आदित्य के पिता उद्धव ठाकरे अपने बेटे को शिवसेना विधायक दल का प्रमुख बनाए जाने के इच्छुक नहीं थे। वहीं आदित्य ठाकरे, एकनाथ शिंदे, दिवाकर राउते और सुभाष देसाई राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से आज शाम 3.30 बजे मुलाकात करेंगे।

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बता दें कि एकनाथ शिंदे इससे पहले भी पार्टी विधायक दल के नेता थे साथ ही फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। ये ठाणे के कोपरी-पंचपखाड़ी निर्वाचन क्षेत्र से फिर विधायक चुने गए हैं। बता दें कि एकनाथ शिंदे इस विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार 2004, 2009 और 2014 में शिवसेना के टिकट पर विधायक चुने गए हैं। विधायक चुने जाने से पहले एकनाथ शिंदे ठाणे महानगर पालिका में दो बार के कार्यकाल तक नगर सेवक रहे। इसके अलावा तीन साल तक पॉवरफुल स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य रहे। 
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वहीं बैठक से पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने भाजपा के प्रति उनकी पार्टी के रुख में नरमी की खबरों को अफवाह बताया है। राउत ने कहा है कि शिवसेना के इस रुख में नरमी के लेकर मीडिया के एक वर्ग में आईं खबरें अफवाह हैं।
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उन्होंने बृहस्पतिवार को ट्वीट किया, ऐसी खबरें आ रही हैं कि शिवसेना के रुख में नरमी आई है, उसने समझौता कर लिया है और सत्ता में पदों के वितरण में बराबरी की हिस्सेदारी की मांग त्याग दी है। यह सब अफवाह है। यह जनता है जो सब कुछ जानती है। (भाजपा और शिवसेना के बीच) जो कुछ भी तय हुआ था वह होगा।

उन्होंने शिवसेना में संभावित फूट की खबरों को भी निराधार बताया। राउत ने कहा कि जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि शिवसेना के 23 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं तो वे शायद आदित्य ठाकरे का नाम लेना भूल गए होंगे... और वे केवल 23 विधायकों का नाम ही क्यों ले रहे हैं, पूरे 56 विधायकों के नाम क्यों नहीं ले रहे।






 
आरपीआई नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि महायुती (भाजपा-शिवसेना) को स्पष्ट बहुमत मिला है। कल देवेंद्र फडणवीस भाजपा के विधायक दल के नेता चुने गए। हमने सीएम के लिए उनके नाम के समर्थन का फैसला किया है, वही रेस में सबसे आगे हैं।

शाह-उद्धव सुलझाएंगे महाराष्ट्र की गुत्थी

उधर बताया जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच बैठक हो सकती है। फिलहाल दोनों दल मध्यस्थों के जरिए नई सरकार के गठन का ठोस रोडमैप तैयार करने में जुटे हैं। कार्यकाल का आधा-आधा बंटवारा और सीएम पद के मुख्य विवाद का बीच का रास्ता निकलते ही दोनों नेताओं की मुलाकात होगी।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक भले ही सार्वजनिक तौर पर भाजपा और शिवसेना में खींचतान दिख रही है, मगर दोनों दल मध्यस्थों के जरिये लगातार संपर्क में हैं। भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह किसी कीमत पर कार्यकाल बंटवारे और सीएम पद की मांग नहीं मानेगी। इसे देखते हुए दोनों तरफ से मध्यस्थता में लगे नेता सम्मानजनक रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
 

अल्पमत सरकार अंतिम विकल्प

दोनों दलों के बीच बात न बनने पर भाजपा 2014 की तर्ज पर अल्पमत सरकार बना सकती है। माना जा रहा है कि शपथ होने के बाद शिवसेना उलझ जाएगी। भाजपा को भरोसा है कि इससे शिवसेना गठबंधन नहीं तोडे़गी और विश्वास प्रस्ताव से पहले रास्ता निकाल लिया जाएगा। गौरतलब है कि 2014 में भी 122 विधायकों के साथ भाजपा ने अकेले सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इसके बाद शिवसेना जोड़-तोड़ करती रही और विश्वास मत के दौरान भाजपा के साथ आ गई। तब शिवसेना के 63 विधायक थे।

भाजपा का दावा-15 निर्दलीय साथ

मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 15 निर्दलीयों के समर्थन का दावा कर चुके हैं। बुधवार को जन सुराज पार्टी के नेता और कोल्हापुर से विधायक विनय कोरे ने भी भाजपा को समर्थन दे दिया। हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक शिवसेना से विवाद का हल निकलने की पूरी उम्मीद है। भाजपा के पास शिवसेना को केंद्र सरकार में भी उचित प्रतिनिधित्व देने का प्रस्ताव है।

कृषि, गृह और वित्त मंत्रालय भी नहीं

मध्यस्थों के जरिए भाजपा ने शिवसेना की सीएम पद की मांग ही नहीं ठुकराई है, बल्कि यह भी कहा है कि वह गृह, वित्त और कृषि जैसे विभाग अपने पास ही रखेगी। हालांकि पार्टी मंत्रिमंडल में शिवसेना का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर राजी है। दूसरी ओर, शिवसेना की तरफ से ऐसे किसी प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिवसेना के 56 विधायक जीते हैं और उसे पांच निर्दलियों ने समर्थन दिया है। इससे उनका संख्याबल 61 पहुंच गया है।

फडणवीस ने किया उद्धव को फोन

मंगलवार को होने वाली भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की बैठक रद्द होने के बाद फडणवीस ने रास्ता निकालने का प्रयास तेज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक फडणवीस ने बुधवार दोपहर बाद उद्धव को मुलाकात के लिए फोन किया और जल्द सरकार बनाने के लिए रास्ता निकालने पर चर्चा की।

एनसीपी के नेता चुने गए अजित पवार

उधर महाराष्ट्र विधानसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी के नव निर्वाचित विधायकों ने अजित पवार को अपना नेता चुना है। सदन में अब वह पार्टी के नेता होंगे। बुधवार शाम को यहां नव निर्वाचित विधायकों की बैठक के बाद एनसीपी के राज्य अध्यक्ष जयंत पाटिल ने यह घोषणा की।

भाजपा-गठबंधन के बाद सबसे ज्यादा 54 सीटें एनसीपी की है, इसलिए उनकी सरकार बनने पर एनसीपी को विपक्ष का नेता पद मिलेगा। कांग्रेस 44 सीटों के साथ चौथे स्थान पर रही है। नेता चुनने की बैठक में जयंत पाटिल ने अजित पवार का नाम आगे बढ़ाया था, जिसका अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अनुमोदन किया।

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