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पदोन्नति में धांधली: सेना में जालसाजी की जांच, अब तटरक्षक बल के अधिकारी का भी आरोप

Sat, 27 Nov 2021 06:20 PM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 27 Nov 2021 06:20 PM IST
सार

एक डीआईजी रैंक के अधिकारी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आईजी पद पर पदोन्नति के लिए 2020 में आयोजित विभागीय पदोन्नति बोर्ड में उनके रिकॉर्ड को 'गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया'।

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Amid probe into forgery charges in senior-level coast guard promotions, officer alleges malpractices at junior level too
defence ministry

विस्तार

रक्षा मंत्रालय जहां वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति के गोपनीय रिकॉर्ड में जालसाजी के आरोपों की जांच कर रहा है, वहीं अब तटरक्षक बल में डीआईजी स्तर के अधिकारी ने सरकार से शिकायत की है कि उन्हें मेरिट लिस्ट में होने के बाद भी पदोन्नति से वंचित रखा गया। इससे पदोन्नति बोर्डों में कदाचार का संकेत मिलता है। 

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तटरक्षक बल की तकनीकी शाखा के एक डीआईजी रैंक के अधिकारी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आईजी पद पर पदोन्नति के लिए 2020 में आयोजित विभागीय पदोन्नति बोर्ड में उनके रिकॉर्ड को 'गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया'। उनके वार्षिक गोपनीय रिकॉर्ड (एसीआर) में सांख्यिकी आकलन को हटा दिया गया, ताकि बहुत निचले स्तर के एक अधिकारी को प्रमोशन देने के लिए उन्हें नीचे धकेला जा सके। 
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अपनी शिकायत में अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया एक व्यक्ति के पक्ष में की गई। रक्षा सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को यह जानकारी दी। शिकायतकर्ता डीआईजी ने कहा कि जब रक्षा मंत्री के कार्यालय द्वारा दखल दिया गया तो रक्षा मंत्रालय ने पूरे प्रमोशन बोर्ड को खारिज कर दिया। जांच में पाया गया कि आईजी स्तर के अधिकारियों की एसीआर में हेराफेरी की गई। यहां तक कि प्रमोशन सूची में निचले स्तर के अधिकारियों को पदोन्नति देने के लिए पिछली एसीआर उन्हें दिए गए नंबरों को व्हाइटनर का इस्तेमाल कर बदल दिया गया। 
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सूत्रों ने बताया कि भारतीय तटरक्षक बल के रिकॉर्ड से अधिकारियों की एसीआर को गायब कर दिया गया, ताकि भावी पदोन्नति के दौरान हेराफेरी की जा सके।  इसे देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए एक आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि अधिकारियों की पदोन्नति बोर्ड बनाने के दौरान बोर्ड के गठन की तारीख से पिछले दो सालों की एसीआर का आकलन नहीं किया जाएगा।


कार्मिक मंत्रालय इस संबंध में पहले ही दिशा निर्देश जारी कर चुका था, लेकिन इस पर अमल नहीं हो रहा था। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि जालसाजी के आरोपों के मद्देनजर तट रक्षक बल में यह नियम लागू किया गया था। लेकिन इस संबंध में आदेश जारी होते ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने, जो सरकार के इस सुधारात्मक कदम से बुरी तरह प्रभावित हो रहा था, तुरंत दिल्ली हाईकोर्ट में इसे चुनौती दे दी। 

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