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West Bengal: 60 साल बाद खोदी जाएगी अमेरिकी सैन्य जनरल की कब्र, अवशेष US भेजने के लिए जताया सरकार का आभार

Mon, 29 May 2023 10:17 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 29 May 2023 10:17 PM IST
सार

कोलकाता में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास के अधिकारी मेलिंडा पावेक ने बताया कि मेजर जनरल हैरी क्लेनबेक पिकेट 1965 में दार्जिलिंग के दौरे पर आए थे। यहां उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद उन्हें यहीं एक कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। 

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American general grave dug after 60 years expressed gratitude to the government for sending the remains to US
हैरी क्लेनबेक पिकेट। - फोटो : Social Media

विस्तार

पश्चिम बंगाल में दफनाए गए अमेरिकी सैन्य अधिकारी के शव के अवशेषों को करीब 60 साल बाद एक बार फिर कब्र से बाहर निकाला जा रहा है। अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सैन्य अधिकारी के अवशेषों को अब अमेरिका भेजा जाएगा, जिससे वहां उन्हें दोबारा दफनाया जा सके।

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शव वापस लाने का किया था आग्रह 
कोलकाता में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास के अधिकारी मेलिंडा पावेक ने बताया कि मेजर जनरल हैरी क्लेनबेक पिकेट 1965 में दार्जिलिंग के दौरे पर आए थे। यहां उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद उन्हें यहीं एक कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। अधिकारी का कहना है कि मृतक अधिकारी के परिवार ने अमेरिकी सरकार से शव को वापस लाने के लिए आग्रह किया था। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने भारतीय सरकार से इसके लिए संपर्क किया और बातचीत के बाद भारत शव के अवशेषों को खोदकर अमेरिका भेजने के लिए राजी हो गया है। जनरल पिकेट को अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में दफनाया गया है।  

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मीडिया रिपोर्ट का दावा है पिकेट ने प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध सहित अन्य युद्धों में जीत दर्ज की है। पिकेट 1913 में यूएस मरीन कॉर्प्स में भर्ती हुए थे। 

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बिना सरकार के समर्थन के उनकी वापसी संभव नहीं थी
अमेरिकी दूत ने बताया कि सरकारी लोक सेवक के रूप में हमारी पहली प्राथमिकता है कि हम अमेरिकी नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करें और उनका समर्थन करें। पावेक का कहना है कि वह अपनी और अपनी टीम की तरफ से भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार की सहायता और उनके समर्थन के लिए आभारी हैं। उनका कहना है कि बिना सरकार के समर्थन के उनकी वापसी संभव नहीं थी। 

 

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