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बिना अनुमति धार्मिक प्रचार करना पड़ा भारी: अमेरिकी नागरिक का ओसीआई कार्ड रद्द, हाईकोर्ट ने फैसला रखा बरकरार

Thu, 29 Oct 2026 06:17 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 29 Oct 2026 06:17 PM IST
सार

मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक जॉन डेनियल का ओसीआई कार्ड रद्द करने का फैसला बरकरार रखा। अदालत के मुताबिक, उन्होंने केंद्र सरकार की अनुमति के बिना मिशनरी गतिविधियां चलाईं और कोर्ट में गलत जानकारी दी। 

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American citizen’s OCI card cancelled; High Court upholds the decision.
मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मद्रास हाईकोर्ट ने 'फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर' (एफआरआरओ) के एक आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें भारतीय मूल के एक अमेरिकी नागरिक का 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (ओसीआई) रजिस्ट्रेशन कार्ड रद्द कर दिया गया था। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार से अनुमति लिए बिना ही मिशनरी (धार्मिक प्रचार) गतिविधियां चलाई थीं।
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याचिका में क्या मांग की गई? 
जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने जॉन डेनियल की याचिका को खारिज कर दिया। अपनी याचिका में उन्होंने अधिकारियों से अपना ओसीआई रजिस्ट्रेशन बहाल करने और उससे जुड़ी सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति देने की मांग की थी।
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जज ने क्या कहा? 
जज ने आगे कहा, 'हालांकि, याचिकाकर्ता अपनी मां से मिलने के लिए रेगुलर वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत में बैठकें करने या धार्मिक उद्देश्यों से जुड़ी गतिविधियां चलाने के लिए, उन्हें पहले जरूरी अनुमति लेनी होगी।' सुनवाई के दौरान, जॉन डेनियल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने ओसीआई कार्डधारकों से जुड़े किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने मिशनरी गतिविधियों और धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों से इनकार किया।
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अपने आदेश में जज ने कहा कि याचिकाकर्ता की पात्रता को लेकर कोई विवाद नहीं है, क्योंकि उनके माता-पिता भारतीय मूल के थे। चूंकि उनका जन्म अमेरिका में हुआ था, इसलिए उन्हें अमेरिकी नागरिक माना गया और उन्होंने अमेरिकी नागरिकता ही चुनी। जज ने कहा कि इसी आधार पर याचिकाकर्ता को ओसीआई रजिस्ट्रेशन दिया गया था। जज ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता 'ईश्वर' का संदेश फैलाने के लिए उपदेश देते हैं या ऐसी गतिविधियां करते हैं, तो इसे 'मिशनरी गतिविधि' माना जाएगा। इसलिए, उन्हें इसके लिए विशेष अनुमति लेनी चाहिए थी।

मिशनरी गतिविधि  को लेकर क्या बोले? 
उन्होंने ऐसी कोई अनुमति नहीं ली है। जज ने कहा कि याचिकाकर्ता पर लगे आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, उनका रजिस्ट्रेशन रद्द करना सही है। जज ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने साफ तौर पर यह दावा किया था कि वे कभी किसी मिशनरी गतिविधि में शामिल नहीं रहे और भारत केवल अपनी मां, परिवार और दोस्तों से मिलने आए थे, जो कि साफ तौर पर एक झूठ है।


जज ने आगे कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मिलने वाला उपाय एक 'न्यायोचित उपाय' है। लेकिन, याचिकाकर्ता के सरासर झूठ बोलने और कोर्ट के रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों को देखते हुए, उन्हें यह राहत नहीं दी जा सकती।
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