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पाक को अमेरिका का कड़ा संदेश- आतंकियों का साथ छोड़े, भारत से खराब रिश्तों की यही है जड़
Tue, 22 Oct 2019 09:03 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 22 Oct 2019 09:03 AM IST
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हाफिज सईद-मसूद अजहर (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
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अमेरिका ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा चरमपंथी समूहों को समर्थन देने और उन्हें अपनी जमीन पर पनाह देना मुख्य कारण हैं, जिसकी वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत अवरूद्ध होती है।
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दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के सहायक सचिव एलिस जी वेल्स ने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण बातचीत के लिए पहले विश्वास स्थापित करना होता है और इस्लामाबाद का नई दिल्ली के साथ बातचीत में मुख्य बाधा पाकिस्तान द्वारा लगातार चरमपंथी समूहों का समर्थन देना है जिससे सीमा पार आतंकवाद में बढ़ोतरी होती है। इस कारण दोनों देशों में विश्वास स्थापित नहीं हो पा रहा है।
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उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का समर्थन करना जो नियंत्रण रेखा पर हिंसा बढ़ाना चाहते हैं, जिस कारण हालात अस्थिर होते हैं और इन समूहों द्वारा किए गए सभी कृत्यों के लिए पाकिस्तानी अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार है।
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अमेरिका का यह बयान उस समय आया है जब एक दिन पहले ही जम्मू कश्मीर के तंगधार सेक्टर में आतंकियों ने सीमा पार से घुसपैठ करने की कोशिश की, जिसके जवाब में जाबांज भारतीय सेना ने पीओके के तीन आतंकवादी शिविरों को तबाह कर दिया। भारत की इस जवाबी कार्रवाई में छह से 10 पाकिस्तानी सैनिक भी मार गिराए गए।
वेल्स ने कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान में सीधे संवाद को समर्थन करता है, जैसा कि 1972 के शिमला समझौता में उल्लेखित हैं।
वेल्स ने उप-शत्रुता और हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के एशिया में उपसमिति को बताया कि हमारा मानना है कि 1972 का शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने की सबसे अधिक क्षमता रखता है। साथ ही सीधा संवाद कायम करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि 2006-2007 में भारत और पाकिस्तान के बीच काफी मुद्दों को लेकर प्रगति हुई थी, जिसमें कश्मीर मुद्दा भी शामिल था।
वेल्स ने कहा कि हमारा मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी सफल वार्ता की नींव पाकिस्तान द्वारा अपने क्षेत्र में आतंकवादियों और आतंकवादियों के खिलाफ निरंतर और अपरिवर्तनीय कदम उठाने पर आधारित है।
अनुच्छेद 370 हटाने के भारत के उद्देश्य का समर्थन करते हैं: अमेरिका
ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि वह जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के पीछे के भारत के मकसद का समर्थन करता है। उसने कहा कि वह भारत के पांच अगस्त के इस फैसले के बाद से राज्य में हालात पर करीब से नजर रख रहा है।
एलिस जी वेल्स ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति की एशिया, प्रशांत एवं निरस्त्रीकरण उपसमिति को बताया कि भारत सरकार ने तर्क दिया है कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त करने का फैसला आर्थिक विकास करने, भ्रष्टाचार कम करने और खासकर महिलाओं एवं अल्पसंख्यकों के संदर्भ में जम्मू-कश्मीर में सभी राष्ट्रीय कानूनों को समानता से लागू करने के लिए लिया गया है।