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पूर्व अमेरिकी राजनयिक: भारत को कूटनीतिक महत्व वाला सहयोगी मानता है अमेरिका
एजेंसी, वाशिंगटन
Updated Wed, 19 Jul 2017 01:43 AM IST
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नई सरकार में भारत-अमेरिका संबंधों की वकालत करते हुए पूर्व अमेरिकी राजनयिक ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन भारत को मूल तौर पर कूटनीतिक महत्व वाला सहयोगी मानता है। पूर्व सहायक विदेश मंत्री (दक्षिण और मध्य एशिया) निशा देसाई बिस्वाल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन भी ओबामा प्रशासन की तरह ही भारत को मूल तौर पर कूटनीतिक सहयोगी के रूप में स्वीकार करता है।
वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर आधारित समान मूल्य, लक्ष्य और उद्देश्यों वाले और समग्र सुरक्षा मुहैया कराने में और क्षमताएं बढ़ाने वाले देश के तौर पर भारत को महत्व देता है। बिस्वाल ने कहा कि ओबामा प्रशासन ने प्रशांत महासागर और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को कूटनीतिक साझीदार बनाकर बड़ा दांव खेला था।
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि ट्रंप प्रशासन इसे जारी रखेगा। हम कुछ घोषणाओं और रक्षा सहयोग के मामले में इसे देख भी रहे हैं। बिस्वाल ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले महीने हुई सफल बैठक दोनों देशों के संबंधों में सुधार एवं मजबूती का संकेत है।
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उन्होंने कहा कि मैं मानती हूं कि भारतीय प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा काफी अच्छी रही। दोनों ही पक्षों ने न्यायसंगत तरीकों से अपनी महत्वाकांक्षा को कम ही रखा और यात्रा से पहले मतभेद वाले कुछ क्षेत्रों को भी इससे अलग ही रखा।
वहीं, भारत और चीन के बीच डोकलाम क्षेत्र में जारी गतिरोध के बीच पूर्व राजनयिक ने भारत को इस क्षेत्र की मजबूत शक्ति बताया है। पूर्व राजनयिक ने कहा है कि सिक्किम क्षेत्र में पेइचिंग के व्यवहार से इस क्षेत्र के देशों में अशांति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि चीन को एक अहम ताकत के रूप में भारत का सम्मान करना चाहिए।
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वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर आधारित समान मूल्य, लक्ष्य और उद्देश्यों वाले और समग्र सुरक्षा मुहैया कराने में और क्षमताएं बढ़ाने वाले देश के तौर पर भारत को महत्व देता है। बिस्वाल ने कहा कि ओबामा प्रशासन ने प्रशांत महासागर और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को कूटनीतिक साझीदार बनाकर बड़ा दांव खेला था।
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उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि ट्रंप प्रशासन इसे जारी रखेगा। हम कुछ घोषणाओं और रक्षा सहयोग के मामले में इसे देख भी रहे हैं। बिस्वाल ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले महीने हुई सफल बैठक दोनों देशों के संबंधों में सुधार एवं मजबूती का संकेत है।
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उन्होंने कहा कि मैं मानती हूं कि भारतीय प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा काफी अच्छी रही। दोनों ही पक्षों ने न्यायसंगत तरीकों से अपनी महत्वाकांक्षा को कम ही रखा और यात्रा से पहले मतभेद वाले कुछ क्षेत्रों को भी इससे अलग ही रखा।
वहीं, भारत और चीन के बीच डोकलाम क्षेत्र में जारी गतिरोध के बीच पूर्व राजनयिक ने भारत को इस क्षेत्र की मजबूत शक्ति बताया है। पूर्व राजनयिक ने कहा है कि सिक्किम क्षेत्र में पेइचिंग के व्यवहार से इस क्षेत्र के देशों में अशांति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि चीन को एक अहम ताकत के रूप में भारत का सम्मान करना चाहिए।