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अमरनाथ यात्रा का जिक्र है 1600 साल पुराना, गरेड़िया बूटा मलिक 20वीं सदी की खोज

Mon, 09 Jul 2018 09:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jul 2018 09:49 PM IST
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 Amarnath Yatra is more than 1600 year old Muslim shepherd buta malik is a myth
सोशल मीडिया पर समय समय पर कुछ आत्म-प्रशंसित इतिहासकार और बुद्धिजीवी ऐसी बातें फैलाते हैं कि उसे संभालने के लिए मेनस्ट्रीम मीडिया को हस्तक्षेप करना पड़ता है। लेकिन तब तक झूठ का शोर सोशल मीडिया पर इतना बढ़ चुका होता है कि सच और झूठ की पहचान भी मुश्किल हो जाती है। लेकिन इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि सोशल मीडिया में सच्चाई कम अफवाहें ज्यादा होती हैं। अब अफवाह अमरनाथ गुफा को लेकर है। 
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पिछले दो सालों से यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि अमरनाथ गुफा की खोज किसी मुस्लिम गरेड़िया ने की थी। आश्चर्य तब हुआ जब इस झूठ में सेलिब्रिटी भी शामिल हो गईं और दीया मिर्जा ने तो ट्वीट भी किया। ऐसा ही इस बार भी हुआ जब खुद को इतिहासकार बताने वाला इंसान गलत साक्ष्यों के साथ पकड़ा गया।
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वह अमरनाथ गुफा और यात्रा को लेकर गलत अफवाह फैला रहा है कि गुफा की खोज किसी गरेड़िये ने की है। लेकिन हमने अमरनाथ यात्रा को लेकर पड़ताल करनी शुरू की तो कई साक्ष्य सामने आए जिससे यह साबित करने में मदद मिली की अमरनाथ गुफा को लेकर चलाई जा रही बाते पूरी तरह गलत हैं।
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 1842 में जब ब्रिटिश ट्रेवलर जी टी विगेन भारत आए तो वह भारतीय धर्मस्थली को देखते हुए अमरनाथ भी गए। अमरनाथ विगेन ने 1843 में  अमरनाथ यात्रा के बारे में लिखा। उन्होंने लिखा कि वह भारत के सबसे प्रसिद्ध धर्मस्थल अमरनाथ की जानकारी दी है। उन्होंने हिंदू महीने सावन के बारे में भी जानकारी दी है। 

 

 Amarnath Yatra is more than 1600 year old Muslim shepherd buta malik is a myth

अमरनाथ यात्रा को लेकर कश्मीर में इस्लाम धर्मावलंबी और अलगाववादी घाटी में कई सहस्राब्दी-पुराने हिंदू मूल को अस्वीकार करने के लिए अक्सर झूठ का सहारा लेते रहे हैं। इन्हीं सब झूठों को देखते हुए कई बार यात्रा रोकने की बात कही जाती रही है। लेकिन इन सबके बीच हिंदू बिना रुके सदियों से कई-कई इस्लामिक हमलों के बाद भी अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं।

अमरनाथ यात्रा का जिक्र नीलमाता पुराण में मिलता है। जिसमें कहा गया है कि अमरेशा में जो स्नान करता है उस इंसान को हजार गायों को दान करने जितना पुण्य मिलता है। नीलमाता पुराण इस्लामिक प्रोफेट के जन्म से कई सौ साल पहले लिखा गया था। बता दें कि नीलमाता पुराण का जिक्र तीसरी शताब्दी में जिक्र आता है। इससे साफ है कि हिंदू अमरनाथ तीर्थ का जिक्र कश्मीर के इतिहास से हजारों साल पुराना है। इसी दौरान ब्रंगेश संहिता में भी शिव का जिक्र मिलता है। जब भगवान शिव ने देवताओं को  अमृत कलश दिया था।
 
अमरनाथ यात्रा का जिक्र कश्मीरी इतिहासकार की 12वीं शताब्दी में लिखी गई किताब राजतरंगिनी में भी मिलता है। वहीं 15वीं शताब्दी में भी कई ग्रंथों में अमरनाथ यात्रा का जिक्र मिलता है। इसलिए यह कहना की इस बीच अमरनाथ कहीं लुप्त हो गया था या खो गया था यह माना नहीं जा सकता है।

फ्रेंच ट्रैवलर फ्रांसिस बर्नियर ऑरंगजेब के साथ 1663 में कश्मीर गए थे। वह भी अपनी यात्रा वृतांत में अमरनाथ गुफा का जिक्र करते हैं। इसलिए यह साफ हो जाता है कि हिंदू तीर्थयात्री 1600 सालों से बिना रुके अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। वह भी कई तरह की आपदाओं और विषमताओं के बीच। जिहाद हमला और पत्थरबाजों का हमला भी  इस यात्रा को रोकने में नाकाम रही है। इसमें रुचिकर यह है कि कभी यात्रा रोकी नहीं गई है।

इसलिए जिस तरह से यह अफवाह आती रहती है कि 1850 में किसी मुस्लिम गरड़िये बूटा मलिक ने अमरनाथ गुफा की खोज की थी वह बेमानी हो जाती है। 1900 शताब्दी तक लिखे गए लेखों और आलेखों में ऐसा कोई जिक्र नहीं मिलता है। यह जिक्र सिर्फ 20वीं शताब्दी में पहली बार आया है। 

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