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अमरनाथ यात्रा: राजमार्ग पर प्रतिबंध के आदेश पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा- इससे टकराव पैदा होता है
Mon, 08 Jul 2019 07:47 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 08 Jul 2019 07:47 PM IST
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फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : ANI
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अमरनाथ यात्रा के दौरान स्थानीय नागरिकों द्वारा जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग के उपयोग पर सरकार के प्रतिबंध पर पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के ऐसे कदम से टकराव पैदा होता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा, "कश्मीरी पर्यटन को भी परेशानी है, क्या जरूरत है बंद करने की? पहले भी वो आराम से चलते थे, आज भी आराम से चलते हैं। इससे क्या होता है कि टकराव पैदा होता है।" उन्होंने कहा, "अब इन्होंने तो दो घंटे का क्या है, वो दो घंटे भी नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये धर्म का मामला है और धर्म पर कोई हमला करने वाला नहीं है।"
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इससे पहले रविवार को पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने भी अमरनाथ यात्रा के लिए सरकार द्वारा किए गए इंतजामों पर नाराजगी जताई और कहा कि ये कश्मीर के लोगों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, "अमरनाथ यात्रा सालों से होती आ रही है। हम अमरनाथ यात्रा का समर्थन करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से जो इंतजाम इस साल किए गए हैं, वह कश्मीर के लोगों के खिलाफ हैं। इससे स्थानीय लोगों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। मैं राज्यपाल से इस मामले पर संज्ञान लेने के लिए अनुरोध करती हूं।"
पुलिस व प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भगवती नगर आधार शिविर से प्रतिदिन तीन से चार हजार अमरनाथ यात्री विभिन्न जत्थों में रवाना किए जाते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु निजी तौर पर सीधे घाटी पहुंच जाते हैं। इससे घाटी के आधार शिविरों में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक काफी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में मौसम अथवा कानून व्यवस्था बिगड़ने पर यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती हो जाती है। हालांकि आधिकारिक रूप से कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। परंतु यात्रा व्यवस्था से जुड़े सूत्र इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा, "कश्मीरी पर्यटन को भी परेशानी है, क्या जरूरत है बंद करने की? पहले भी वो आराम से चलते थे, आज भी आराम से चलते हैं। इससे क्या होता है कि टकराव पैदा होता है।" उन्होंने कहा, "अब इन्होंने तो दो घंटे का क्या है, वो दो घंटे भी नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये धर्म का मामला है और धर्म पर कोई हमला करने वाला नहीं है।"
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Farooq Abdullah: Ab inhone to 2 ghante ka kiya hai, vo 2 ghante bhi nahi rakhna chahiye kyunki ye dharm ka mamla hai aur dharm pe koi hamla karne wala nahi hai.#AmarnathYatra https://t.co/awZdjVZbjy
— ANI (@ANI) July 8, 2019
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इससे पहले रविवार को पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने भी अमरनाथ यात्रा के लिए सरकार द्वारा किए गए इंतजामों पर नाराजगी जताई और कहा कि ये कश्मीर के लोगों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, "अमरनाथ यात्रा सालों से होती आ रही है। हम अमरनाथ यात्रा का समर्थन करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से जो इंतजाम इस साल किए गए हैं, वह कश्मीर के लोगों के खिलाफ हैं। इससे स्थानीय लोगों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। मैं राज्यपाल से इस मामले पर संज्ञान लेने के लिए अनुरोध करती हूं।"
सोमवार को एक लाख के पार होगा दर्शनार्थियों का आंकड़ा
श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा में दर्शन करने वाले शिव भक्तों का आंकड़ा सोमवार आठ जुलाई को एक लाख के पार हो जाएगा। रविवार को यात्रा के सातवें दिन 14,293 यात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इसके साथ कुल दर्शनार्थियों का आंकड़ा 95 हजार 923 तक पहुंच गया है।कश्मीर में यात्रियों की संख्या बढ़ने से अमरनाथ यात्रा रोकी गई
घाटी के पहलगाम व बालटाल आधार शिविरों में अमरनाथ यात्रियों की संख्या ज्यादा हो जाने के कारण जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से जाने वाला यात्रियों का जत्था सोमवार को यहां से नहीं भेजा जाएगा। हालांकि देर रात तक इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई थी।पुलिस व प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भगवती नगर आधार शिविर से प्रतिदिन तीन से चार हजार अमरनाथ यात्री विभिन्न जत्थों में रवाना किए जाते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु निजी तौर पर सीधे घाटी पहुंच जाते हैं। इससे घाटी के आधार शिविरों में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक काफी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में मौसम अथवा कानून व्यवस्था बिगड़ने पर यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती हो जाती है। हालांकि आधिकारिक रूप से कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। परंतु यात्रा व्यवस्था से जुड़े सूत्र इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।