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Hindi News ›   India News ›   Amar Ujala Shabd Samman 2025 renowned sitar maestro Ustad Shujaat Husain Khan

सात सुरों से शब्द साधना: जब उस्ताद की सितार ने कहे शब्द और श्रोताओं ने सुना संगीत का साहित्य

Thu, 12 Feb 2026 06:55 AM IST
Vibhas Sane विभास साने
Updated Thu, 12 Feb 2026 06:55 AM IST
सार

सितार नवाज उस्ताद शुजात हुसैन खान के मुख्य आतिथ्य में बुधवार को अमर उजाला शब्द सम्मान हुआ। उन्होंने न सिर्फ साहित्यकारों को सम्मानित किया, बल्कि सितार के सुरों से समारोह को अलंकृत भी किया।

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Amar Ujala Shabd Samman 2025 renowned sitar maestro Ustad Shujaat Husain Khan
अमर उजाला शब्द सम्मान में उस्ताद शुजात हुसैन खान। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सात सुरों से मिलकर बनता है संगीत और उसमें जब शब्दों की चेतना जुड़ जाती है, तो वे सीधे दिलों को जोड़ती है। बुधवार की शाम अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह में यही अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अलंकरण समारोह में पहले शब्द साधकों का सम्मान हुआ, फिर सुरों के साधक उस्ताद शुजात हुसैन खान ने अपनी सितार और गायकी से सबके मन को मोह लिया। शब्द साधना के मंच पर उस्ताद जब बैठे, तो लगा कि वे सिर्फ सितार के तारों को छेड़ेंगे, लेकिन उन्होंने सितार के साथ-साथ अपनी गायकी से भी परिचय कराया। 

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महादेव पर लिखी बंदिश से शुरुआत, भजन पर समापन
क्या ग़ज़ल, क्या शे'र, क्या भजन और क्या सूफी गीत... अलंकरण समारोह की इस शाम में ऐसा कुछ नहीं बचा, जो उस्ताद शुजात हुसैन की सितार और उनकी गायकी से न निकला हो। उस्ताद इमदादखानी घराने से आते हैं। सितार का गायकी अंग उस्ताद के वादन की खूबी है। मौसीकी की यह घरानेदार खूबी उन्हें अपने वालिद और गुरु उस्ताद विलायत खान से मिली, जिसमें सितार के तारों पर मानो कंठ-संगीत का विस्तार सुनाई देता हो। महादेव पर लिखी बंदिश से सितार के सुरों का सफर शुरू हुआ, जो भजन पर जाकर थमा। 
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दर्शन देहो शंकर महादेव
उस्ताद ने प्रस्तुति की शुरूआत भगवान शंकर पर लिखी गई तीन ताल में निबद्ध बंदिश 'दर्शन देहो शंकर महादेव' से की। उन्होंने इसे गाया भी और सितार के तारों से प्रस्तुत भी किया। मींड के जरिए उन्होंने बंदिश के शब्दों में मिठास पैदा की। सितार के साथ तबले पर जुहैब अहमद खान और शारिक मुस्तफा तथा ढोलक पर प्रतीक कुमार की जुगलबंदी गजब की थी। 
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अपनी प्रस्तुति में उस्ताद धीरे-धीरे तीनों सप्तकों की यात्रा पर ले गए। जोड़ और झाला की क्रमिक गति ने लयों को रंजकता दी। मींड, गमक और सूक्ष्म मुरकियों ने बंदिश के शब्दों में मधुरता और गहराई जोड़ी। मिजराब से निकली तानों में ऐसी सरलता थी कि हर स्वर स्पष्ट उभरकर सामने आया।

प्रेम, विरह, विरक्ति के भाव
बंदिश के बाद उस्ताद ने ग़ज़ल-गायकी की ओर रुख किया। यहां उनका गायकी अंग अपने उत्कर्ष पर दिखाई दिया। प्रेम, विरह और विरक्ति के तीनों भाव उनकी सितार के तारों पर जीवंत थे। हर भाव उनकी सितार में सुनाई दे रहे थे और सुरों में लिपटे शब्द उन्हें एक अलग मुकाम पर ले जा रहे थे। एक सुर से दूसरे सुर तक की यात्रा मानो हृदय के हर भावों को छू रही थी। यह प्रस्तुति गायकी अंग का अनुपम उदाहरण और शब्द-स्वर का अद्वितीय संगम थी।


उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कृष्ण बिहारी नूर की ग़ज़ल 'जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं' को गाया और सुर-दर-सुर सितार के तारों पर भी उतारा। इसके बाद एक-एक उन्होंने कई गजलों को गाया और उसके अल्फाजों को सितार की धुनों के साथ विस्तार देते रहे और रंजकता में पिरोते रहे। उन्होंने 'उलझी है मेरी सांसें कुछ ऐसे तुम्हारी सांसों में', 'खामोश लब हैं, झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई-नई है' जैसी ग़ज़लें गाईं। इसके बाद अमीर खुसरो रचित 'छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाय के', जावेद अख्तर के लिखे भजन 'ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे' और गांधीजी के प्रिय भजन 'वैष्णो जन ते तेने कहिए' को सुनाया।

ये भी पढ़ें: अमर उजाला शब्द सम्मान-2025: ममता कालिया और अरमबम ओंगबी को 'आकाशदीप', इन्हें मिला श्रेष्ठ कृति सम्मान

शब्द सम्मान
अमर उजाला का यह शब्द सम्मान अलंकरण समारोह दिल्ली में हुआ। हिंदी की प्रख्यात कथाकार ममता कालिया और मणिपुरी की विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी को सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' से सम्मानित किया गया। सविता सिंह, नाइश हसन, शहादत, मनीष यादव को श्रेष्ठ कृति सम्मान और सुजाता शिवेन को भाषाबंधु अलंकरण से सम्मानित किया गया।


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