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अमर उजाला पोल: देश में होने वाली इंजीनियरिंग की पढ़ाई में किया जाना चाहिए बदलाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 15 Jul 2018 08:16 PM IST
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हाल ही में रोजगार योग्यता मूल्यांकन कंपनी एस्पाइरिंग माइंड्स ने एक ऐसा शोध किया है जिसमें पाया गया है कि भारत में 94 फीसदी इंजीनियर सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट की नौकरी के काबिल नहीं हैं। हालांकि इस शोध को ग्लोबल एजुकेशन के अध्यक्ष और इन्फोसिस के बोर्ड सदस्य मोहनदास मणिपाल ने पूरी तरह से बकवास बताया।
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वहीं टेक महिंद्रा के सीईओ और एमजी सीपी गुरनानी का कहना है कि 94 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट भर्ती के लिए पूरी तरह फिट नहीं हैं। टॉप 10 आईटी कंपनियां भी केवल 6 फीसदी की ही भर्ती करती हैं। उनसे जब यह पूछा गया कि बाकी के 94 फीसदी का फिर क्या होगा? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बड़े कौशल अंतर के कारण अब उन्हें भी काम दोबारा सिखाया जाता है, जिनकी भर्ती की जाती है।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या समय आ गया है कि देश में होने वाली इंजीनियरिंग की पढ़ाई में बदलाव किया जाना चाहिए?'
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पोल के जवाब में हमें कुल 3,226 वोट मिले। इनमें 93.3 फीसदी (3,010 वोट) पाठकों ने माना कि समय आ गया है कि देश में होने वाली इंजीनियरिंग की पढ़ाई में बदलाव किया जाना चाहिए, जबकि 6.7 फीसदी (216 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि देश में चल रही इंजीनियरिंग की पढ़ाई में बदलाव किए जाने की जरूरत नहीं है।