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अमर उजाला पोल: जाति के आधार पर राजनीति करना देशहित में नहीं
Tue, 26 Feb 2019 08:41 PM IST
तिवारी अभिषेक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तिवारी अभिषेक
Updated Tue, 26 Feb 2019 08:41 PM IST
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‘जातिवाद’ वर्तमान भारत की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। सभी विशेषज्ञ इसे भारत के समग्र विकास में सबसे बड़ी बाधा मानते हैं। लेकिन भारतीय राजनीति का कड़वा सच यही है कि हर दल की चुनावी राजनीति के केंद्र में जाति प्रमुख भूमिका निभाती है। उम्मीदवारों के चयन से लेकर संसद में कानून बनाने तक राजनीतिक दलों की भूमिका उनके वोटरों के जातीय समीकरण साधने की कोशिश करती हुई दिखती है।
ऐसे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रयागराज में सफाईकर्मियों के पैर धुले, और उन्हें सच्चा ‘कर्मयोगी’ कहा गया, तो इसकी व्याख्या भी अलग-अलग दृष्टिकोण से होने लगी। कुछ लोगों ने पीएम के इस कदम को 2019 के चुनाव से जोड़कर देखा तो कुछ ने इसे उनकी सामाजिक समरसता और कर्म को प्रधानता देने वाली सोच का परिणाम बताया।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि विकास ही देश का सबसे बड़ा मुद्दा है?'
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पोल के जवाब में हमें कुल 7,009 वोट मिले। इनमें 90.07 फीसदी (6,313 वोट) पाठकों ने माना कि जाति के आधार पर राजनीति करना देशहित में नहीं है, जबकि 9.93 फीसदी (696 वोट) पाठकों ने जाति के आधार पर की जाने वाली राजनीति को देशहित में सही बताया है।
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ऐसे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रयागराज में सफाईकर्मियों के पैर धुले, और उन्हें सच्चा ‘कर्मयोगी’ कहा गया, तो इसकी व्याख्या भी अलग-अलग दृष्टिकोण से होने लगी। कुछ लोगों ने पीएम के इस कदम को 2019 के चुनाव से जोड़कर देखा तो कुछ ने इसे उनकी सामाजिक समरसता और कर्म को प्रधानता देने वाली सोच का परिणाम बताया।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि विकास ही देश का सबसे बड़ा मुद्दा है?'
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पोल के जवाब में हमें कुल 7,009 वोट मिले। इनमें 90.07 फीसदी (6,313 वोट) पाठकों ने माना कि जाति के आधार पर राजनीति करना देशहित में नहीं है, जबकि 9.93 फीसदी (696 वोट) पाठकों ने जाति के आधार पर की जाने वाली राजनीति को देशहित में सही बताया है।