अमर उजाला पोल: 78 फीसदी लोगों की सहानुभूति अखिलेश यादव के साथ
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यूपी के चुनावी दंगल का एलान हो गया है। अखाड़ा भी लगभग तैयार है, लेकिन सूबे की सत्ताधारी पार्टी का भविष्य क्या होगा, इस पर संदेह बना हुआ है। वजह हैं, पार्टी के मौजूदा हालात। पार्टी कई धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है, लेकिन दो सबसे बड़े धड़े अखिलेश और मुलायम की बात करें तो जनता की ज्यादा सहानुभूति किसकी तरफ है, यह जानने के लिए हमने ऑनलाइन पोल कराया। पोल में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।
अमर उजाला पोल में सबसे ज्यादा 78 फीसदी (7832) पाठकों ने कहा कि उनकी सहानुभूति मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ है। 22 फीसदी (2209) पाठकों ने कहा कि अभी नेता जी में दम है, यानी उनकी सहानुभूति मुलायम सिंह के साथ है।
इस दौरान खबरें हैं कि समाजवादी पार्टी में उठे सियासी बवंडर में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। अखिलेश गुट में शामिल रामगोपाल यादव ने कहा कि अब सुलह की कोई गुंजाइश नहीं है। गौरतलब है कि पार्टी नेता विवाद सुलझाने के लिए कई दफा आपस में सुलाह-मश्विरा कर चुके हैं।
सपा में उठे सियासी बवंडर से बसपा-बीजेपी को फायदा
इससे पहले कराए गए ऑनलाइन पोल में पाठकों से पूछा गया था कि सपा में मचे घमासान से बीजेपी को फायदा होगा, बसपा को, या कांग्रेस को?
पोल में कुल 17805 पाठकों ने हिस्सा लिया था। सबसे ज्यादा 47.02 फीसदी यानि 8372 पाठकों ने माना कि सपा में चल रही कलह का फायदा बसपा को होगा। 46.01 फीसदी यानि 8192 पाठकों ने माना कि इसका फायदा भाजपा को होगा। वहीं, 6.97 फीसदी यानि 1241 पाठकों ने माना कि इसका सीधा फायदा कांग्रेस को होगा।
जनता की नजर में अखिलेश को मुलायम से कर लेनी चाहिए सुलह
वहीं, एक अन्य ऑनलाइन पोल में सवाल पूछा गया था कि मौजूदा स्थिति में अखिलेश यादव के पास सबसे बेहतर विकल्प क्या है?
सवाल के जवाब में तीन विकल्प दिए गए थे। पाठकों से पूछा गया कि अखिलेश को मुलायम से सुलह कर लेनी चाहिए, अलग पार्टी बनानी चाहिए या फिर पार्टी बदलनी चाहिए?
पोल में कुल 10016 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया था। सबसे ज्यादा 48.37 फीसदी यानि 4,845 पाठकों का मानना रहा कि अखिलेश को मुलायम से सुलह कर लेनी चाहिए। 44.62 फीसदी यानि 4,469 पाठकों ने माना कि अखिलेश को अलग पार्टी बनानी चाहिए। वहीं 7.01 फीसदी यानि 702 पाठकों ने माना कि अखिलेश को पर्टी बदल लेनी चाहिए।