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अमर उजाला पोल: दावोस में PM मोदी के भाषण के बाद विदेशी कंपनियों का भारत के प्रति नजरिया बदलेगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 24 Jan 2018 08:17 PM IST
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मंगलवार यानि 23 जनवरी को वर्ल्ड इकोनामिक फोरम (डब्लूईएफ) की बैठक में पहली बार शिरकत करने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण को वैश्विक समस्याओं पर केंद्रित रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि साल 1997 में जब आखिरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में एचडी देवगौड़ा ने इस सालाना कार्यक्रम में भाग लिया था तब भारत की जीडीपी 400 अरब डॉलर थी जो अब छह गुना हो चुकी है।
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पीएम ने पिछले 20 साल में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा था कि तब इस फोरम का सूत्र वाक्य था ‘बिल्डिंग दि नेटवर्क सोसाइटी’ लेकिन आज यह विचार सदियों पुराना लगता है। उन्होंने कहा था कि इन वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ पूरी दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है। इस बदलाव को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा था कि तब शतरंज के खिलाड़ियों को कंप्यूटर से हारने का डर भी नहीं सताता था। लेकिन तब भी दावोस अपने समय से आगे था और उसे वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के कारण जाना जाता था
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मोदी ने कहा था कि यह दुनिया जितनी तेजी से बदल रही है, उसके सामने शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा की नई और गंभीर चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। पूरी दुनिया टेक्नोलाजी के इशारे पर चल रही है। जोड़ने, तोड़ने और मोड़ने में सोशल मीडिया का प्रयोग हो रहा है। डाटा आज सबसे बड़ी संपदा बन चुका है। जो इसे काबू में रखेगा, दुनिया पर उसका वर्चस्व स्थापित होगा। लेकिन भारत तोड़ने और मोड़ने में नहीं बल्कि दुनिया के लोगों को जोड़ने में यकीन रखता है।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या आप मानते हैं कि दावोस में प्रधानमंत्री के भाषण के बाद विदेशी कंपनियों का भारत के प्रति नजरिया बदलेगा?'
पोल के जवाब में हमें कुल 4,722 वोट मिले। इनमें 68.53 फीसदी (3,236 वोट) पाठकों ने माना कि दावोस में पीएम मोदी के भाषण के बाद विदेशी कंपनियों का भारत के प्रति नजरिया बदलेगा, जबकि 27.76 फीसदी (1,311 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि दावोस में पीएम के भाषण के बाद भी विदेशी कंपनियों का भारत के प्रति नजरिया नहीं बदलेगा । वहीं 3.71 फीसदी (175 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।